Saturday, July 4, 2020
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जानिए कौन सी संस्था है ISI से भी ज्यादा खतरनाक और कैसे पाकिस्तान लड़ रहा है इन्फॉर्मेशन युद्ध

भारत में ISI के बारे में सब जानते हैं लेकिन ISPR के विषय में बहुत कम लोग जाते हैं और कश्मीर में हो रहे हमले के पीछे ISPR का बहुत बड़ा हाथ है। हाल ही में हुए पुलवामा हमले के बाद सेना की कार्रवाई को लेकर आई तमाम फर्जी मीडिया रिपोर्ट में ISPR का बहुत बड़ा हाथ है।

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Sumit Kumarhttp://Hindustantalks.org
sumit kumar  is an mechanical engineer. But he is passionate about social activism . From last 6 year, he is working on rural development, community devlopment, RTI, dalit upliftment and pakistan- bangladesh minorities human rights. He is also a trainer of government schemes and policy.

दुनिया के देशों ने अपने देश की सुरक्षा के लिए फौज रखी हुई है, लेकिन पाकिस्तान की फौज ने अपने लिए एक देश रखा हुआ है जिसके संसाधनों का उपयोग वह अपने हिसाब से करती है। पाकिस्तानी फ़ौज के मातहत जहाँ ISI का काम ख़ुफ़िया जानकारी जुटाना है वहीं ISPR का काम है अंतरराष्ट्रीय मीडिया में पाकिस्तान की अच्छी इमेज बनाना। यह संस्था नए जमाने का इन्फॉर्मेशन युद्ध लड़ने का काम करती है। प्रस्तुत लेख में यह बताया गया है कि ISPR भारत के लिए क्यों ख़तरनाक है।

14 फ़रवरी को पुलवामा, कश्मीर में CRPF के काफ़िले पर हुए आतंकी हमले ने देश की जनता व् सरकार दोनों को हिला कर रख दिया। हमले के तुरंत बाद देश में जनाक्रोश उमड़ पड़ा। लोगों ने भारी संख्या में वीरगति को प्राप्त जवानों की अंतिम यात्रा में शामिल होने की फोटो और विडियो सोशल मीडिया पर भरी संख्या में पोस्ट कर पाकिस्तान पर जवाबी कार्रवाई करने की मांग की। मोदी सरकार ने भी 14 फ़रवरी को ही उच्च स्तरीय सुरक्षा मीटिंग में सेना को रणनीति बनाने की अनुमति दे दी।

पुलवामा हमले के 12 दिन बाद 26 फ़रवरी को सवेरे 3:30 बजे भारत के 12 मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने LoC पार कर पाकिस्तान की जमीन पर पल रहे जैश ए मोहम्मद के 3 आतंकी ठिकानों पर हमला कर पुलवामा हमले का जवाब पाकिस्तानी सेना और आतंकवादी संगठनों को दे दिया। बाद में ANI न्यूज़ एजेंसी के हवाले से खबर आई कि विंग कमांडर अभिनन्दन ने अपने मिग-21 लड़ाकू विमान से पाकिस्तानी लड़ाकू विमान एफ-16 को मार गिराया। लेकिन अचानक मिग-21 में तकनीकी खराबी आ जाने के कारण वह अपने विमान सहित पाकिस्तानी सीमा में जा गिरे और उनको पाकिस्तानी आर्मी ने अपनी हिरासत में ले लिया।

27 फ़रवरी को पाकिस्तानी अधिकारी मेजर जनरल आसिफ ग़फूर ‏ने विंग कमांडर अभिनन्दन के पाकिस्तान में होने की खबर अपने आधिकारिक ट्विटर और फेसबुक अकाउंट पर उनका विडियो और फ़ोटो पोस्ट कर दी। साथ ही अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा कि पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए भारतीय वायुसेना के 2 लड़ाकू विमानों को मार गिराया और एक भारतीय पायलट को पाकिस्तानी सेना ने पकड़ लिया है। लेकिन पाकिस्तानी लड़ाकू विमान एफ-16 और जैश ए मोहम्मद के आतंकवादी ठिकाने पर हुई भारतीय कार्रवाई को ख़ारिज कर दिया और कुछ पेड़ों के गिरने कि खबर दी।

इस सबके बाद पाकिस्तान के मीडिया ने जश्न मानते हुए 2 भारतीय विमान मार गिरने की फर्जी खबर को अपनी वेबसाइट और चैनल पर दिखाना शुरू कर दिया। पाकिस्तानी सेना के आधिकारिक बयान के हवाले से ही इस्लामिक न्यूज़ चैनल अल-जज़ीरा से लेकर ब्रिटिश अख़बार मेल टुडे तक ने अपनी वेबसाइट पर पाकिस्तान द्वारा भारतीय लड़ाकू विमाग मिग-21 मार गिराने की फर्जी खबर पोस्ट कर दी। सबसे आश्चर्य की बात ये है कि दुनिया के तमाम देशों की मीडिया ने बिना जाँच पड़ताल किए, बिना भारतीय पक्ष जाने इस तरह की फर्जी खबर अपने न्यूज़ चैनल पर चला दी और अपनी वेबसाइट पर भी पोस्ट की। सोशल मीडिया पर चारों तरफ पाकिस्तानी सेना की बहादुरी की पोस्ट की जा रही थी और अभी भी की जा रही है।

