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कश्मीरी कट्टरपंथियों को चीन की दोस्ती के चक्कर में न पड़ने की चेतावनी के बाद उमर अब्दुल्ला ट्विटर से गायब

भारत-चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोग चीनी सेना के समर्थन में नजर आ रहे थे। इस पर उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि चीन की तारीफ करने से पहले चीन में रह रहे उइगर मुस्लिमों की स्थिति के बारे में भी पता लगा लें।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्‍यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपना ट्विटर एकाउंट डिएक्टिवेट कर दिया है और वो ट्विटर छोड़ चुके हैं। इसके पीछे एक प्रमुख कारण उनका वह ट्वीट माना जा रहा है जिसमें उन्होंने उन लोगों को कड़ी फटकार लगाई थी जो भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच झड़प में चीन की तारीफ कर रहे थे।

भारत-चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोग चीनी सेना के समर्थन में नजर आ रहे थे। इस पर उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि चीन की तारीफ करने से पहले चीन में रह रहे उइगर मुस्लिमों की स्थिति के बारे में भी पता लगा लें। उमर अब्दुल्ला के इस ट्‍वीट के बाद उन्हें कुछ लोगों का समर्थन मिला, लेकिन एक बड़े वर्ग की सख्त प्रतिक्रिया भी झेलनी पड़ी।

उमर अब्दुल्ला का अकाउंट अब ट्विटर पर निष्क्रीय नजर आ रहा है –

दरअसल, चीन में उइगर मुस्लिमों पर वहाँ की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा कई प्रकार के अत्याचार किए जाते हैं, जिन्हें कि मीडिया के सामने आने से भी रोक दिया जाता है। यह भी दिलचस्प है कि दुनियाभर के मुस्लिम एक ओर जहाँ मुस्लिमों की छवि और उनके अधिकारों को लेकर चिंतित रहते हैं, वहीं वह चीन में उइगर मुस्लिमों की प्रताड़ना को लेकर उदासीन ही नजर आते हैं।

यह आशंका जताई जा रही है कि उमर अब्दुल्ला इसी उदासीनता का शिकार हुए हैं, जिस कारण उन्हें ट्विटर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। इससे एक संकेत यह भी मिलता है कि चीन के उइगर मुस्लिमों की चिंता एक समुदाय विशेष के लिए चीन की वैश्विक छवि के सामने कुछ नहीं है।

जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला को घाटी से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निष्क्रिय करने के लगभग 8 महीने बाद मार्च के माह हिरासत से रिहा कर दिया गया था। जनसुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत लगाए गए आरोप हटाए जाने के बाद उनकी रिहाई का आदेश जारी किया गया।

उमर अब्दुल्ला की नजरबंदी करीब 7 महीने तक रही थी। उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की 6 महीने की ‘एहतियातन हिरासत’ पूरी होने से महज कुछ घंटे पहले ही उनके खिलाफ जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

यह भी ध्यान देने की बात है कि गत मई माह में ही कॉन्ग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी को भी चीन और भारतीय सेना को लेकर कुछ ट्वीट किए थे जिसके बाद कॉन्ग्रेस ने भी उनके बयानों से किनारा कर लिया था और अधीर चौधरी को अपने ट्वीट डिलीट करने पड़े थे।

दरअसल, अधीर रंजन चौधरी ने लद्दाख और सिक्किम में भारतीय सैनिकों के साथ चीनी सैनिकों की हुई झड़प को लेकर चीन को ‘जहरीला साँप’ बताया था।उन्होंने ट्वीट में लिखा था – “सावधान हो जाओ चीन, भारतीय बलों को पता है कि तुम जैसे जहरीले साँपों का फन कैसे कुचला जाता है। पूरी दुनिया की नजर तुम्हारी विस्तारवाद की कुटिल चाल पर है। मैं सरकार को अब बिना समय गँवाए ताइवान से राजनयिक संबंध स्थापित करने का सुझाव देता हूँ।”

इस पर कॉन्ग्रेस ने बयान दिया कि अधीर चौधरी ने चीन को लेकर जो कुछ भी कहा वो कॉन्ग्रेस की राय नहीं है। इस पर कॉन्ग्रेस पार्टी की नाराजगी को देखते हुए अधीर रंजन चौधरी ने अपने ट्वीट डिलीट करने पड़े थे। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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