महिलाओं ने दावा किया कि काफिर समुदाय विशेष पर अत्याचार करते हैं, इसीलिए वो इस वायरस के कारण तबाह हो जाएँगे। महिलाओं ने दावा किया कि इससे उनका तो कुछ नहीं बिगड़ेगा लेकिन काफिरों की तबाही आ जाएगी, इसका उन्हें पूरा विश्वास है।
"अगर तबलीगी लोगों को जान गए तो उन्हें भगवान की तरह पूजोगे। तबलीगियों ने अंग्रेजों को धूल चटाई थी और RSS के मुखबिरों ने अंग्रेजों के पैर की धूल चाटी थी। आरएसएस सिर्फ अंग्रेजों की गुलामी कर सकता है।"
“आज हर कोई आइसोलेशन में रखे गए तबलीगियों को देखकर हैरान है कि वे इतना क्यों थूक रहे हैं। तो बता दें कि उनका धर्मशास्त्र उन्हें ऐसा करने की शिक्षा देता है कि नमाज पढ़ते समय या मजहबी कार्य करते समय शैतान की दखलअंदाजी खत्म करने के लिए वो ये करें।"
तेलंगाना के रहने वाले इस व्यक्ति के अनुसार तबलीगी जमात पूरी दिनचर्या तय करता है। खाने-पीने से लेकर मल-मूत्र त्याग करने तक सब कुछ। यहाँ तक कि सेक्स कैसे करना है, ये भी जमात ही सिखाता था। यह भी कहा जाता था कि बीमार पड़ने पर डॉक्टरों के पास नहीं जाना चाहिए और अल्लाह में यकीन करना चाहिए।
पुलिस के पास पहुँची ऑडियो क्लिप में विधायक दावा कर रहा है कि क्वारंटाइन सेंटर्स में लोग मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं, जबकि वास्तविकता में वो बिलकुल फिट और स्वस्थ हैं। वे वहाँ स्वस्थ लोगों को इंजेक्शन देते हैं, ताकि वो बीमार हो जाएँ और कोरोना मरीज बन जाएँ।
सोचने वाली बात है कि आखिर कोई आयरिश अखबार भारत की इस छोटी सी सूचना को अपनी मुख्य हेडलाइन क्यों बनाएगा? इस समय तो भारत में कई लोग ऐसे हैं जो बड़ा-बड़ा दान कर रहे हैं, तो फिर आयरिश अखबार सिर्फ मो. साद को ही क्यों चुनता?
"मरकज के जमातियों का टेस्ट हुआ, उसमें किसी को भी कोरोना वायरस नहीं पाया गया और मीडिया कह रही है कि कोरोना वायरस तबलीगी जमातियों ने फैलाया है। कैसे? समझ रहे हो आप?"
नए ऑडियो में (जिसे आज ही अपलोड किया गया है, जबकि मौलाना पुलिस-प्रशासन से भागता फिर रहा है) मौलाना साद न केवल डॉ की हिदायत पर अमल करने के लिए कहता है, बल्कि उसे शरीयत के अनुकूल भी बताता है।
अब सवाल खड़ा होता है कि दिल्ली मजहबी सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद ये जो जमाती पूरे देश में फैले इन्होंने जागरूकता के नाते पहले अपनी जाँच क्यों नहीं कराई और जब ये लोग दूर क्षेत्रों की मस्जिदों में पहुँचे या वहाँ रुके भी तो इस दौरान वहाँ के स्थानीय लोगों ने इसके संबंध में पुलिस प्रशासन को क्यों अवगत नहीं कराया।