Monday, April 19, 2021
Home देश-समाज केंद्र सरकार के ‘खेलो इंडिया प्रोग्राम’ ने बदल दी इन 3 बॉक्सरों की जिंदगी

केंद्र सरकार के ‘खेलो इंडिया प्रोग्राम’ ने बदल दी इन 3 बॉक्सरों की जिंदगी

इस प्रोग्राम ने कई ऐसे बच्चों का जीवन बदल दिया है, जिनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर खेलना एक सपना था। लेकिन सरकार की इस योजना से अब उनको 8 साल तक पाँच लाख प्रति वर्ष की सरकारी मदद मिलेगी, जिससे वो अपने सपनों को साकार कर सकेंगे।

आज हम आपको तीन ऐसे बॉक्सरों की कहानी बताने जा रहे हैं, जिनकी केंद्र सरकार के ‘खेलो इंडिया यूथ गेम्स’ ने ज़िंदगी बदल दी। कभी पिता को गार्ड की नौकरी करता देख और माता को मजदूरी में हाथ बटाँने वाले छात्र-छात्राओं को अब 8 सालों तक अपने सपने को उड़ान देने के लिए केंद्र सरकार उन्हें 5 लाख प्रति वर्ष तक की मदद उपलब्ध कराएगी।

पुणे के आकाश ने फाइनल में बाज़ी मारकर पिता की आँखे नम कर दी

बड़ा अजीब लगता है अपना देश छोड़कर पराए देश में अपना आशियाना बनाना। 21 साल पहले नेपाल से भारत के पुणे में आए आकाश के पिता गार्ड की नौकरी करते हैं। यहाँ आने के पीछे उनका बस एक ही सपना था कि वो अपने बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल कर सकें।

दिन-रात एक करके उन्होंने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी और बेटे को आगे बढ़ाते रहे। यही कारण रहा कि आकाश ने भी महाराष्ट्र में ‘खेलो इंडिया यूथ गेम्स’ में अंडर-17 57 किग्रा वर्ग के फाइनल में हरियाणा के अमन दुहान को हराकर उनके सपने को साकार कर दिया।

अपने परिवार और कोच उमेश जगदाले के साथ आकाश गोरखा

विदेश में भी मनवा चुके हैं अपने हुनर का लोहा

2018 सर्बिया में आयोजित जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में आकाश ने रजत पदक अपने नाम किया था। जबकि 2017 में वे दूसरे स्थान पर रहे थे। आकाश के बचपन के कोच उमेश जगदाले कहते हैं, “वह मैदान पर बहुत तेज था, मुझे लगा कि वह एक अच्छा बॉक्सर बना सकता है और उसने मुझे सही साबित किया।”

बता दें कि जगदाले ने आकाश को 2010 से प्रशिक्षित करना शुरू किया था। वहीं आकाश ने कहा कि, “सर जगदाले मेरा मार्गदर्शन करने के लिए हमेशा मौजूद रहते हैं।” आकाश के पिता कहते हैं, “मैं अपने बेटे के खेल संतुष्ट हूँ। अब मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ।”

चौकीदार की बिटिया ने जीता गोल्ड मेडल

‘खेलो इंडिया यूथ गेम्स’ में हिमाचल की बेटी विनाक्षी ने वर्ल्ड चैंपियन को हराकर गोल्ड मेडल जीतते हुए अपने पिता का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया। जनजातीय क्षेत्र किन्नौर की विनाक्षी ने महाराष्ट्र में खेले गए फाइनल मुकाबले में हरियाणा की जूनियर बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियन रह चुकी शशि चोपड़ा को 57 किलोग्राम भार वर्ग में हारकर ये उपलब्धि हासिल की। बता दें कि विनाक्षी के पिता जगन्नाथ चौकीदार की नौकरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं लेकिन बेटी को आगे बढ़ाने में वो हमेशा उसके सपनों के साथ खड़े रहे हैं।

