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ईद की नमाज पढ़कर शुरू किया सेना पर पथराव, क्या ये होता है जश्न मनाने का तरीका?

उपद्रवियों की भीड़ संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित खतरनाक आतंकी जाकिर मूसा के समर्थन में सड़कों पर उतरी हुई है। भीड़ के हाथ में मूसा के पोस्टर है, जिन पर मूसा आर्मी लिखा हुआ है। साथ में इन पोस्टरों पर मसूद अजहर की तस्वीर भी बनी हुई है।

‘ईद मुबारक’ के मौक़े पर भी जम्मू-कश्मीर में शांति नहीं है। बुधवार को सुबह 8 बजे ईद की नमाज पढ़ने वाले लोगों ने 11 बजे उपद्रवी बनकर सेना पर पत्थरबाजी की। साथ ही पाकिस्तान का झंडा भी फहराया।

खबरों के मुताबिक उपद्रवियों की भीड़ खतरनाक आतंकी जाकिर मूसा के समर्थन में सड़कों पर उतरी हुई है। भीड़ के हाथ में मूसा के पोस्टर है, जिन पर मूसा आर्मी लिखा हुआ है। साथ में इन पोस्टरों पर मसूद अजहर की तस्वीर भी बनी हुई है।

बता दें जिस जाकिर मूसा के समर्थन में भीड़ सेना पर पथराव कर रही है, वो पिछले महीने आतंकियों और सुरक्षाबल के बीच हुई एक मुठभेड़ में मारा गया है। जाकिर ए डबल प्लस (A++) कैटेगरी का आतंकी था, जिसके ऊपर 20 लाख रुपए का इनाम रखा गया था। 

सेना पर पत्थरबाजी की खबर सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर आते ही लोगों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। लोगों का कहना है कि इस तरह की हरकत के बावजूद भी लोग इन पत्थरबाजों को ‘भटके हुए लोग’ और ‘आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता’ जैसी बातें करेंगे। कुछ लोग सरकार से जल्द से जल्द 370 और 35 ए को खत्म करने की बात कह रहे हैं, तो कुछ गृह मंत्री अमित शाह से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि इन पत्थरबाजों को जल्द से जल्द सबक सिखाया जाएगा।

ट्विटर पर ही एक शख्स ने इस घटना के बारे में पढ़कर लिखा है कि उसका मन करता है कि वो ईद मनाए लेकिन ये सब देखकर वो ईद कैसे मनाए? बबलू पाठक नामक ट्विटर यूजर का कहना है कि भाईचारे की बात सब करते हैं, लेकिन ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती है। हम साथ की बात करते है वो अलगवाद की बात करता है फिर बोलते है हमें कि हम मुस्लिम विरोधी हैं।

ट्विटर पर लोगों ने महबूबा और उमर फारूक़ पर भी सवाल उठाए हैं, जिन्हें ये पत्थरबाज मासूम लगते हैं। यूजर्स ने पूछा है, “क्या ये है शान्ति का त्यौहार? अगर शान्ति इसे कहते हैं तो आतंकवाद किसे कहते हैं। ऐसा क्या सिखाते हैं जो मस्जिदों से बाहर निकलते ही आतंक फैलाना शुरू करा देते हैं।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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