Homeरिपोर्टराष्ट्रीय सुरक्षा'तुझसे नाराज़ नहीं ज़िंदगी, हैरान हूँ मैं': ITBP जवानों के फुरसत के क्षण का...

‘तुझसे नाराज़ नहीं ज़िंदगी, हैरान हूँ मैं’: ITBP जवानों के फुरसत के क्षण का वीडियो देखा क्या? लद्दाख से अरुणाचल तक देते हैं पहरा

वीडियो में माइक थामे गाना गाते हुए जो आपको दिख रहे हैं, वो ITBP के कॉन्स्टेबल लवली सिंह हैं। बता दें कि 'तुझसे नाराज नहीं ज़िंदगी, हैरान हूँ मैं' गाना 'मासूम' फिल्म का है।

सोशल मीडिया पर ‘इंडियन तिब्बत सीमा बल (ITBP)’ ने अपने जवानों का ‘तुझसे नाराज़ नहीं ज़िंदगी’ गाना गाते हुए एक वीडियो डाला है, जो काफी प्यारा है। ITBP ने लिखा कि फुर्सत के पलों में जवान गाना गा रहे हैं। इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि जहाँ एक ITBP अधिकारी गाना गा रहे हैं, वहीं बाकी वाद्य यंत्रों को बजा रहे हैं। गाने का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रहा है और लोग इसकी तारीफ कर रहे हैं।

ऊपर वीडियो में माइक थामे गाना गाते हुए जो आपको दिख रहे हैं, वो ITBP के कॉन्स्टेबल लवली सिंह हैं। बता दें कि ‘तुझसे नाराज नहीं ज़िंदगी, हैरान हूँ मैं’ गाना ‘मासूम’ फिल्म का है, जो 1983 में आई थी। एक बच्चे के इर्दगिर्द घूमती इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह और शबाना आजमी मुख्य भूमिकाओं में थे। इस गाने के बोल गुलजार ने लिखे थे, जिन्हें इसके लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड से भी नवाजा गया था।

इस गाने के मेल वर्जन को अनूप घोषल और फेमल वर्जन को लता मंगेशकर ने गाया था। बता दें कि उत्तराखंड में ‘ ITBP (भारतीय-तिब्बत सीमा बल)’ के जवानों ने 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारत-चीन बॉर्डर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। वहीं लद्दाख में भी आईटीबीपी के जवानों ने 75वें स्वतंत्रता दिवस पर पैंगोंग त्सो के तट पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। ऐसा हर साल होता है। देश के इन ऊँचे इलाकों में ITBP गजब की चुस्ती से सुरक्षा का दायित्व संभालती है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

क्या भारत की राजनीति पहली बार पूरी तरह ‘हिन्दू-केंद्रित’ हो गई है?

क्या भारत की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव चुनावी नतीजों में नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस के केंद्र में हुआ है? PM मोदी मजबूत हों या कमजोर, सत्ता में BJP रहे या विपक्ष आए, क्या हिन्दू पहचान और हिन्दू समाज से जुड़े सवाल अब भारतीय राजनीति के केंद्रीय विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं?

कुएँ में कूदने की जगह नहीं बची तो रोने लगीं हिंदू महिलाएँ: जानिए- 1947 में रावलपिंडी के तोहा खालसा में 90 हिंदू-सिख महिलाओं ने...

जानिए 1947 के रावलपिंडी दंगों में तोहा खालसा की 93 हिंदू महिलाओं के कुएँ में एक साथ कूदकर जान देने की दर्दनाक कहानी।
- विज्ञापन -