Wednesday, April 21, 2021
Home देश-समाज नेस्ले इंडिया ने सरकार के मैगी में लेड की अत्यधिक मात्रा के दावे को...

नेस्ले इंडिया ने सरकार के मैगी में लेड की अत्यधिक मात्रा के दावे को स्वीकारा

नेस्ले इंडिया ने वृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस बात को स्वीकार कर लिया है कि उनके मशहूर उत्पाद मैगी में लेड यानि सीसे की मात्रा मानकों से ऊपर पायी गयी है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तीन साल बाद राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) में लंबित नेस्ले इंडिया के उत्पाद मैगी के मामले में कार्रवाई की अनुमति दे दी है।

ज्ञात हो कि मैगी में तय मानक से अधिक लेड (सीसा) मिलने पर सरकार ने एनसीडीआरसी में केस दर्ज़ किया था। जिसके बाद नेस्ले इंडिया ने हाईकोर्ट के आदेश की बात रखकर सरकारी दावों का विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने ही साल 2015 में एनसीडीआरसी की सुनवाई पर रोक लगा दी थी।

हाल ही में इस मामले पर न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूढ़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने अपनी सुनवाई के दौरान कहा, केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकीय अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) मैसूरू की रिपोर्ट को इस कार्यवाही के लिए आधार बनाया जाएगा।

सीएफटीआरआई मैसूरू द्वारा की गयी मैगी की जाँच में लेड की मात्रा अधिक पाई गई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने नेस्ले इंडिया के खिलाफ राष्ट्रीय उपभोक्ता वाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) में सरकार के मामले में आगे कार्यवाही की अनुमति प्रदान कर दी है। सरकार का दावा है कि नेस्ले इंडिया ने अपने उत्पाद के लिए झूठे व्यापार के तरीकों, झूठी लेबलिंग और भ्रामक विज्ञापनों का सहारा लिया है तथा इसके बदले 640 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति की माँग की है।

क्या है यह विवाद

शीर्ष अदालत ने इससे पूर्व 2015 में एनसीडीआरसी (NCDRC) द्वारा नेस्ले को चुनौती देने से पहले कार्यवाही पर 16 दिसंबर 2015 को रोक लगा दी थी। ‘टेस्टी भी हेल्दी भी’ जैसे विज्ञापनों का दावा करने वाली नेस्ले इंडिया कम्पनी पर उपभोक्ता मामले मंत्रालय द्वारा उपभोक्ताओं को गुमराह करने का आरोप लगाया था, जिसे नेस्ले इंडिया ने  2015 में सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया था।

इसके बाद नेस्ले इंडिया को अपने उत्पाद मैगी में एम.एस.जी. (MSG) ‘मोनोसोडियम ग्लूटामेट’ पाये जाने के कारण अपने इस उत्पाद को बाजार से हटाना पड़ा था। यह MSG मैगी में स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। खाद्य सुरक्षा नियामक (The food safety regulator) ने लेड की अत्यधिक मात्रा पाये जाने पर मैगी को बाज़ारों से प्रतिबंधित कर दिया तथा इसे मानव उपयोग के लिए ‘असुरक्षित और खतरनाक’ घोषित कर दिया था।

किस तरह हानिकारक है मैगी में इस्तेमाल होने वाला लेड (सीसा)

डॉक्टर्स के अनुसार लेड हमारे शरीर के लिए अत्यधिक हानिकारक होता है, जिसके प्रयोग से तंत्रिका तंत्र यानी नर्वस  सिस्टम खराब होने की प्रबल संभावनाएं रहती हैं और किडनी खराब होने का भी भय रहता है। लेड की 2.5 पीपीएम तक की मात्रा को ही खाद्य पदार्थों में मानक माना गया है, जबकि जाँच में मैगी में यह मात्रा इस से अधिक थी।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

देश के 3 सबसे बड़े डॉक्टर की 35 बातें: कोरोना में Remdesivir रामबाण नहीं, अस्पताल एक विकल्प… एकमात्र नहीं

देश में कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है। 2.95 लाख नए मामले सामने आने के बाद देश में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़ कर...

