Wednesday, February 24, 2021
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निधि राजदान के ‘प्रोफेसरी’ वाले दावे से 2 महीने पहले ही हार्वर्ड ने नियुक्तियों पर लगा दी थी रोक

अप्रैल 2020 की शुरुआत में हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने घोषणा की थी कि वे नई नियुक्ति और वेतन पर तत्काल रोक लगा रहे हैं। यह निर्णय कोविड-19 को लेकर लिया गया था। यहाँ पर बता दें कि निधि राजदान ने घोषणा की थी कि वह जून 2020 में एक एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में विश्वविद्यालय में शामिल होने वाली हैं।

एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार निधि राजदान शुक्रवार (15 जनवरी 2021) से ही चर्चा में बनी हुई हैं। उन्होंने खुद को ‘फिशिंग अटैक’ का शिकार बताते हुए कहा था कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से जो ऑफर मिला था, वह फेक था।

मामले में नया मोड़ तब आया जब निधि राजदान ने एक ब्लॉग लिखा। इसमें उन्होंने बताया कि वह ‘फिशिंग अटैक’ का शिकार कैसे बनीं। इस ब्लॉग में उन्होंने कई सारे सवालों के जवाब दिए हैं, लेकिन कई सारे सवाल भी खड़े हुए हैं। हमारे पास हार्वर्ड विश्वविद्यालय से संबंधित कई रिपोर्ट्स हैं जो इस घटना की परत दर परत को खोलते हैं।

अप्रैल 2020 की शुरुआत में हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने घोषणा की थी कि वे नई नियुक्ति और वेतन पर तत्काल रोक लगा रहे हैं। यह निर्णय कोविड-19 को लेकर लिया गया था। यहाँ पर बता दें कि निधि राजदान ने घोषणा की थी कि वह जून 2020 में एक एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में विश्वविद्यालय में शामिल होने वाली हैं।

Harvard University had announced a freeze on salary and hiring in April 2020, two months before Nidhi Razdan said she was joining the University as an associate professor.
Screenshot of a headline by CNBC

हार्वर्ड विश्वविद्यालय के दैनिक छात्र समाचार पत्र द हार्वर्ड क्रिमसन में छपी रिपोर्ट में बताया गया था कि संस्थान में खर्चों पर रोक लगाई जा रही है। यहाँ पर होने वाली नए पदों की भर्तियाँ भी स्थगित कर दी गई है ताकि इस पैसे को बचाकर देश की अर्थव्यवस्था में योगदान किया जा सके।

विश्वविद्यालय के अध्यक्ष लॉरेंस बेको, कार्यकारी उपाध्यक्ष कैथरीन लैप और प्रोवोस्ट एलन गर्बर के एक संयुक्त ईमेल में कहा गया था, “भविष्य में इस तरह के कई निर्णय और विकल्प तेजी से सामने आएँगे। हालाँकि यह पहले से स्पष्ट है कि हमें अपने राजस्व में गिरावट के साथ अपने खर्च को श्रेणीबद्ध करने के लिए तुरंत कुछ कार्रवाई करने की आवश्यकता है।” उन्होंने कहा कि दुनिया भर के अन्य विश्विद्यालयों की तरह हार्वर्ड विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति पर भी महामारी का असर पड़ा है।

ईमेल में कहा गया था, “हमारे राजस्व के प्रमुख स्रोत- ट्यूशन, दान, कार्यकारी और सतत शिक्षा और रिसर्च सपोर्ट- अभी खतरे में हैं और हमें आर्थिक सहायता की माँग में वृद्धि की उम्मीद है। महामारी की वजह से हुई आर्थिक गिरावट ने परिवार के बजट को प्रभावित किया है।”

विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने छँटनी और छुट्टी की भी आशंका जताई थी। उन्होंने कहा था, “हम अभी भी विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थितियों की एक पूरी पिक्चर हासिल करने के लिए काम कर रहे हैं।”

हार्वर्ड क्रिमसन की रिपोर्ट में कहा गया, “कार्यों पर महामारी के वित्तीय प्रभावों से निपटने के लिए हमें और क्या अन्य कदम उठाने आवश्यक हैं, यह निर्धारित करने के लिए हम FY21 के बजट की जाँच करेंगे। अधिक जानकारी उपलब्ध होने पर हम आपसे संवाद करेंगे।”

पिछले वित्तीय वर्ष में, विश्वविद्यालय संचालन के लिए 1.9 बिलियन डालर का वित्त पोषण किया गया, जो हार्वर्ड के कुल परिचालन राजस्व का एक तिहाई है। रिपोर्ट में कहा गया कि इस वित्तीय वर्ष के अंत तक यह खर्च 40.9 बिलियन डॉलर था। MIT कम्यूनिटी के अध्यक्ष एल राफेल रीफ ने कहा कि संस्थान अभी यह नहीं जान सका है कि वित्तीय वर्ष 2021 में वैश्विक वित्तीय स्थिति कितनी गंभीर होगी। लेकिन हमें कठिन विकल्पों की उम्मीद करनी चाहिए। अध्यक्ष ने कहा था कि शीर्ष अमरीकी संस्थान महामारी से उत्पन्न एक कठिन आर्थिक वातावरण में लागत को नियंत्रित करने के लिए विकल्पों को ढूँढ़ रहे हैं।

इस प्रकार, इस तथ्य को देखते हुए कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने अप्रैल में ही घोषणा की थी कि वे वेतन और नए पदों पर भर्तियाँ स्थगित कर दी गई है। यह आश्चर्य की बात है कि निधि राजदान ने घोषणा को देखा या सुना नहीं था। उनके अनुसार, उसे इस महीने पता चला कि नौकरी का प्रस्ताव ‘फिशिंग अटैक’ था।

बता दें कि इससे पहले निधि के खुलासे के बाद हार्वर्ड ने बताया था कि उसके कैम्पस में न तो पत्रकारिता का कोई विभाग और न ही कोई कॉलेज है। यहाँ तक कि पत्रकारिता के एक भी प्रोफेसर नहीं हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी स्थित नीमन फाउंडेशन के जर्नलिज्म लैब के सीनियर डायरेक्टर और पूर्व डायरेक्टर जोशुआ बेंटन ने ये खुलासा किया। उन्होंने ये भी बताया कि हार्वर्ड में जर्नलिज्म पर फोकस रख कर सिर्फ मास्टर्स ऑफ लिबरल आर्ट्स नामक डिग्री की पढ़ाई होती है, जिसे कार्यरत पत्रकारों द्वारा ही पढ़ाया जाता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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