Homeरिपोर्टराष्ट्रीय सुरक्षाब्रह्मोस का सुखोई MKI-30 से सफल परीक्षण, दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों को निर्यात की...

ब्रह्मोस का सुखोई MKI-30 से सफल परीक्षण, दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों को निर्यात की तैयारी

मिसाइल की डिजाइनिंग और विकास भारत-रूस के संयुक्त तत्वाधान में बनी कंपनी ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (BAPL) ने किया है। दक्षिणपूर्वी एशिया के देशों को यह मिसाइल निर्यात किए जाने में केंद्र सरकार और उन देशों के बीच सहमति बनने की देर है।

रक्षा मंत्रालय द्वारा आज शाम जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वायु सेना ने ब्रह्मोस मिसाइल के हवाई संस्करण का आज सफल परीक्षण किया है। सुखोई एमकेआई-30 से दागी गई यह मिसाइल विज्ञप्ति के मुताबिक जमीन पर स्थित अपने निर्धारित लक्ष्य को भेदने में सफल रही। मिसाइल की डिजाइनिंग और विकास भारत-रूस के संयुक्त तत्वाधान में बनी कंपनी ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (BAPL) ने किया है। परीक्षण में नौसेना ने भी फायरिंग रेंज को खाली रखते हुए सहयोग किया।

पिछले साल अपनी श्रेणी की पहली बनी थी वायु सेना

पिछले ही साल भारतीय वायु सेना ने 2.5 टन की इस सुपरसोनिक (आवाज़ की गति से तेज चलने वाली) मिसाइल को 2.8 मैक (ध्वनि के अनुपात में गति नापने की इकाई) से हवा से पानी की सतह पर टेस्ट फायर किया गया था। 22 नवंबर, 2017 को ऐसा कर, ऐसी हवा से सतह पर हमला करने में सक्षम क्रूज़ मिसाइल से ऐसी क्षमता पाने वाली पहली वायु सेना बनी थी।

मिसाइल की शुरुआत से ही वायु सेना इसके विकास के हर कदम पर इसमें शामिल रही है। उसके इंजीनियरों ने मिसाइल का सॉफ्टवेयर भी बनाया था। HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) ने मिसाइल के इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल हिस्सों पर काम किया था

दूसरे देश भी दिखा रहे रुचि  

BAPL के मुख्य मानव संसाधन महाप्रबंधक (चीफ जनरल मैनेजर, एचआर) कमोडोर एसके अय्यर ने पिछले हफ्ते यह जानकारी मीडिया को दी थी कि इस मिसाइल को खरीदने में कई दक्षिणपूर्वी एशियाई और खाड़ी देशों ने रुचि दिखाई है। उन्होंने यह जानकारी IMDEX 2019 प्रदर्शनी में भागीदारी के दौरान दी। उन्होंने बताया कि दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों को यह मिसाइल निर्यात किए जाने में केंद्र सरकार और उन देशों के बीच सहमति बनने की देर है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

सोनम वांगचुक ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग से बनाई दूरी, CJP में फूट के बाद क्या अब आंदोलन की उलटी गिनती हो...

शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की माँग पर छात्र आंदोलन बंटता हुआ दिख रहा है। जहाँ सोनम वांगचुक ने इसे अपनी शर्तों में तरजीह नहीं दी है वहीँ सीजेपी की यह पहली शर्त है।

रवीश कुमार तुम ही पत्रकारों की पिटाई के जिम्मेदार हो, खुद ‘गोदी’ में बैठ करते रहे पत्रकारिता… अब चला रहे ‘गोदी मीडिया’ वाला प्रोपेगेंडा

रवीश कुमार की मौकापरस्ती सिर्फ एक व्यक्ति का पतन नहीं है, बल्कि यह उस विचार का पतन है जो खुद को 'पत्रकार' कहकर जनता को गुमराह करता रहा है।
- विज्ञापन -