विषय: पद्म श्री

सुदेवी दासी गोवर्धन

Padm Shri से सम्मानित गोसेवा करने वाली जर्मन महिला को सुषमा दिलाएँगी वीसा

फ्रेडरिक भारत में ही रहना चाहती है और गौसेवा करना चाहती है। इसलिए उन्होंने वीजा बढ़ाने का आवेदन किया था, लेकिन विदेश मंत्रालय के लखनऊ ऑफिस में बिना कोई कारण बताए उनके आवेदन को खारिज कर दिया गया है।

तालाब का गंदा पानी पीने को मजबूर थे लोग, 70 साल के दैत्री नायक ने बदली गाँव की क़िस्मत

दैत्री नायक ने गाँव में होने वाली पानी की समस्या को दूर करने की ठानी और तीन साल की कड़ी मेहनत से गाँव में एक किलोमीटर लंबी नहर खोद डाली।
सुदेवी गौरक्षक

42 वर्षों से मथुरा में गोसेवा कर रही जर्मन मूल की सुदेवी गोवर्धन को पद्मश्री

उनकी गौशाला में गायों के लिए एक स्पेशल एम्बुलेंस भी है। अगर किसी गाय की मृत्यु निकट आ जाए और उसके बचने की कोई संभावना न रहे, तब सुदेवी उसे गंगाजल का सेवन कराती है।

पौधों को सींचने कमर और सिर पर पानी लेकर 4 किमी तक जाती थीं राष्ट्रपति को ‘आशीर्वाद’ देने वाली ‘वृक्ष माता’

‘वृक्ष माता’ थिमक्का को अभी तक कई सारे अवॉर्ड मिल चुके हैं, लेकिन वहाँ के स्थानीय लोगों का कहना है कि थिमक्का के ऊपर इसका कोई प्रभाव नहीं दिख रहा है। वो आज भी उसी तरह से सादा जीवन जी रही हैं
प्रीतम भरतवाण

अस्त होती सभ्यता का सूर्य हैं सरस्वती पुत्र ‘पद्मश्री’ प्रीतम भरतवाण

देवताओं की इस धरती पर यदि सबसे पहले किसी को नमन किया जाना चाहिए तो वह यह ‘दास समुदाय' है जिन्हे स्थानीय भाषा में ‘औजी’ कहा जाता है, जिनके आवाह्न से ही किसी भी शुभ कार्य या समारोह में सर्वप्रथम देवी-देवताओं का स्मरण किया जाता है।
सुदेवी दासी गोवर्धन

1500+ गाय, 52 नेत्रहीन, 350 अपाहिज: गौसेवा की अनुपम मिसाल के लिए जर्मन महिला को पद्मश्री

बीमार और असहाय गायों की सेवा करने के कारण उन्हें 'गायों की मदर टेरेसा' भी कहा जाता है। उनके गोशाला में 1,500 से भी अधिक गायें हैं। सारे ख़र्च वह खुद उठातीं हैं।
पद्म पुरस्कार में कई गुमनाम लोगों के नाम

पद्म पुरस्कार: गुमनाम लेकिन महान लोगों के नाम से… अवॉर्ड ख़ुद हुआ सम्मानित!

सरकार ने इन पुरस्कारों के तहत 4 हस्तियों को पद्म विभूषण, 14 को पद्म भूषण जबकि 94 लोगों को पद्मश्री पुरस्कारों के लिए चयनित किया है।
गीता मेहता

पद्मश्री सम्मान लेने से इनकार किया ओडिशा CM की लेखिका बहन ने, कहा चुनाव से पहले गलत संदेश जाएगा

गीता ने 1979 में कर्म कोला, 1989 में राज, 1993 में ए रिवर सूत्र, 1997 में स्नेक्स एंड लैडर्स: ग्लिम्पसिस ऑफ मॉडर्न इंडिया और 2006 में इटरनल गणेश: फ्रॉम बर्थ टू रीबर्थ जैसी किताबों का लेखन किया है।

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