Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीय'मुस्लिम महिलाएँ ऐसे कपड़े नहीं पहनती, कलमा पढ़कर दिखाओ'

‘मुस्लिम महिलाएँ ऐसे कपड़े नहीं पहनती, कलमा पढ़कर दिखाओ’

वीडियो में देखा जा सकता है कि फल बेचने वाला चाहता है कि आसिल कलमा पढ़कर यह साबित करे कि वह मुस्लिम है। उसको आसिल के मुस्लिम होने पर इसलिए भी संदेह है क्योंकि उसने इस्लाम के अनुसार कपड़े नहीं पहने हैं।

सोशल मीडिया पर एक विडियो सामने आया है जिसमें पाकिस्तान में धर्म के नाम पर होने वाली महिला विरोधी गतिविधियों का नमूना देखने को मिलता है। दरअसल, एक महिला तुर्किश बाइकर से एक पाकिस्तानी फल बेचने वाला कलमा पढ़ने की बात करते हुए नजर आ रहा है। फल विक्रेता महिला से इसलिए कलमा पढ़वाना चाहता है क्योंकि उसके अनुसार आसिल ओज़बे नाम की यह महिला अपने पहनावे से ‘मुस्लिम’ नहीं लगती।

वीडियो में देखा जा सकता है कि फल बेचने वाला चाहता है कि आसिल कलमा पढ़कर यह साबित करे कि वह मुस्लिम है। उसको आसिल के मुस्लिम होने पर इसलिए भी संदेह है क्योंकि उसने इस्लाम के अनुसार कपड़े नहीं पहने हैं।

आसिल के कलमा पढ़ने के बाद फल बेचने वाला दावा करता है कि ‘मोहम्मद’ के अनुसार, महिलाओं को ऐसे कपड़े नहीं पहनने चाहिए, जैसे कि बाइकर आसिल ने पहने हुए हैं। उसने कहा- “मोहम्मद कहते हैं कि ऐसे कपड़े किसी को नहीं पहनने चाहिए। तुम एक औरत हो। मुस्लिम ऐसे कपड़े नहीं पहनते हैं क्योंकि सब लोग आपका शरीर देख लेते हैं। महिलाओं को ऐसे कपड़े नहीं पहनने चाहिए।”

यह वीडियो इस बात की पुष्टि करता है कि पाकिस्तान में महिलाओं की क्या स्थिति है। एक ओर पकिस्तान जहाँ कश्मीर मामले पर मानवाधिकारों के फर्जी दावे कर रहा है, वहीं पाकिस्तान में मानवाधिकारों की कितनी इज्जत है यह इस वीडियो से स्पष्ट होता है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

क्या भारत की राजनीति पहली बार पूरी तरह ‘हिन्दू-केंद्रित’ हो गई है?

क्या भारत की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव चुनावी नतीजों में नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस के केंद्र में हुआ है? PM मोदी मजबूत हों या कमजोर, सत्ता में BJP रहे या विपक्ष आए, क्या हिन्दू पहचान और हिन्दू समाज से जुड़े सवाल अब भारतीय राजनीति के केंद्रीय विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं?

कुएँ में कूदने की जगह नहीं बची तो रोने लगीं हिंदू महिलाएँ: जानिए- 1947 में रावलपिंडी के तोहा खालसा में 90 हिंदू-सिख महिलाओं ने...

जानिए 1947 के रावलपिंडी दंगों में तोहा खालसा की 93 हिंदू महिलाओं के कुएँ में एक साथ कूदकर जान देने की दर्दनाक कहानी।
- विज्ञापन -