Homeरिपोर्टराष्ट्रीय सुरक्षाघाटी में बड़े हमले की फिराक में आतंकी, इसलिए भेजे 10,000 अतिरिक्त जवान

घाटी में बड़े हमले की फिराक में आतंकी, इसलिए भेजे 10,000 अतिरिक्त जवान

सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को जवानों पर बड़े हमले की साजिश रचे जाने का इनपुट मिला है। एहतियातन सरकार ने अतिरिक्त जवानों को तैनात करने का फैसला किया है और खुद डोवाल हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

पाकिस्तानी जमीन पर फल-फूल रहे आतंकी संगठन कश्मीर में बड़े आतंकी हमलों को अंजाम देने की फिराक में हैं। यही कारण है कि केन्द्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों को तैनात करने का फैसला किया है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।

सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को जवानों पर बड़े हमले की साजिश रचे जाने का इनपुट मिला है। इसे देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोवाल ने पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर में आतंकरोधी ग्रिड के अधिकारियों के साथ बैठक कर घाटी में सुरक्षा-व्यवस्था का जायजा लिया। इसी इनपुट के आधार पर सरकार ने एहतियातन अतिरिक्त जवानों को तैनात करने का फैसला किया है और खुद डोवाल हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

जम्मू-कश्मीर के दो दिन के दौरे से डोवाल के लौटने के बाद केन्द्र सरकार ने घाटी में अर्ध सैनिक बलों की 100 और कंपनियॉं तैनात करने का फैसला किया था। गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि अतिरिक्त जवानों की तैनाती आतंकरोधी अभियानों को मजबूती देने और राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति सुदृढ़ करने के लिए की गई है। सीआरपीएफ़ की 50, सीमा सुरक्षा बल की 30 और बीएसएफ तथा आईटीबीपी की 10-10 कंपनियॉं तैनात होंगी।

जम्मू-कश्मीर में अभी राज्यपाल शासन है। इससे पहले केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियों को 24 फरवरी को कश्मीर भेजा गया था। उस समय लोकसभा चुनाव के दौरान सुरक्षा-व्यवस्था का हवाला देते हुए तैनाती की गई थी। अमरनाथ यात्रा के लिए भी राज्य में करीब 40 हजार अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं।

अतिरिक्त जवानों की तैनाती के फैसले ने कश्मीरी नेताओं और अलगाववादियों को बेचैन कर रखा है। इनका आरोप है कि जवानों की भारी तैनाती से केन्द्र घाटी में डर का माहौल पैदा कर रहा है। जवानों की अतिरिक्त तैनाती के साथ अनुच्छेद 35ए को खत्म किए जाने की अटकलों ने भी जोर पकड़ लिया है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

Antifa के आतंक पर BBC का पर्दा: हमलावरों को बताया ‘प्रदर्शनकारी’, अमेरिकी कोर्ट ने ICE सेंटर पर हमले और पुलिसकर्मी को गोली मारने को...

अमेरिका के टेक्सास ICE सेंटर हमले और पुलिस अधिकारी पर गोलीबारी में दोषी 8 Antifa सदस्यों को BBC ने अपनी रिपोर्ट में बताया प्रदर्शनकारी।

बऊबाजार ब्लास्ट के ‘मास्टरमाइंड’ की रिहाई पर SC की रोक, कोलकाता में ‘हिंदुओं को मारना’ चाहता था राशिद खान: पढ़ें- कैसे ममता सरकार ने...

बऊबाजार विस्फोट के दोषी राशिद खान की रिहाई फिलहाल रुकी, सुप्रीम कोर्ट अब दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश की समीक्षा करेगा।
- विज्ञापन -