Monday, August 2, 2021
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किसानों के लिए $10 मिलियन, बदले में खालिस्तान का करें समर्थन: YouTube पर SFJ का विज्ञापन

चरमपंथी अफवाह फैला रहे हैं कि हाल ही में पारित कानून किसानों की ज़मीन छीन लेंगे। खालिस्तानी समर्थक अभिनेता से नेता बने दीप सिद्धू को भी इस तरह के बेबुनियाद दावे करते सुना गया। वास्तव में, कानून निजी कंपनियों या व्यापारियों द्वारा गलत व्यवहार करने से किसानों को कई तरह से सुरक्षा देते हैं।

पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में किसान आंदोलन के बीच यह स्पष्ट है कि खालिस्तानी समर्थकों ने विरोध-प्रदर्शनों को हाईजैक कर लिया है और अपने नापाक एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। कुख्यात इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आगे आया है। बता दें कि पीएफआई को इस्लामी चरमपंथियों के साथ संबंध के लिए जाना जाता है।

खालिस्तानी समूह सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने भी विरोध-प्रदर्शनों के लिए समर्थन की घोषणा की है। YouTube और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर ऐसे विज्ञापन दिखाई देने लगे हैं, जिसमें लोगों से खालिस्तानी आंदोलन में शामिल होने का आग्रह किया जा रहा है।

खालिस्तान आंदोलन में शामिल होने के लिए 10 मिलियन डॉलर का ऑफर

SFJ के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू ने उन किसानों के लिए 10 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता की घोषणा की है, जिन्हें दिल्ली की यात्रा के दौरान किसी भी तरह का नुकसान हुआ हो। हाल ही में अपलोड किए गए एक वीडियो में पन्नू ने किसानों से उनको हुए नुकसान का डिटेल भेजने के लिए कहा है ताकि उनका संगठन राशि की क्षतिपूर्ति करेगा।

इसके बदले में पन्नू ने खालिस्तान आंदोलन में शामिल होने के लिए कहा। वह ‘जनमत संग्रह’ के लिए वोट खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। उनके संगठन ने पंजाब को भारत से अलग करने और सिखों के लिए राष्ट्र खालिस्तान बनाने की घोषणा की है। खालिस्तानी ताकतों को पाकिस्तान का भरपूर समर्थन मिल रहा है।

वीडियो में पन्नू ने कहा, “सिख फॉर जस्टिस ने पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए 10 मिलियन डॉलर की घोषणा की है। यह धनराशि उन लोगों को दी जाएगी जो घायल हो गए थे या दिल्ली जाते समय किसी भी नुकसान का सामना करना पड़ा था।” उन्होंने किसानों से 30 नवंबर को सिखों के न्याय के लिए आह्वान करने को कहा, जिस दिन सिख समुदाय के लोग प्रथम गुरु नानक देव जी की जयंती मनाएँगे।

उन्होंने कहा, “30 नवंबर को, पंजाब जनमत संग्रह के लिए अपना वोट पंजीकृत करें। यह हिंद और पंजाब के बीच की लड़ाई है। खालिस्तान एकमात्र रास्ता है। ये काले कानून आपकी जमीनें छीन रहे हैं। जिस दिन पंजाब मुक्त हो जाएगा, कोई भी पंजाब में किसी भी किसान की जमीन पर कब्जा नहीं कर पाएगा।”

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान प्रायोजित SFJ पहले इस बात का ऐलान कर चुका है कि वह खालिस्तान का समर्थन करने वाले पंजाब और हरियाणा के किसानों को 1 मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद करेगा। 23 सितंबर को सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ SFJ ने क़र्ज़ लेने वाले किसानों के बीच 1 मिलियन डॉलर बाँटने का ऐलान करके किसानों के विरोध-प्रदर्शन का फायदा उठाने का प्रयास किया था। 

