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राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय ने J&K प्रशासन से कश्मीरी पंडितों का डेटा माँगा

बता दें कि मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को पहले से अधिक शक्ति प्रदान की है इसलिए NSCS द्वारा विस्थापित कश्मीरी पंडितों का डेटा माँगा जाना घाटी में उनके पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के अधीन काम करने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) ने जम्मू कश्मीर प्रशासन से कश्मीर घाटी से विस्थापित हुए पंडितों, सिखों और अन्य लोगों की अचल संपत्ति का ब्यौरा माँगा है।

जम्मू कश्मीर राज्य के राजस्व विभाग को लिखे पत्र में NSCS ने कश्मीर घाटी से आतंक के कारण विस्थापित होकर जम्मू कश्मीर के अन्य भागों में बसे लोगों की अचल संपत्ति का क्षेत्रवार डेटा माँगा है। हालाँकि NSCS ने 14 जनवरी को लिखे पत्र में यह स्पष्ट नहीं किया यह डाटा किसलिए माँगा गया है।

NSCS ने तनाव में आकर बेची गई संपत्ति का ब्यौरा भी माँगा है। बता दें कि सन 1997 में जम्मू कश्मीर सरकार ने J&K Migrant Immovable Property (Preservation, Protection and Restraint on Distress Sales) Act पास किया था। यह कानून तनाव अथवा भय के कारण बेची जाने वाली संपत्ति को रोकने के लिए लाया गया था। इस कानून के मुताबिक नवंबर 1989 के बाद जो भी कश्मीर घाटी से विस्थापित हुआ और उसने रिलीफ़ कमिश्नर के पास अपना नाम दर्ज कराया है वह ‘माइग्रेंट’ कहलाएगा।

जम्मू कश्मीर के रेवेन्यू कमिश्नर ने डिविज़नल कमिश्नर और अपने कनिष्ठ अधिकारियों से डेटा माँगा है। उनके अनुसार तीन दिनों के भीतर विस्थापितों की संपत्तियों का डेटा उपलब्ध होगा।

बता दें कि मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को पहले से अधिक शक्ति प्रदान की है इसलिए NSCS द्वारा विस्थापित कश्मीरी पंडितों का डेटा माँगा जाना घाटी में उनके पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।     

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