फिल्म के टीजर से लगता है कि निर्माता एक ब्राह्मण लड़की को दिखाना चाहते हैं जो समाज और परिवार से विद्रोह करती है और शराब तथा सेक्स को इसका जरिया बनाती है।
न तो बलात्कार की समस्या को पहली बार उठाया गया है, न पिता-पुत्री के रिश्ते को पहली बार उकेरा गया है, न ही पुलिस के कामकाज के तरीके पर ये पहला कटाक्ष है। फिर भी 'महाराजा' ताज़ा हवा का झोंका है।