7वीं क्लास से शुरू किया था बॉक्सिंग खेलना

विनाक्षी ने 7वीं क्लास से बॉक्सिंग की शुरूआत की थी और पाइका खेलों में साल 2016 में सिल्वर मेडल जीता था। उन्होंने साल 2018 में यूथ नेशनल में भी रजत पदक जीत कर अपने प्रदेश का मान बढ़ाया था। यही नहीं 2018 में महाराष्ट्र में हुए अंडर-19 स्कूल नेशनल में भी विनाक्षी गोल्ड जीत चुकी हैं।

तेज बुखार और तपन भी नहीं तोड़ पाया शिवानी का हौसला

बदन में तेज बुखार और पेट दर्द से तड़प रही शिवानी ने हार नहीं मानी और रिंग में उतरने का फैसला लिया। शिवानी ने 54 किग्रा भार वर्ग में रजत पदक अपने नाम किया। 17 साल की शिवानी जब गेम खेलने पुणे पहुँचीं उन्हें काफी तेज बुखार था कोच और साथी खिलाडियों ने सलाह दी कि बॉक्सिंग रिंग में न उतरे।

बावजूद इसके शिवानी ने सभी की बातों को अनसुना करते हुए दो अंतरराष्ट्रीय स्तर की बॉक्सरों को पटखनी देते हुए फाइनल में जगह बना ली। हालाँकि, अंतिम मुकाबले में उनके शरीर ने उन्हें धोखा दे दिया और उन्हें हार का सामना करते हुए रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

शिवानी तेज बुखार और पेट दर्द के बाद भी हार नहीं मानीं और रिंग में उतरी

माता-पिता भी कर रहे हैं संघर्ष

शिवानी की माँ पूनम मजदूरी करती हैं, जबकि पिता स्वतंत्र कुमार गार्ड की नौकरी छोड़ बॉक्सरों की मालिश का काम करते हैं। तंगहाली और तमाम परेशानियों के बावजूद, उन्होंने बेटी को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया और आज वह निर्णय सही साबित हुआ।

शिवानी कहती हैं, “हरियाणा में सर्दी थी, पुणे में मौसम गर्म था इसलिए वहाँ पहुँचते ही बुखार हो गया और पेट में दर्द भी। इस स्थिति में मेरे लिए खेल पाना कठिन था। लेकिन, मैंने हार नहीं मानी और नेशनल चैंपियन उत्तराखंड के पिथौरागढ़ की सपना और अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर दिल्ली की रिया टोकस को हराकर फाइनल में जगह बनाई। फाइनल मुकाबले में पेट दर्द बढ़ गया था, फिर भी मैंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की बॉक्सर, मध्यप्रदेश की दिव्या, को कड़ी टक्कर दी, लेकिन हार गई। मुझे स्वर्ण पदक नहीं जीतने का मलाल है।”

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

जमातों के निजी हितों से पैदा हुई कोरोना की दूसरी लहर, हम फिर उसी जगह हैं जहाँ से एक साल पहले चले थे

ये स्वीकारना होगा कि इसकी शुरुआत तभी हो गई थी जब बिहार में चुनाव हो रहे थे। लेकिन तब 'स्पीकिंग ट्रुथ टू पावर' वालों ने जैसे नियमों से आँखें मूँद ली थी।

मनमोहन सिंह का PM मोदी को पत्रः पुराने मुखौटे में कॉन्ग्रेस की कोरोना पॉलिटिक्स को छिपाने की सोनिया-राहुल की नई कवायद

ऐसा लगता है कि कॉन्ग्रेस ने मान लिया है कि सोनिया या राहुल के पत्र गंभीरता नहीं जगा पाते। उसके पास किसी भी तरह के पत्र को विश्वसनीय बनाने का एक ही रास्ता है और वह है मनमोहन सिंह का हस्ताक्षर।

‘छोटा सा लॉकडाउन, दिल्ली छोड़कर न जाएँ’: इधर केजरीवाल ने किया 26 अप्रैल तक कर्फ्यू का ऐलान, उधर ठेकों पर लगी कतार

केजरीवाल सरकार ने 26 अप्रैल की सुबह 5 बजे तक तक दिल्ली में लॉकडाउन की घोषणा की है। इस दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त कर लेने का भरोसा दिलाया है।

मोदी सरकार ने चुपके से हटा दी कोरोना वॉरियर्स को मिलने वाली ₹50 लाख की बीमा: लिबरल मीडिया के दावों में कितना दम

दावा किया जा रहा है कि कोरोना की ड्यूटी के दौरान जान गँवाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के लिए 50 लाख की बीमा योजना केंद्र सरकार ने वापस ले ली है।

पंजाब में साल भर से गोदाम में पड़े हैं केंद्र के भेजे 250 वेंटिलेटर, दिल्ली में कोरोना की जगह ‘क्रेडिट’ के लिए लड़ रहे...

