Homeसोशल ट्रेंडद्रौपदी का चीरहरण, ऑनलाइन कपड़े ढूँढ रहे श्रीकृष्ण: विवाद के बाद पुराने विज्ञापन से...

द्रौपदी का चीरहरण, ऑनलाइन कपड़े ढूँढ रहे श्रीकृष्ण: विवाद के बाद पुराने विज्ञापन से Myntra ने पल्ला झाड़ा

विज्ञापन में दिखाया गया है कि एक व्यक्ति द्रौपदी के वस्त्र उतार रहा है और भगवान श्रीकृष्ण मोबाइल फोन में Myntra का एप खोल कर उसमें लंबी साड़ी ढूँढ रहे हैं।

सोशल मीडिया पर लोग Myntra के एक पुराने विज्ञापन को लेकर उसके बहिष्कार की अपील कर रहे हैं। इस विज्ञापन में उसने भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी का मजाक बनाया है। इस विज्ञापन में द्रौपदी के चीरहरण के दृश्य का इस्तेमाल किया गया है। दिखाया गया है कि एक व्यक्ति द्रौपदी के वस्त्र उतार रहा है और भगवान श्रीकृष्ण मोबाइल फोन में Myntra का एप खोल कर उसमें लंबी साड़ी ढूँढ रहे हैं।

कविता नाम की यूजर ने लिखा, “ये सिर्फ एक विज्ञापन नहीं है, बल्कि ये हिन्दू धर्म व दुनिया भर में रह रहे हिन्दुओं का अपमान है। हमें इस बार स्पष्ट और ऊँचे स्वर में संदेश देने की आवश्यकता है – हिन्दू विरोधी प्रोपेगंडा को हम सहन नहीं करेंगे। हम इसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।”

लोगों ने ट्विटर पर ‘Boycott Myntra’ ट्रेंड कराया और इसके बहिष्कार की अपील की। बता दें कि Myntra एक एक भारतीय फैशन ई-कॉमर्स कंपनी है, जिसका मुख्यालय बेंगलुरु में स्थित है। 2007 में इसकी स्थापना की गई थी, जब इसके माध्यम से गिफ्ट आइटम्स बेचे जाते थे, ये कपड़ों की एक बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी बन गई। ये भी जानने लायक है कि Myntra का स्वामित्व 2014 के बाद से फ्लिपकार्ट के पास है।

शेजल जोशी ने लिखा, “बस अब बहुत हुआ। ये हिन्दू विरोधी गतिविधियों का उच्च-स्तर है। उन्होंने हमें और हमारी धार्मिक भावनाओं को ग्रांटेड ले लिया है। हम हमें उन्हें अपनी ताकत दिखानी है।” बताया जा रहा है कि ये ग्राफिक्स 2016 का है, जो अब वायरल हुआ है। Myntra का कहना है कि उसने ये आर्टवर्क नहीं बनाया है और न ही वो इसे एंडोर्स करता है। साथ ही उसने इसे हटा कर लीगल एक्शन लेने की भी अपील की।

‘ScrollDroll’ नामक कंपनी ने कहा है कि ये एड उन्होंने बनाया है और इसका Myntra से कोई लेनादेना नहीं है। वहीं Myntra ने अपने ब्रांड का इस्तेमाल करने के लिए उसे कानूनी कार्रवाई की भी धमकी दी है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि किसी एक फेमिनिस्ट की शिकायत पर Myntra अपने लोगो में बदलाव ला सकता है, फिर हिन्दू धर्म के अपमान के विषय में ये कंपनियाँ बार-बार गलती क्यों कर रही हैं?

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -