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2.86% सस्ती हुई राफ़ेल डील: सिर्फ 6 स्क्रीनशॉट्स में समझें CAG रिपोर्ट का पूरा गणित

राफेल डील पर कॉन्ग्रेस के आरोपों के बीच मोदी सरकार ने मंगलवार को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट संसद में पेश की। इस दौरान विपक्ष ने जेपीसी से जांच के लिए हंगामा किया।

राफेल डील पर कॉन्ग्रेस के आरोपों के बीच मोदी सरकार ने मंगलवार को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट संसद में पेश की। इस दौरान विपक्ष ने जेपीसी से जांच के लिए हंगामा किया। रिपोर्ट के मुताबिक यूपीए के मुकाबले NDA के शासनकाल में 2.86% सस्ती डील फाइनल की गई है।


CAG रिपोर्ट की कॉपी का स्क्रीनशॉट- 1
CAG रिपोर्ट की कॉपी का स्क्रीनशॉट- 2
CAG रिपोर्ट की कॉपी का स्क्रीनशॉट- 3

कैग की रिपोर्ट में 2007 और 2015 की बोलियों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में लिखा है:

“आईएनटी द्वारा गणना किए गए संरेखित मूल्य ‘यू 1’ मिलियन यूरो था जबकि लेखापरीक्षा द्वारा आंकलित की गई संरेखित कीमत ‘सीवी’ मिलियन यूरो थी जो आईएनटी संरेखित लागत से लगभग 1.23 प्रतिशत कम थी। यह वह मूल्य था जिस पर 2015 में अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाने चाहिए थे यदि 2007 और 2015 की कीमतों को बराबर माना जाता। लेकिन इसके जगह 2016 में ‘यू’ मिलियन यूरो के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे, जो लेखापरीक्षा के संरेखित कीमत से 2.86 प्रतिशत कम थी।”

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कैग रिपोर्ट को बकवास बताया और इसे चौकीदार ऑडिट जनरल रिपोर्ट नाम दिया। भारत ने पहले प्रस्तावित 126 विमान सौदे की तुलना में 36 राफेल विमान अनुबंध में ‘इंडिया स्पेसिफिक एनहांसमेंट (India Specific Enhancement)’ के मामले में 17.08% बचाने में कामयाबी हासिल की।

CAG रिपोर्ट की कॉपी का स्क्रीनशॉट- 4
CAG रिपोर्ट की कॉपी का स्क्रीनशॉट- 5
CAG रिपोर्ट की कॉपी का स्क्रीनशॉट- 6
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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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