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कोर्ट ने ‘द कारवाँ’ के पत्रकार मनदीप पुनिया को जमानत दी, बिना अनुमति के देश छोड़ने की इजाजत नहीं

अदालत ने पुनिया को उनकी पूर्व अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा, "आरोपित जमानत पर रिहाई के दौरान इस प्रकार का कोई अपराध या कोई अन्य अपराध नहीं करेगा। आरोपित किसी भी तरह सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा।"

दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार (फरवरी 02, 2021) को फ्रीलांस जर्नलिस्ट मनदीप पुनिया को जमानत दे दी। पुनिया द कारवाँ और जनपथ के लिए काम करता है। शनिवार (जनवरी 30, 2021) रात सिंघू बॉर्डर पर स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) के साथ दुर्व्यवहार करने के बाद दिल्ली पुलिस ने मनदीप पुनिया को हिरासत में लिया था। 

25,000 के निजी मुचलके पर दी गई जमानत

न्यायालय ने कहा कि शिकायतकर्ता, पीड़ित और गवाह सभी पुलिसकर्मी हैं। इसलिए इस बात की कोई संभावना नहीं है कि आरोपित / प्रार्थी किसी पुलिस अधिकारी को प्रभावित कर सकता है। इसके बाद अदालत ने उसे 25 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। वहीं पुलिस ने उस पर लोगों को भड़काने व कामकाज में बाधा पहुँचाने का आरोप लगाते हुए जमानत आवेदन पर विरोध जताया था। रोहिणी अदालत के मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सतवीर सिंह लांबा ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद फैसला मंगलवार को सुनने का निर्णय किया था, जिस पर फैसला सुनाते हुए उन्होंने मनदीप को जमानत दे दी।

अदालत ने पुनिया को उनकी पूर्व अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा, “आरोपित जमानत पर रिहाई के दौरान इस प्रकार का कोई अपराध या कोई अन्य अपराध नहीं करेगा। आरोपित किसी भी तरह सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा।” अदालत ने निर्देश दिया कि जब जाँच एजेंसी को आवश्यकता होगी, तब आरोपित पेश होगा।

वहीं अभियोजन पक्ष ने उसकी जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उसने अपनी पहचान छुपाई और अपने सहयोगियों के साथ जबरन बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की। आरोपित अपने सहयोगियों के साथ नारेबाजी करता रहा। 

इस दौरान हुई हिंसा व मारपीट में कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं। ऐसे में उसे जमानत पर रिहा नहीं किया जाए क्योंकि वह साक्ष्य को मिटाने की कोशिश कर सकता है और फिर से गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त हो सकता है।

मनदीप पुनिया की रिहाई के लिए ‘पत्रकारों’ का पुलिस मुख्यालय पर जेएनयू टाइप स्टंट

पुनिया की गिरफ्तारी के बाद उसके समर्थन में ‘पत्रकारों’ को रविवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय में नारेबाजी करते हुए देखा गया। वो लोग ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ के नारे लगा रहे थे। पुनिया कथित तौर पर बैरिकेड हटाने की कोशिश कर रहा था और उसने पुलिस के साथ दुर्व्यवहार किया, जिसके कारण उसे हिरासत में लिया गया था।

गिरफ्तारी के बारे में बताते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि पुनिया प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा था और उसके पास प्रेस आईडी कार्ड नहीं था। वह उन बैरिकेड के माध्यम से जाने की कोशिश कर रहा था जो सुरक्षा के लिहाज से लगाए गए थे। इस दौरान पुलिसकर्मियों और उनके बीच विवाद शुरू हो गया। दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर के विरोध ने यह स्पष्ट कर दिया कि कुछ ‘पत्रकारों’ के लिए, पुलिस के साथ दुर्व्यवहार ‘प्रेस स्वतंत्रता’ के दायरे में आता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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