मिशन शक्ति की शुरुआत 2020 में हुई थी। 4 चरणों की सफलता को देखते हुए योगी सरकार अब इस कार्यक्रम को गाँवों और कस्बों तक ले जाना चाहती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, यह मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि हर महिला सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे, इसके लिए यह एक सामाजिक आंदोलन है।
सुरक्षित महसूस करें लोग: सीएम योगी
मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की। इस दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया कि नवरात्रि के साथ शुरू हो रहे अभियान के लिए विभागों के बीच अच्छा तालमेल दिखना चाहिए, ताकि कार्यक्रम पूरी तरह सफल रहे।
जोनल एडीजी, आईजी से लेकर डीआईजी तक के शीर्ष पुलिस अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे नियमित रूप से क्षेत्र का दौरा करें, लोगों से बातचीत करें और पुलिस गश्त में व्यक्तिगत रूप से शामिल हों।
मुख्यमंत्री ने कहा, “लोगों को पूरी तरह सुरक्षित होने का एहसास होना चाहिए, जबकि अपराधियों को कानून का खौफ होना चाहिए।”
अभियान के केंद्र में महिला पुलिसकर्मी
मिशन शक्ति की सबसे बड़ी ताकत राज्य का महिला पुलिस बल है। राज्य में अभी 44,000 से ज्यादा महिला पुलिसकर्मी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान के दौरान महिला पुलिस अधिकारियों को और अधिक सक्रिय भूमिका दी जानी चाहिए।
मिशन शक्ति की शुरुआत होने पर अगले 30 दिनों तक महिला पुलिस अधिकारी सभी 57,000 ग्राम पंचायतों और 14,000 शहरी वार्डों का दौरा करेंगी। उनके साथ ग्राम प्रधान, पार्षद, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मी भी होंगे। वे महिलाओं और लड़कियों से सीधे बातचीत करेंगी, उनकी समस्याएँ सुनेंगी और सुरक्षा, अधिकारों और सरकारी कल्याणकारी कार्यक्रमों के बारे में जागरूकता बढ़ाएँगी।
नवरात्रि और आगे आने वाले त्योहारों पर विशेष व्यवस्था की जाएगी। मंदिरों, धार्मिक स्थलों, मेलों और भीड़-भाड़ वाले आयोजनों में महिला पुलिस तैनात की जाएगी। योगी आदित्यनाथ ने महिला उत्पीड़न से निपटने वाले एंटी-रोमियो स्क्वॉड को भी मजबूत करने का निर्देश दिया है।
स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता अभियान
अभियान में जिला स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया जाएगा। स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और उद्योगों में सेमिनार, चर्चाएँ और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। छात्रों को समानता और महिला सुरक्षा के महत्व को खास कर बताया जाएगा। इसके लिए लघु फ़िल्में भी दिखाई जाएँगी।
मुख्यमंत्री ने महिला कैदियों को कानूनी सहायता प्रदान करने, पीड़ितों की तुरंत मदद करने और महिलाओं के खिलाफ अपराधों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि महिला हेल्पलाइन 1090 पर आने वाली हर कॉल को गंभीरता से लेकर उसका समाधान किया जाना चाहिए।
नगर निगमों में पिंक बूथ बनाए जाने की योजना है। प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मी इसे चलाएँगी और ये बूथ चौबीसों घंटे काम करेंगे। मिशन शक्ति केंद्रों को वन-स्टॉप समाधान के रूप में तैयार किया जाएगा, जहाँ महिलाएँ शिकायत दर्ज करा सकेंगी। इन केन्द्रों पर परामर्श, कानूनी सहायता और कार्रवाई करने की भी व्यवस्था होगी।
बूथ कर्मचारियों को डिजिटल साक्ष्य जमा करने और आर्थिक मदद के लिए चल रही योजनाओं के संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
पिछले 4 मिशन शक्ति अभियान की उपलब्धियाँ
मिशन शक्ति ने पिछले चार चरणों में सफलता के झंडे गाड़ दिए हैं। सिर्फ चौथे चरण के दौरान 3.44 लाख से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किए गए। 2.03 करोड़ से ज़्यादा महिलाओं और लड़कियों तक पहुँच बनाई गई। इसके लिए 18,344 महिला पुलिसकर्मी और 9,172 महिला पुलिस अधिकारी तैनात की गईं।
कई विशेष अभियान भी चलाए गए। इनमें साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाया गया ‘ऑपरेशन गरुड़’, 2,800 से ज्यादा बच्चों को बचाने वाला ‘ऑपरेशन बचपन’, लड़कियों को परेशान करने वाले 74,000 से ज्यादा युवकों के खिलाफ ‘ऑपरेशन मजनू’, नशे से निजात दिलाने के लिए ‘ऑपरेशन नशा मुक्ति’, होटलों और पबों की निगरानी के लिए ‘ऑपरेशन रक्षा’ और 7,000 से ज्यादा अपराधियों को गिरफ्तार करने वाला ‘ऑपरेशन ईगल’ शामिल है।
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, यौन अपराध के मामलों को सुलझाने में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। यहाँ 98.80% मामले का निपटारा किया गया है। महिला हेल्पलाइन 1090 और पिंक स्कूटी गश्त, पिंक एसयूवी, सीसीटीवी निगरानी और आशा ज्योति केंद्र जैसी अन्य पहलों ने भी इस सफलता में बड़ी भूमिका निभाई है।