‘गैर मुस्लिम नहीं कर सकते अल्लाह शब्द का इस्तेमाल, किसी अन्य ईश्वर से तुलना गुनाह’: इस्लामी संस्था ने कहा- फतवे के हिसाब से चलें

मलेशिया की एक इस्लामी संस्था ने कहा है कि 'अल्लाह' एक बेहद ही पवित्र शब्द है और इसका इस्तेमाल सिर्फ इस्लाम के लिए और मुस्लिमों द्वारा ही होना चाहिए।

आज वैक्सीन का शोर, फरवरी में था बेकारः कोरोना टीके पर छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेसी सरकार ने ही रचा प्रोपेगेंडा

आज छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री इस बात से नाखुश हैं कि पीएम ने राज्यों को कोरोना वैक्सीन देने की बात नहीं की। लेकिन, फरवरी में वही इसके असर पर सवाल उठा रहे थे।

पंजाब के 1650 गाँव से आएँगे 20000 ‘किसान’, दिल्ली पहुँच करेंगे प्रदर्शनः कोरोना की लहर के बीच एक और तमाशा

संयुक्त किसान मोर्चा ने 'फिर दिल्ली चलो' का नारा दिया है। किसान नेताओं ने कहा कि इस बार अधिकतर प्रदर्शनकारी महिलाएँ होंगी।

हम 1 साल में कितने तैयार हुए? सरकारों की नाकामी के बाद आखिर किस अवतार की बाट जोह रहे हम?

मुफ्त वाई-फाई, मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी से आगे लोगों को सोचने लायक ही नहीं छोड़ती समाजवाद। सरकार के भरोसे हाथ बाँध कर...

मधुबनी: धरोहर नाथ मंदिर में सोए दो साधुओं का गला कुदाल से काटा, ‘लव जिहाद’ का विरोध करने वाले महंत के आश्रम पर हमला

बिहार के मधुबनी जिला स्थित खिरहर गाँव में 2 साधुओं की गला काट हत्या कर दी गई है। इससे पहले पास के ही बिसौली कुटी के महंत के आश्रम पर रात के वक्त हमला हुआ था।

प्रचलित ख़बरें

रेप में नाकाम रहने पर शकील ने बेटी को कर दिया गंजा, जैसे ही बीवी पढ़ने लगती नमाज शुरू कर देता था गंदी हरकतें

मेरठ पुलिस ने शकील को गिरफ्तार किया है। उस पर अपनी ही बेटी ने रेप करने की कोशिश का आरोप लगाया है।

मधुबनी: धरोहर नाथ मंदिर में सोए दो साधुओं का गला कुदाल से काटा, ‘लव जिहाद’ का विरोध करने वाले महंत के आश्रम पर हमला

बिहार के मधुबनी जिला स्थित खिरहर गाँव में 2 साधुओं की गला काट हत्या कर दी गई है। इससे पहले पास के ही बिसौली कुटी के महंत के आश्रम पर रात के वक्त हमला हुआ था।

रेमडेसिविर खेप को लेकर महाराष्ट्र के FDA मंत्री ने किया उद्धव सरकार को शर्मिंदा, कहा- ‘हमने दी थी बीजेपी को परमीशन’

महाविकास अघाड़ी को और शर्मिंदा करते हुए राजेंद्र शिंगणे ने पुष्टि की कि ये इंजेक्शन किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। उन्हें भाजपा नेताओं ने भी इसके बारे में आश्वासन दिया था।

‘सुअर के बच्चे BJP, सुअर के बच्चे CISF’: TMC नेता फिरहाद हाकिम ने समर्थकों को हिंसा के लिए उकसाया, Video वायरल

TMC नेता फिरहाद हाकिम का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। इसमें वह बीजेपी और केंद्रीय सुरक्षा बलों को 'सुअर' बता रहे हैं।

हाँ, हम मंदिर के लिए लड़े… क्योंकि वहाँ लाउडस्पीकर से ऐलान कर भीड़ नहीं बुलाई जाती, पेट्रोल बम नहीं बाँधे जाते

हिंदुओं को तीन बातें याद रखनी चाहिए, और जो भी ये मंदिर-अस्पताल की घटिया बाइनरी दे, उसके मुँह पर मार फेंकनी चाहिए।

रवीश और बरखा की लाश पत्रकारिताः निशाने पर धर्म और श्मशान, ‘सर तन से जुदा’ रैलियाँ और कब्रिस्तान नदारद

अचानक लग रहा है जैसे पत्रकारों को लाश से प्यार हो गया है। बरखा दत्त श्मशान में बैठकर रिपोर्टिंग कर रही हैं। रवीश कुमार लखनऊ को लाशनऊ बता रहे हैं।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,985FansLike
82,653FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe