Sunday, August 1, 2021
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‘नारायणन को फँसाने से क्रायोजेनिक तकनीक में हुई देरी’: साजिशकर्ता केरल के अधिकारियों की बेल का CBI ने किया विरोध

CBI ने केरल हाईकोर्ट में जानकारी दी कि यह एक राष्ट्रीय महत्व का विषय है और नम्बी नारायणन के खिलाफ जो साजिश रची गई, उसमें इन दोनों आरोपितों का बड़ा हाथ रहा। इन दोनों आरोपितों समेत अन्य अज्ञात आरोपितों द्वारा किया गया अपराध गंभीर प्रकृति का है।

केन्द्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने बुधवार (07 जुलाई 2021) को केरल हाईकोर्ट में पूर्व ISRO वैज्ञानिक नम्बी नारायणन की जासूसी और उन्हें साजिशन गिरफ्तार करने के आरोपित केरल पुलिस के दो अधिकारियों की जमानत याचिका का विरोध किया है। साथ ही CBI ने यह भी कहा है कि नारायणन को ‘मनगढ़ंत मामले’ में फँसाए जाने के कारण भारत में क्रायोजेनिक तकनीकी के विकास में देरी देखने को मिली।

CBI ने केरल हाईकोर्ट में जानकारी दी कि यह एक राष्ट्रीय महत्व का विषय है और नम्बी नारायणन के खिलाफ जो साजिश रची गई, उसमें इन दोनों आरोपितों का बड़ा हाथ रहा। इन दोनों आरोपितों समेत अन्य अज्ञात आरोपितों द्वारा किया गया अपराध गंभीर प्रकृति का है। CBI ने यह भी कहा कि तत्कालीन वैज्ञानिक नम्बी नारायणन के खिलाफ लगाए गए देशद्रोह के आरोपों, उनके उत्पीड़न और उनके खिलाफ की गई जासूसी साजिश के चलते ही देश में क्रायोजेनिक तकनीकी के विकास में देरी हुई।

आपको बता दें कि केरल पुलिस के रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों एस. विजयन और थम्पी एस. दुर्गा दत्त द्वारा केरल हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। दोनों ही उस विशेष जाँच टीम (SIT) के सदस्य थे, जिसने ISRO वैज्ञानिक नम्बी नारायणन को गिरफ्तार किया था।

इसके अलावा, वैज्ञानिक के खिलाफ साजिश के मामले में आरोपित केरल के पूर्व डीजीपी सिबी मैथ्यूज ने यह खुलासा किया कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के दबाव के कारण ही उन्होंने और केरल पुलिस के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने 1994 के जासूसी मामले में नारायणन की गिरफ़्तारी की थी। मैथ्यूज ने अपनी जमानत याचिका में कहा कि रिसर्च एण्ड एनालिसिस विंग (RAW) और IB ऐसे राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में अधिक सक्रिय होते हैं और पुलिस को इन मामलों में इन्हीं सुरक्षा एजेंसियों द्वारा दी गई सूचनाओं पर निर्भर रहना पड़ता है और कार्रवाई करनी पड़ती है।

हालाँकि खुद नारायणन ने मैथ्यूज की जमानत याचिका का विरोध किया और जिला सेशन कोर्ट में याचिका दाखिल की। नारायणन ने मैथ्यूज की जमानत याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि उनके खिलाफ की गई साजिश के कारण उनका पूरा कैरियर बर्बाद हो गया था। मैथ्यूज उन आरोपितों में से एक हैं, जिन्हें CBI ने नारायणन के खिलाफ साजिश रचने का दोषी पाया है।

ज्ञात हो कि 15 अप्रैल 2021 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केरल के वैज्ञानिक नम्बी नारायणन पर 1994 में लगे देशद्रोह के आरोप और उसके बाद हुई उनकी प्रताड़ना के मामले में CBI ने जाँच शुरू की थी और जाँच के लिए एक 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। CBI ने इस मामले में 18 लोगों को आरोपित बनाया था। इनमें केरल पुलिस के रिटायर्ड पुलिस अधिकारी एस. विजयन, थम्पी एस. दुर्गा दत्त और केरल के पूर्व डीजीपी सिबी मैथ्यूज भी शामिल हैं। इन सब के खिलाफ आपराधिक षड्यन्त्र रचने, अपहरण और साक्ष्यों को मिटाने जैसे अपराधों में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

ISRO वैज्ञानिक नम्बी नारायणन की गिरफ़्तारी:

1994 में ISRO वैज्ञानिक नम्बी नारायणन को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने ISRO में कुछ संपर्कों के जरिए पाकिस्तान को भारतीय रॉकेट तकनीक की बारीकियाँ सप्लाई की हैं। नारायणन के अलावा मालदीव्स की दो महिलाओं मरियम रशीदा और फौजिया हुसैन को भी गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में मालदीव की दोनों महिलाओं और भारत के 2 वैज्ञानिकों पर गुप्त दस्तावेजों को विदेश भेजे जाने का आरोप लगा था।

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें जिस ‘कुटिल घृणा’ का सामना करना पड़ा, उसके लिए केरल के बड़े पुलिस अधिकारी जिम्मेदार थे और इस मामले में CBI को जाँच का आदेश दिया गया था। हालाँकि कई साल पहले 1996-97 में ही CBI ने पाया था कि इस मामले की जाँच करने वाले केरल पुलिस के अधिकारियों ने ही सारी गड़बड़ी की है। CBI ने उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी केरल सरकार को लिखा था। CPI (M) के ईके नायनार तब केरल के मुख्यमंत्री थे। वामपंथी सरकार ने उन अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के इंतजार का बहाना बनाया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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