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‘CISF में अधिकतर हिंदू… इसलिए ताजमहल में लहराने दिया भगवा’: आगरा की घटना पर पागल हुए इस्लामी कट्टरपंथी

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने लिखा, "एक बार फिर भगवा गुंडों ने मुस्लिम राजा द्वारा बनाई गई इमारत में तोड़फोड़ की।" प्रोपेगंडा फैक्ट-चेक पोर्टल 'ऑल्टन्यूज़' के जुबैर ने तो CISF पर ही सवाल उठाते हुए...

उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित मुगलकालीन स्मारक ताजमहल में कुछ लोगों ने भगवा झंडे लेकर वीडियो बना लिए, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरवादियों का मानसिक संतुलन ही हिल सा गया लगता है। ताजमहल सहित कई पर्यटन स्थल कोरोना संक्रमण और उससे निपटने के लिए हुए लॉकडाउन के कारण महीनों बंद रहे थे, जिन्हें खोले जाने के बाद अब वहाँ पर्यटकों के पहुँचने का सिलसिला जारी है।

इसी बीच, 17वीं सदी के इस मुग़ल स्मारक में ‘हिन्दू जागरण मंच’ के कुछ युवा पहुँचे और परिसर में भगवा झंडे लहराते हुए तस्वीरें व वीडियो क्लिक करवाई। इनमें से 4 को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। इसके बाद सोशल मीडिया में इस्लामी कट्टरवादियों ने वहाँ तैनात सुरक्षाकर्मियों पर आरोप लगाते हुए भला-बुरा कहना शुरू कर दिया। इस अभियान का नेतृत्व किया प्रोपेगंडा फैक्ट-चेक पोर्टल ‘ऑल्टन्यूज़’ के जुबैर ने।

उसने कहा कि केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के हाथों में ताजमहल की सुरक्षा सौंपी गई है और इसके सैकड़ों जवान तैनात हैं, जो विभिन्न शिफ्ट्स में काम करते हैं। उसने पूछा कि जब ये घटना हो रही थी तो ये सब कहाँ थे और क्या कर रहे थे? कुछ ने तो CISF के जवानों की देश के संविधान के प्रति निष्ठा पर भी सवाल खड़े कर दिए। आरिफ अयूब ने कहा कि भारतीय सेना, न्यायपालिका, पुलिस और मीडिया की तरह CISF के जवानों में भी अधिकतर महिला-पुरुष हिन्दू हैं।

उसने दावा किया कि अगर कोई कहता है कि इनकी निष्ठा देश के संविधान और उसके मूल्यों के प्रति है, तो वो खुला झूठ बोल रहा है। बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने भी आपत्ति जताते हुए लिखा, “एक बार फिर क्या होता है? ‘एक बार फिर’ का सही इस्तेमाल… एक बार फिर भगवा गुंडों ने ग़ैर क़ानूनी ढंग से एक मुस्लिम राजा द्वारा बनाई गई इमारत में तोड़फोड़ की।” ‘भारत समाचार’ ने लिखा था, ‘आगरा: एक बार फिर ताजमहल पर लहराया भगवा।’, वो उसी का प्रत्युत्तर दे रही थीं।

ध्यान दीजिए कि ये वही लोग हैं, जो मंदिर में जबरन घुस कर कुछ मुस्लिम नमाज पढ़ते हैं तो इसे सामुदायिक समरसता का प्रतीक बताते नहीं थकते हैं। वहीं जब किसी पर्यटन स्थल के परिसर में कुछ लोगों ने भगवा झंडे लेकर वीडियो बना लिया तो ये उससे नाराज हो जाते हैं। कुछ ने कहा कि ताजमहल को मुस्लिमों ने बनवाया है, इसीलिए वहाँ भगवा जायज नहीं। एक ने लिखा कि संघियों के घर में खाना तक ठीक से नहीं बनता और 100 साल में वो एक इमारत तक खड़ी नहीं कर सके।

नवंबर 2020 में जब कुछ मुस्लिमों ने मथुरा के मंदिर में नमाज पढ़ी तो तो इस्लामी कट्टरपंथियों ने तालियाँ पीटी थीं। नमाज पढ़ने वाले फैजल खान के बारे में पता चला था कि वो नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों का भी हिस्सा रहा था। तस्वीरों में फैजल खान को CAA विरोधी प्रदर्शनों को सम्बोधित करते हुए देखा जा सकता था। अयोध्या के बाद मथुरा के लिए जो लड़ाई शुरू हुई है, उसी कारण फैजल खान ने नंदबाबा मंदिर में जाकर नमाज पढ़ी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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