आखिर क्यों इस तरह कि खबर डाली गयी और कौन था इस खबर के पीछे ? शायद किसी ने इस विषय में नहीं सोचा। शायद आप यह भी नहीं जानते हैं कि मेजर जनरल आसिफ ग़फूर ‏कौन है और किस पाकिस्तानी संस्था के लिए काम करता है। विंग कमांडर अभिनंदन की वापसी की जानकारी भारतीय सेना, नेवी और वायुसेना के अधिकरियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी लेकिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के पाकिस्तानी संसद में दिए गए बयान का उल्लेख करते हुए पाकिस्तानी मीडिया ने बहुत ही नाटकीय अंदाज में अपने न्यूज़ चैनल और अख़बार में खबर छापी कि प्रधानमंत्री इमरान खान ने “Good Gesture” के लिए विंग कमांडर अभिनन्दन को भारत वापस भेजने की अनुमति दे दी है।

इस खबर के आने के 10 मिनट के अन्दर ही विदेशी न्यूज़ एजेंसी की न्यूज़ वेबसाइट्स पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को शांतिदूत बना कर और अंतरराष्ट्रीय कानून को नज़रअंदाज़ करते हुए बड़े-बड़े आर्टिकल लिखे गए जिसमें जापान टाइम्स, अलजज़ीरा, वॉशिंगटन पोस्ट से लेकर तमाम भारतीय अख़बार शामिल थे।

अब सवाल आता है कि पाकिस्तान इतने अच्छे से मीडिया कैसे मैनेज कर रहा है? क्या पाकिस्तान बहुत पहले से अपनी सेना की कायरता छुपाने के लिए काम कर रहा है? कौन उसके लिए योजना बना रहा है? आखिर इतने आतंकी हमले के बाद में पाकिस्तान में आन्दोलन क्यों नहीं होते?

दरअसल पाकिस्तान ने 1949 में एक संस्था बनाई थी जिसका नाम है Inter Services Public Relations (ISPR); इस संस्था के डायरेक्टर जनरल पाकिस्तानी सेना, वायुसेना, नेवी और मरीन के प्रवक्ता होते हैं। इन डायरेक्टर जनरल का काम आर्म्स फोर्सेज, पब्लिक और सिविल अधिकारियों के बीच तालमेल बनाए रखना होता है। इस संस्था के पहले डायरेक्टर जनरल पाकिस्तानी आर्मी के कर्नल शाहबाज़ खान थे।

इसके हेडक्वॉर्टर में पब्लिक, मीडिया और पाकिस्तानी आर्म्ड फोर्सेज के बीच रिश्ते मजूबत को लेकर रणनीति बनती है और इसके लिए वहाँ लगभग हर रोज पब्लिक वर्कशॉप, सेमिनार, कॉन्फ्रेंस व् प्रशिक्षण चलाया जाता है जिनमें सेना, मीडिया व् पब्लिक से सम्बंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होती रहती है। इन सभी कार्यक्रमों में देशी और विदेशी दोनों स्तर पर पाकिस्तानी फौज के लिए समर्थन जुटाने, फर्जी न्यूज़ फ़ैलाने से लेकर जियो पॉलिटिक्स तक शामिल है।

ISPR देशी-विदेशी संस्थाओं में मीडिया पॉलिसी बनाने से लेकर पत्रकारिता, फिल्म निर्माण, रेडियो ब्रॉडकास्ट, पब्लिक कैंपेन और कई तरह के सामाजिक कार्यक्रम करने के लिए पैसे देता है। पाकिस्तान के कई फिल्म अभिनेता, रेडियो जॉकी, पत्रकार ISPR के लिए काम करते हैं। अभिव्यक्ति और पत्रकारिता की आज़ादी के लिए पाकिस्तान की ह्यूमन राईट कार्यकर्ता और वकील असमा जहाँगीर ने ISPR पर सवाल उठाया थाऔर ISPR के खिलाफ कोर्ट में एक पेटिशन भी डाली थी।

हाल ही में भारत के लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (रिटायर्ड) ने इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ स्ट्रेटेजिक स्टडीज (लंदन) के एक सेमिनर में बोलते हुए आईएसआई से ज्यादा ख़तरनाक ISPR को बताया और कहा कि ISPR इनफार्मेशन वॉरफेयर में बहुत ही अच्छा काम कर रहा है। उन्होंने अपने व्याख्यान में ISPR को पूरे नंबर देते हुए कहा कि भारतीय सेना इनफार्मेशन वॉर में ISPR के मुकाबले पिछड़ चुकी है और जिस तरह से ISPR इनफार्मेशन रणनीति बना कर पाकिस्तान के लिए काम कर रही है वह तारीफ के काबिल है।

भारत में ISI के बारे में सब जानते हैं लेकिन ISPR के विषय में बहुत कम लोग जाते हैं और कश्मीर में हो रहे हमले के पीछे ISPR का बहुत बड़ा हाथ है। हाल ही में हुए पुलवामा हमले के बाद सेना की कार्रवाई को लेकर आई तमाम फर्जी मीडिया रिपोर्ट में ISPR का बहुत बड़ा हाथ है। इसी संस्था की इनफार्मेशन वॉर रणनीति के कारण भारत में कई बार दंगे और सांप्रदायिक घटनाओं को अंजाम दिया जा चुका है।

जिस तरह भारत के कुछ अभिनेता और कला क्षेत्र से जुड़े लोग, NGO कार्यकर्ता तथा पत्रकार पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित मुशायरों और अन्य कार्यक्रमों में जाकर भारत विरोधी बयानबाजी करते हैं ऐसे में आप को आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि ISPR ही उन सबके पीछे काम कर रही है और इसके लिए उनको पैसे भी दे रही है।

भारत भी अब चुप नहीं बैठा है और पाकिस्तान की इनफार्मेशन वॉर रणनीति व् सोशल मीडिया पर सेना को लेकर फैलाई जा रही फर्जी न्यूज़ को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने भारतीय सेना को इनफार्मेशन वारफेयर ब्रांच खोलने की अनुमति दे दी है

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