एक तरफ राज्य बेड, वेंटिलेंटर और ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं, दूसरी ओर कॉन्ग्रेस शासित पंजाब में वेंटिलेटर गोदाम में बंद करके रखे हुए हैं।

‘F@#k Bhakts!… तुम्हारे पापा और अक्षय कुमार सुंदर सा मंदिर बनवा रहे हैं’: कोरोना पर घृणा की कॉमेडी, जानलेवा दवाई की काटी पर्ची

"Fuck Bhakts! इस परिस्थिति के लिए सीधे वही जिम्मेदार हैं। मैं अब भी देख रहा हूँ कि उनमें से अधिकतर अभी भी उनका (पीएम मोदी) बचाव कर रहे हैं।"

प्रचलित ख़बरें

‘वाइन की बोतल, पाजामा और मेरा शौहर सैफ’: करीना कपूर खान ने बताया बिस्तर पर उन्हें क्या-क्या चाहिए

करीना कपूर ने कहा है कि वे जब भी बिस्तर पर जाती हैं तो उन्हें 3 चीजें चाहिए होती हैं- पाजामा, वाइन की एक बोतल और शौहर सैफ अली खान।

‘छोटा सा लॉकडाउन, दिल्ली छोड़कर न जाएँ’: इधर केजरीवाल ने किया 26 अप्रैल तक कर्फ्यू का ऐलान, उधर ठेकों पर लगी कतार

केजरीवाल सरकार ने 26 अप्रैल की सुबह 5 बजे तक तक दिल्ली में लॉकडाउन की घोषणा की है। इस दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त कर लेने का भरोसा दिलाया है।

SC के जज रोहिंटन नरीमन ने वेदों पर की अपमानजनक टिप्पणी: वर्ल्ड हिंदू फाउंडेशन की माफी की माँग, दी बहस की चुनौती

स्वामी विज्ञानानंद ने SC के न्यायाधीश रोहिंटन नरीमन द्वारा ऋग्वेद को लेकर की गई टिप्पणियों को तथ्यात्मक रूप से गलत एवं अपमानजनक बताते हुए कहा है कि उनकी टिप्पणियों से विश्व के 1.2 अरब हिंदुओं की भावनाएँ आहत हुईं हैं जिसके लिए उन्हें बिना शर्त क्षमा माँगनी चाहिए।

ईसाई युवक ने मम्मी-डैडी को कब्रिस्तान में दफनाने से किया इनकार, करवाया हिंदू रिवाज से दाह संस्कार: जानें क्या है वजह

दंपत्ति के बेटे ने सुरक्षा की दृष्टि से हिंदू रीति से अंतिम संस्कार करने का फैसला किया था। उनके पार्थिव देह ताबूत में रखकर दफनाने के बजाए अग्नि में जला देना उसे कोरोना सुरक्षा की दृष्टि से ज्यादा ठीक लगा।

जिसने उड़ाया साधु-संतों का मजाक, उस बॉलीवुड डायरेक्टर को पाकिस्तान का FREE टिकट: मिलने के बाद ट्विटर से ‘भागा’

फिल्म निर्माता हंसल मेहता सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। इस बार विवादों में घिरने के बाद उन्होंने...

रोजा वाले वकील की तारीफ, रमजान के बाद तारीख: सुप्रीम कोर्ट के जज चंद्रचूड़, पेंडिग है 67 हजार+ केस

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने याचिककर्ता के वकील को राहत देते हुए एसएलपी पर हो रही सुनवाई को स्थगित कर दिया।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,985FansLike
82,231FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe