आँखों के सामने पति को खो देने के एहसास ने दिल और दिमाग पर जो गहरा असर छोड़ा होगा वो संध्या के लिए किसी सदमें से कम तो बिल्कुल नहीं होगा। वहीं दूसरी तरफ़ आशीष की माँ की निगाहें बेटे की घर वापसी की आस लगाए बैठी थीं, जो अब कुछ बोलने की स्थिति में नहीं। एक माँ का इस क़दर चुप हो जाना उनके अपार दु:ख को प्रकट करने के लिए काफ़ी है।
3 जून 2019 को दोपहर को गायब हुए वायुसेना के मालवाहक विमान एंटोनोव-32 (AN-32) का मलबा नज़र आया है। मलबा अरुणाचल प्रदेश के पायम इलाके के पास देखा गया है। लेकिन विमान में सवार चालक दल के 8 लोग और 5 सवार यात्री अभी भी लापता हैं और उनकी तलाश जारी है।
भारतीय वायु सेना का मालवाहक विमान एंटोनोव (एएन)-32 लापता हो गया है। तीन घंटे से इसका कोई पता नहीं चल रहा है। यह विमान असम के जोरहाट सैन्य हवाई अड्डे से अरुणाचल प्रदेश के चीनी सीमा के पास स्थित मेचुका घाटी के एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड के लिए निकला था। विमान में चालक दल के...
IAF के लिए यह देश की पहली ऑल-वुमन क्रू है। फ्लाइट लेफ्टिनेंट भारद्वाज एमआई-17 V5 उड़ाने वाली पहिला महिला पायलट भी हैं। फ्लाइंग ऑफिसर निधि झारखंड से भारतीय वायु सेना की पहली महिला पायलट हैं। चंडीगढ़ की फ्लाइट लेफ्टिनेंट जायसवाल भारतीय वायु सेना की पहली महिला फ्लाइट इंजीनियर हैं।
जनरल रावत ने कहा कि सेना लगातार यह प्रयास कर रही है कि आतंकियों तक पहुँचने वाले वित्तीय संसाधनों पर रोक लगाया जाए और इस कार्य में एनआईए से लेकर प्रवर्तन निदेशालय तक भी जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि बालाकोट एयर स्ट्राइक इसीलिए की गई ताकि सीमा पार भारत के ख़िलाफ़ कदम उठाने वाले आतंकी बचे ही नहीं।
मिसाइल की शुरुआत से ही वायु सेना इसके विकास के हर कदम पर इसमें शामिल रही है। उसके इंजीनियरों ने मिसाइल का सॉफ्टवेयर भी बनाया था। HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) ने मिसाइल के इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल हिस्सों पर काम किया था।
पाकिस्तानी वायुसेना के हमले को नाकाम करने के वक्त विंग कमांडर अभिनंदन 51वीं स्क्वॉड्रन में तैनात थे और अभिनंदन ने F-16 को मार गिराया था। इसलिए इनकी यूनिट को फाल्कन स्लेयर्स यानी फाल्कन का वध करने वाली स्क्वॉड्रन नाम दिया गया है।
बता दें कि 15 चिनूक और 22 अपाचे हेलिकॉप्टर के लिए भारत और अमेरिकी सरकार के बीच 3 बिलियन डॉलर में समझौता हुआ था। डील के तहत अमेरिका को इन सभी हेलीकॉप्टर्स की डिलीवरी तीन से चार साल के भीतर करनी थी।