SFJ ने कहा था, “कोई भी किसान चाहे वह किसी भी धर्म का क्यों हो, 1 से 8 अक्टूबर के बीच खालिस्तान जनमत संग्रह के लिए 25 मतों का पंजीयन करा सकता है। इसके बदले में उसे 5 हज़ार रुपए का आर्थिक सहयोग मिलेगा जिससे वह अपना क़र्ज़ चुका सकता है।” यह जानकारी खुफ़िया एजेंसियों को मिले इनपुट पर आधारित है। केंद्र सरकार के कृषि सुधार विधेयकों को किसानों की ज़मीन छीनने का औपनिवेशिक एजेंडा बताते हुए SFJ के जनरल काउंसल गुरपतवंत सिंह पन्नू ने किसानों को मोदी सरकार के विरुद्ध भड़काने का प्रयास किया था। उसका यहाँ तक कहना था कि मोदी सरकार पंजाब और हरियाणा के किसानों को लाचार करना चाहती है। SFJ ने इसमें हरियाणा के किसानों को भी शामिल किया था, क्योंकि वह हरियाणा को भी खालिस्तान का हिस्सा मानते हैं। 

SFJ का डोर टू डोर अभियान, सिखों को खालिस्तान आंदोलन का हिस्सा बनने का लालच

इस साल के सितंबर महीने में SFJ ने डोर टू डोर अभियान का ऐलान किया था, जिसमें वह अपने अलगाववादी एजेंडे ‘जनमत संग्रह 2020’ (Referendum 2010) का समर्थन करने वालों का पंजीयन करा रहे थे। इस घोषणा के बाद खुफ़िया और आतंकवाद विरोधी एजेंसियों ने प्रदेश की लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों को सूचित कर दिया था। लेकिन पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार इतने गंभीर मुद्दे पर बिलकुल भी सक्रिय नहीं नजर आई। 

SFJ के YouTube विज्ञापनों पर प्रश्न

नेटिजन्स ने YouTube पर विज्ञापन के रूप में चलने वाले वीडियो पर गौर किया तो पता चला कि यह Google विज्ञापनदाता नीतियों के विरुद्ध है। Google की नीति के अनुसार, “ऐसे विज्ञापन जो संभावित रूप से महत्वपूर्ण सामाजिक, सांस्कृतिक, या राजनीतिक प्रभाव के साथ एक संवेदनशील घटना जैसे कि सिविल इमरजेंसी, प्राकृतिक आपदाएँ, सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति, आतंकवाद और संबंधित गतिविधियाँ, संघर्ष या हिंसा आदि का फायदा उठाते हैं,” उन्हें अनुमति नहीं है।

इसके अलावा, खतरनाक या अपमानजनक सामग्री के तहत, Google ने स्पष्ट रूप से कहा है कि “आतंकवादी समूहों द्वारा या उसके समर्थन में तैयार की गई सामग्री” को YouTube सहित किसी भी प्लेटफ़ॉर्म पर विज्ञापन के रूप में अनुमति नहीं है। सिख फॉर जस्टिस यूएपीए, 1967 के तहत एक गैरकानूनी संगठन है। 2019 में, गृह मंत्रालय ने एसएफजे पर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए प्रतिबंध लगा दिया था। इस साल जुलाई में भारत सरकार ने संगठन से जुड़ी 40 वेबसाइटों को ब्लॉक कर दिया था

हालाँकि ऐसा लगता है कि YouTube ने इस मामले में नीतियों को लागू को नहीं करने का फैसला किया। ऐसा लगातार देखा गया है कि YouTube की नीतियाँ अराजत तत्वों पर लागू नहीं होती है।

कानून का जमीन से कोई लेना-देना नहीं है

चरमपंथी अफवाह फैला रहे हैं कि हाल ही में पारित कानून किसानों की ज़मीन छीन लेंगे। खालिस्तानी समर्थक अभिनेता से नेता बने दीप सिद्धू को भी इस तरह के बेबुनियाद दावे करते सुना गया। वास्तव में, कानून निजी कंपनियों या व्यापारियों द्वारा गलत व्यवहार करने से किसानों को कई तरह से सुरक्षा देते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ किसान पहले ही नए कानूनों से लाभान्वित हो चुके हैं, क्योंकि इससे उन्हें व्यापारियों से विलंबित भुगतान निकालने में मदद मिली।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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