अयोध्या: बाबर का वंशज रखना चाहता है राम मंदिर की पहली ईंट, कहा- शांति दूत बनाकर भेजो कश्मीर

खुद को बहादुर शाह जफर का वंशज बताने वाले तुसी ने कहा- मैं इस विवाद में नहीं पड़ना चाहता कि अयोध्या में मस्जिद से पहले क्या था। लेकिन, यदि हिन्दू उस स्थान को भगवान राम का जन्मस्थान मानते हैं तो मैं एक मुसलमान होने के नाते उनकी भावना का सम्मान करूंगा।

अयोध्या मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई के बीच बाबर के वंशज ने एक बड़ा दावा किया है। खुद को मुगल साम्राज्य के अंतिम शासक बहादुर शाह जफर का वंशज बताने वाले याकूब हबीबुद्दीन तुसी ने अयोध्या में राम मंदिर की पहली ईंट रखने की ख्वाहिश जताई है। साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से खुद को शांति दूत बनाकर जम्मू-कश्मीर भेजने की अपील की है।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में तुसी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की इच्छा जताते हुए कहा कि हमारा परिवार उसकी पहली ईंट रखेगा और हम मंदिर की नींव के लिए सोने की शिला दान करेंगे। तुसी ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर खुद को अयोध्या मामले में पक्षकार बनाने की भी अपील की थी।

तुसी के मुताबिक जिस जमीन को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है उसके मालिकाना हक का कागज किसी के पास नहीं हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि मुगल वंशज होने की हैसियत से उन्हें अदालत में अपनी बात रखने का मौका मिले।

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित तुसी का बयान
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उन्होंने कहा कि बाबर ने अपने सैनिकों को नमाज पढ़ने की जगह देने के लिए बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था। यह स्थान सिर्फ सैनिकों के लिए था और किसी के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि मैं इस विवाद में नहीं पड़ना चाहता कि वहॉं मस्जिद से पहले क्या था। लेकिन, यदि हिन्दू उस स्थान को भगवान राम का जन्मस्थान मानते हैं तो मैं एक मुसलमान होने के नाते उनकी भावना का सम्मान करूंगा।

तुसी ने कहा कि इस जमीन के मालिकाना हक से जुड़ा कोई दस्तावेज उनके पास नहीं है। लेकिन, मुगल वंश के उत्तराधिकारी की हैसियत से वे इस जमीन के अधिकारी माने जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि यह जमीन उन्हें मिलती है तो वह इसे मंदिर निर्माण के लिए दान कर देंगे।

वहीं, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लिखे एक पत्र में तुसी ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधानों को हटाने के फैसले की सराहना की है। पत्र में उन्होंने कहा है, “मेरी लोकप्रियता, मेरी विरासत और जम्मू-कश्मीर में मेरी पहचान को देखते हुए मैं कश्मीर में प्रत्यक्ष रूप से शांति संदेश फैलाने के लिए जनता और सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाना चाहता हूँ।”

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