“सुबह से भूखे थे। सुबह साढ़े आठ बजे घर से निकलते हुए उन्होंने कहा था कि उनके बॉस फील्ड में अकेले हैं। दंगे भड़क गए हैं। मुझे जल्दी जाना होगा...और चले गए। मुझे क्या पता था कि वो सदा के लिए चले जाएँगे। उस दिन उनकी तबीयत खराब थी, लेकिन फिर भी ड्यूटी चले गए।”
दिलबर नेगी की उम्र महज 20 साल थी। दंगाइयों ने हाथ-पैर काट उन्हें जिंदा जला दिया था। मुस्लिम भीड़ की दरिंदगी को छिपाने के लिए प्रोपेगेंडा पोर्टल वायर ने लिखा है कि नेगी की मौत 'जलने के कारण हुए घाव से हुई'। न इस मामले में गिरफ्तार शाहनवाज का जिक्र है न नेगी के साथ हुई क्रूरता का।
ताहिर हुसैन की हिंदू विरोधी दंगों में संलिप्तता को लेकर कई सबूत सामने आए हैं। अपना नाम सामने आने के बाद से वह फरार था। गुरुवार को उसे दिल्ली पुलिस ने धर दबोचा था। उस पर आईबी के अंकित शर्मा की हत्या का आरोप है।
दिल्ली और यूपी पुलिस की संयुक्त बैठक के बाद राजधानी से सटे इलाकों से भी दंगाइयों के आने की बात सामने आई है। कॉन्स्टेबल रतनलाल के हत्यारों की पहचान भी हो चुकी है। पुलिस पर हमला सोची-समझी साजिश के तहत किया गया था।
करीब 40 पुलिसकर्मियों ने गुरुवार सुबह 9 बजे से ही कोर्ट में घेराबंदी कर रखी थी। कोई छोले-कुलचे वाले के पास ग्राहक बनकर खड़ा था तो कोई पार्किंग अटेंडेंट बनकर। कोई चायवाला बना था तो कोई मुंशी। कई पुलिसवाले वकील बने भी घूम रहे थे।
छानबीन के दौरान पुलिस ने शाहरुख का एक दूसरा मोबाइल फोन भी बरामद किया है। इससे पहले पुलिस ने उसकी कार और एक फोन भी बरामद किया था। दिल्ली पुलिस ने बरामद की गई सभी चीजों की जाँच के लिए फोरेंसिक लैब में भेज दिया है।
गृह मंत्रालय ने यह प्रतिक्रिया एबीपी न्यूज़ की उन दो रिपोर्ट्स के पब्लिश होने पर दी जिसमें कहा गया था कि गृह मंत्रालय दिल्ली हिंसा से निपटने के दिल्ली पुलिस के तरीके से असंतुष्ट है और वह इसके लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर कार्यवाही कर सकता है।
24 फरवरी को चॉंदबाग में पुलिस पर हमला सोची-समझी साजिश थी। दंगाइयों ने पुलिस को बुलाने से पहले सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए थे ताकि उनकी पहचान न हो। अब फुटेज के आधार उनकी धर-पकड़ की जा रही है।
डीसीपी शर्मा की पत्नी उनकी हालत देखकर बेहद भावुक मन से 24 फरवरी के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि उस दिन अमित शर्मा के ऑफिस स्टाफ ने घर पर कॉल की थी और कहा था कि अमित शर्मा घायल हो गए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हिंसा वाले दिन शाह आलम अपने भाई यानी ताहिर हुसैन की छत पर दंगाइयों के साथ मौजूद था। हिंसा भड़काने में उसका बहुत बड़ा हाथ है। वह फरार बताया जा रहा है।