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स्वरा भास्कर की रसोई में दिखा नेस्ले ब्रांड का प्रोडक्ट, तो इस्लामी कट्टरपंथियों ने लताड़ा: गाली पड़ने के बाद नया Video बनाकर ‘Free Palestine’ के ढोंग में लिबिर-लिबिर करने लगी अभिनेत्री, बोली- अभी सीख रही हूँ

स्वरा भास्कर का 'एक्टिविज्म' केवल अपनी प्रासंगिकता बचाए रखने का एक जरिया है। वे एक ऐसी 'सेलेब्रिटी' हैं जो केवल उसी तरफ झुकती हैं जहाँ से उन्हें समर्थन या चर्चा मिले। कट्टरपंथियों की डाँट पड़ते ही उनके 'लर्निंग प्रोसेस' का शुरू होना यह साबित करता है कि वे किसी विचार के प्रति ईमानदार नहीं हैं, बल्कि केवल एक खास वर्ग को खुश रखने की कोशिश कर रही हैं।

देखिए, दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। एक वे जो किसी ना किसी खास मसले पर अपनी राय देकर सुर्खियों के सैलाब में सराबोर हो जाया करते हैं और दूसरे वे, जो हर मसले पर अपनी टाँग अड़ाकर सुर्खियों के सैलाब में नहीं, बल्कि विवादों की दरिया में गोता लगाने के आदी हो जाते हैं। इसी दूसरे किस्म के लोगों में नाम आता है अभिनेत्री स्वरा भास्कर का।

स्वरा भास्कर अपनी अदाकारी से ज्यादा अपनी ‘सेलेक्टिव एक्टिविज्म’ के लिए जानी जाती हैं। स्वरा का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसमें उनके पाखंड की सारी परतें खुल गई हैं। भारत की तरक्की और हिंदू हितों पर चुप्पी साधने वाली स्वरा, फिलिस्तीन के मुद्दे पर इतनी सक्रिय हैं कि अब वे ब्रांड्स के ‘सर्टिफिकेट’ बाँटने लगी हैं। लेकिन जैसे ही इस्लामी कट्टरपंथियों ने उन्हें गाली दी और लताड़ लगाई तो तुरंत भिगी बिल्ली बन गई।

इफ्तार, फ्रूट क्रीम और नेस्ले का विवाद: कैसे शुरू हुआ पाखंड का खेल?

हाल ही में स्वरा भास्कर ने सोशल मीडिया पर अपनी ‘इफ़्तार’ की तैयारियों का एक वीडियो साझा किया था, जिसे अब डिलीट कर दिया गया है। वीडियो में वे बड़े चाव से ‘फ्रूट क्रीम’ बनाती नजर आ रही थीं। लेकिन इस ‘फ्रूट क्रीम’ ने उनके लिए कड़वाहट पैदा कर दी। वीडियो में उन्होंने ‘नेस्ले मिल्कमेड’ (Nestle Milkmaid) का इस्तेमाल किया था। जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, इस्लामी कट्टरपंथियों और फिलिस्तीन समर्थकों ने स्वरा को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया।

दरअसल, इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के चलते इस्लामी कट्टरपंथी गुट नेस्ले जैसे ब्रांड्स के बहिष्कार (Boycott) की माँग करते हैं। स्वरा, जो खुद को BDS (Boycott, Divestment and Sanctions) आंदोलन का स्वघोषित ब्रांड एंबेसडर मानती हैं, उन्हें उनके ही ‘ईको-चेंबर’ ने गालियाँ देना और पाखंडी कहना शुरू कर दिया। अपनों से मिली इस लताड़ ने स्वरा को इतना डरा दिया कि वे तुरंत सफाई देने के लिए कैमरे के सामने आ गईं।

‘मैं अभी सीख रही हूँ’: भीगी बिल्ली बनकर दी सफाई

अपने नए ‘गेट रेडी विद मी’ (GRWM) वीडियो में स्वरा तैयार होते हुए सफाई देती नजर आईं। वीडियो में स्वरा भास्कर ने जो कहा, वह उनके दोहरे चरित्र का जीता-जागता प्रमाण है। स्वरा ने सफाई देते हुए कहा, “नमस्ते दोस्तों, कल मैंने इफ्तार की तैयारी की कुछ स्टोरी डाली थीं। फ्रूट क्रीम बनाना ही इकलौती चीज है जो मुझे आती है। मैंने आप लोगों के कमेंट्स देखे और नोटिस किया कि आपमें से बहुत से लोगों ने बताया कि नेस्ले बहिष्कार (Boycott) की लिस्ट में है क्योंकि उनका जायोनी (Zionist) कनेक्शन है। सच कहूँ तो मुझे याद नहीं रहा और उस वक्त मेरा दिमाग इस तरफ नहीं गया।”

स्वरा यहीं नहीं रुकीं। खुद को कट्टरपंथियों की नजरों में ‘सही’ साबित करने के लिए उन्होंने आगे कहा, “मैं BDS की बड़ी पैरोकार हूँ और पूरी कोशिश करती हूँ कि इसे अपनी ज़िंदगी में अपनाऊँ। मैंने हाल ही में अपने बच्चे के डायपर भी बदल दिए क्योंकि ‘पैम्पर्स’ भी बॉयकॉट लिस्ट में था। यह एक प्रोसेस है और मैं अभी भी सीख रही हूँ। याद दिलाने के लिए शुक्रिया, मैं अब और ज्यादा सावधान रहूँगी। ढेर सारा प्यार और ‘फ्री फिलिस्तीन’।”

स्वरा का यह कहना कि ‘यह एक प्रोसेस है और मैं अभी सीख रही हूँ,’ यह दर्शाता है कि उनका एक्टिविज्म केवल कैमरे के लिए है, न कि किसी ठोस विचारधारा के लिए।

नेटिजन्स ने जमकर उतारा पाखंड का बुखार: ‘सब कुछ कैमरे के लिए’

स्वरा के इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें बुरी तरह ट्रोल किया है। इंटरनेट पर लोग उनके इस ‘क्रिंज’ (Cringe) व्यवहार पर मजे ले रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “रमजान के दौरान स्वरा सिर्फ दिखावे के लिए ‘फ्री फिलिस्तीन’ चिल्लाती हैं, लेकिन असल में उन्हीं प्रोडक्ट्स का आनंद लेती हैं। कैमरे के लिए एक्टिविज्म और मुनाफे के लिए सब जायज है।”

एक अन्य यूजर ने तंज कसते हुए कहा, “बनियान पहनकर ‘आई सपोर्ट हिजाब’ और ‘फ्री फिलिस्तीन’ सिर्फ स्वरा जैसी लो आईक्यू (Low IQ) वाली ही कर सकती है।” वहीं एक और कमेंट ने स्वरा के ज्ञान पर सवाल उठाते हुए लिखा, “स्वरा इंस्टाग्राम पर नेस्ले के बहिष्कार का ज्ञान दे रही हैं, जबकि इंस्टाग्राम खुद एक यहूदी (मार्क जुकरबर्ग) की कंपनी है। इनके पास कोई तर्क नहीं होता।”

भारत के मुद्दों पर चुप्पी और कट्टरपंथियों के आगे समर्पण

स्वरा भास्कर का दोहरा व्यवहार तब सबसे ज्यादा खटकता है जब बात भारत की आती है। भारत की उपलब्धियों, देशहित की बड़ी खबरों या हिंदुओं के खिलाफ होने वाले अत्याचारों पर स्वरा के होंठ सिल जाते हैं। भारत से जुड़ी अच्छी चीजों पर वे कभी स्टैंड नहीं लेतीं, लेकिन जैसे ही सरहद पार या सात समंदर पार फिलिस्तीन का मुद्दा आता है, वे तुरंत गला फाड़कर सामने आ जाती हैं।

यही स्वरा हैं जो हिंदू हितों या हिंदू भावनाओं को आहत करने वाले बयानों पर माफी माँगने के बजाय खुद को ‘बेचारा’ और ‘पीड़ित’ (Victim Card) दिखाने की कोशिश करती हैं। लेकिन जैसे ही उनके अपने ‘इको-चेंबर’ के कट्टरपंथी उन्हें डाँटते हैं, वे तुरंत घुटनों पर आ जाती हैं। यह साफ दिखाता है कि उनका डर और उनकी वफादारी किसके प्रति है।

प्रोपेगेंडा की राजनीति और स्वरा का सच

स्वरा भास्कर का ‘एक्टिविज्म’ केवल अपनी प्रासंगिकता बचाए रखने का एक जरिया है। वे एक ऐसी ‘सेलेब्रिटी’ हैं जो केवल उसी तरफ झुकती हैं जहाँ से उन्हें समर्थन या चर्चा मिले। कट्टरपंथियों की डाँट पड़ते ही उनके ‘लर्निंग प्रोसेस’ का शुरू होना यह साबित करता है कि वे किसी विचार के प्रति ईमानदार नहीं हैं, बल्कि केवल एक खास वर्ग को खुश रखने की कोशिश कर रही हैं।

भारत के मुद्दों पर चुप्पी और विदेशी मामलों पर झूठा विलाप उनके दोहरे मापदंडों का सबसे बड़ा प्रमाण है। हिंदुओं के खिलाफ अपशब्द कहना और विदेशी प्रोपेगेंडा के सामने नतमस्तक होना, यही स्वरा भास्कर की असली पहचान बन चुकी है। यह वीडियो उनके ‘लव-हेट’ रिलेशनशिप की पोल खोलता है जहाँ वे अपने ही बुने हुए जाल में फँस गई हैं।

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