Saturday, October 1, 2022

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प्लास्टिक प्रदूषण

बिहार के होनहार युवा प्लास्टिक कचरे से बना रहे पेट्रोल-डीजल, एक लीटर की लागत ₹62: चालू हुआ प्लांट

केंद्र सरकार की योजना पीएमईजीपी के तहत 25 लाख रुपए लोन लेकर ये फैक्टरी खोली गई है। इस प्रोसेस का पेटेंट ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी के नाम पर है।

इको-फ्रेंडली क्रिसमस मनाओ, धरती बचाओ | Ajeet Bharti speaks for #EcoFriendlyChristmas

पेड़ काटना, जीवों की निर्मम हत्या, भोजन की बर्बादी, प्लास्टिक का इस्तेमाल, अत्यधिक आतिशबाज़ी, लाइट पॉलुशन, पेपर की बर्बादी...

मोदी सरकार ने प्लास्टिक कचरे से सड़क बना बचाए ₹3000000000, डबल करने का है इरादा: जानिए कैसे हुआ मुमकिन

2016 में मोदी सरकार ने इस पहल की आधिकारिक तौर पर घोषणा की थी। इसके बाद से प्लास्टिक कचरे से 11 राज्यों में करीब 1 लाख किमी लंबी सड़कों का निर्माण हो चुका है।

छठ में प्लास्टिक और पटाखों से बचें: पूजा कमिटियों के लिए केजरीवाल सरकार ने जारी की एडवाइजरी

छठ पूजा के मौके पर दिल्ली सरकार द्वारा पर्व के मनाए जाने के लिए सजाए गए 1,108 घाटों पर त्यौहार को प्लास्टिक और पटाखों से दूर रखने की सलाह दी गई है। घाटों पर तैनात नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों और सरकारी अधिकारियों की ज़िम्मेदारी होगी कि वे इन घाटों पर प्लास्टिक के उत्पादों के प्रयोग और आतिशबाजी को हतोत्साहित करें।

दफ्तर में इस्तेमाल हो रहा था प्लास्टिक कप, कलेक्टर ने खुद पर ही लगाया ₹5000 का जुर्माना

दफ्तर में नियम का उल्लंघन होता देख खुद पर 5000 रुपए का जुर्माना लगाने वाले आस्तिक कुमार पांडे पिछले साल विभाग की दीवारों और कोनों में फैली गंदगी को खुद साफ करने के कारण भी चर्चा में आए थे। इस दौरान पान और गुटखे की पीक से रंगी दीवारों को साफ़ करती हुई उनकी तस्वीरें...

मंदी का डर पर्यावरण पर हावी: प्लास्टिक पाबंदी से पीछे हटी मोदी सरकार

मीडिया रिपोर्टों में इस फैसले से मंदी गहराने की आशंकता जताई गई थी। सरकार ने बताया है कि 11 सितंबर को मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल रोकने के लिए नहीं, बल्कि जागरूकता बढ़ाने और जनांदोलन के ज़रिए इसका इस्तेमाल बंद करने का है।

मनमोहन सिंह की नीति से बढ़ी बीमारी: हर साल मरती हैं 1000 गायें, आज भी सॅंभले तो 1000 साल में खत्म होगा मर्ज

यह मर्जी का मसला नहीं है। न ही प्रधानमंत्री की अपील या सख्त नियम-कायदों का होना जरूरी है। यह मसला आपकी जिंदगी, आने वाली पीढ़ियों की जिंदगी से जुड़ा। इसलिए, खुद से ही संभलिए। देर हुई तो न हम बचेंगे न पर्यावरण।

जल-संकट, प्लास्टिक जैसी कई समस्याएँ हल हो गईं होतीं, अगर हम अपना देसी ज्ञान सहेज पाते

इस तकनीक से दो से तीन दिन तक पौधों को पानी मिलता रहता है। इस्तेमाल करने के बाद फेंक दी जाने वाली बोतलों का इस तरह से दोबारा इस्तेमाल भी होता है।

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