एनआईए ने 26/11 मुंबई हमले को लेकर बुधवार (23 जुलाई 2025) को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पूरक चार्जशीट दायर की है। इसमें तहव्वुर राणा को हमले का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। 2008 में मुंबई में हुए इस हमले में 170 लोगों की मौत हुई थी।
एनआईए के पूरक चार्जशीट में क्या है?
एनआईए के मुताबिक राणा 2005 से आपराधिक साजिश में न सिर्फ शामिल था, बल्कि मुंबई हमले का मुख्य साजिशकर्ता था।
चार्जशीट के अनुसार, तहव्वुर राणा ने लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली को मुंबई में मदद की। इतना ही नहीं तहव्वुर राणा ने भारत के खिलाफ ‘युद्ध छेड़ने’ के लिए पाकिस्तान के आतंकियों के साथ मिल कर आपराधिक साजिश रची। उसका मकसद भारत की एकता और सुरक्षा को कमजोर करना और लोगों में दहशत फैलाना था।
मुंबई में खोला था कॉर्पोरेट ऑफिस
मुंबई हमले की साजिश को अंजाम देने के लिए तहव्वुर राणा ने मुंबई के ताड़देव एसी मार्केट में आप्रवासी कानून केन्द्र कार्यालय खोला। यहाँ कोई काम नहीं होता था बल्कि इससे आतंकी हेडली को मदद दी जाती थी। ये ऑफिस करीब 2 साल तक चला। एजेंसी का कहना है कि इस कार्यालय का इस्तेमाल डेविड कोलमैन हेडली ने हमले का टारगेट फिक्स करने के लिए किया।
इसमें आगे कहा गया है, “कार्यालय दो साल से ज्यादा समय तक अभियुक्त डेविड कोलमैन हेडली (ए-1) को दी गई वित्तीय और रसद सहायता के कारण संचालित रहा। इसका संचालन अभियुक्त तहव्वुर हुसैन राणा (ए-2) ने किया था।”
एजेंसी ने पुलिस हिरासत के दौरान अभियुक्तों ने जो खुलासे किए हैं, उसकी पुष्टि के लिए अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क किया है और पारस्परिक कानूनी सहायता अनुरोध (एमएलएआर) भी जारी किया है। एनआईए का मानना है कि माँगी गई जानकारी सबूतों और दावों की पुष्टि करेगी।
तहव्वुर राणा को भारत लाने के बाद जाँच में तेजी
लंबी कानूनी कार्यवाही के बाद तहव्वुर राणा को 2025 की शुरुआत में अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया गया। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद उसका स्थानांतरण संभव हुआ। कोर्ट ने स्थानांतरण रोकने की अपील को खारिज कर दिया और मुकदमे का सामना करने के लिए भारत भेजा।
राणा को विशेष एनआईए अदालत ने 10 अप्रैल, 2025 को हिरासत में लिया था। अधिकारी उसकी गिरफ्तारी को मुंबई आतंकी हमले को लेकर की गई साजिशों की जाँच में काफी अहम मानते हैं।
राणा पर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने, हत्या और आतंकवाद, जालसाजी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। ये आरोप भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं 120बी (आपराधिक साजिश), 121 (युद्ध छेड़ना), 302 (हत्या), 468 और 471 (जालसाजी) के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 16 और 18 के तहत दर्ज किए गए हैं।


