1974 में तुर्की की सेना ने साइप्रस पर हमला किया था और द्वीपीय देश के 36% भू-भाग पर कब्ज़ा कर लिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइप्रस की स्वतन्त्रता, सम्प्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करते हुए तुर्की को दबाव में डाल दिया।
"क्या पाकिस्तान यह स्वीकार करेगा कि वो दुनिया की एकमात्र सरकार है, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित सूची में सूचीबद्ध अल-क़ायदा और दाएश के आतंकियों को पेंशन प्रदान करता है? पाकिस्तान वो देश है, जहाँ अल्पसंख्यक समुदाय 1947 में 23% से घटकर अब 3% तक रह गया है।"
भारत द्वारा अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव चरम सीमा पर है। पाकिस्तानी सेना ने भी सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशें तेज़ कर दीं हैं।
इन “Coalition partners” की खोजबीन में सबसे पहला कनेक्शन जो निकल कर सामने आता है, वह है दुनिया के सबसे क्रूर, जिहादी, मानवाधिकार के भक्षक देशों में से एक पाकिस्तान का है। कुछ मामलों में तो यह कनेक्शन भी भी सेना की गोद में बैठे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी PTI से सीधा-सीधा निकलता है।
"वे क्या करना चाहते हैं, यह उनकी इच्छा है। हमने उन्हें आतंक को मुख्यधारा बनाते देखा है। अब वे नफ़रत की भाषा को मुख्यधारा में इस्तेमाल करना चाहते हैं। यह उनकी इच्छा है, अगर वे यही करना चाहते हैं। ज़हरीले शब्द अधिक समय तक नहीं चलते।"
UNHRC ने पर्याप्त संख्या (16) में सदस्यों का समर्थन प्राप्त न कर पाने के चलते पाकिस्तान की जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन का प्रस्ताव लाने की कोशिशों को ख़ारिज कर दिया है। हिंदुस्तान की यह बड़ी कूटनीतिक जीत है।
मुस्लिम देशों ने प्रधानमंत्री इमरान खान से कहा है कि कश्मीर मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए वह अपने भारतीय समकक्ष के खिलाफ अपनी भाषा में तल्खी को कम करें।
सुरक्षा परिषद के बाद अब मानवाधिकार परिषद में भी पाकिस्तान की किरकिरी हुई है। भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव विजय ठाकुर ने कहा कि दुनिया ख़ूब समझती है कि जो देश आतंकवाद का मुख्य केंद्र है, वह ग़लत नैरेटिव फैलाता रहता है।
पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में जम्मू कश्मीर का मसला उठाया है। भारत द्वारा इस सम्बन्ध में उसे उसी मंच पर जवाब दिया जाएगा। पाकिस्तान इस मामले में यूएनएचआरसी की अर्जेन्ट बैठक बुलाना चाहता है। लेकिन......
हक्कानी ने कहा कि भारत या भारतीयों की खिल्ली उड़ाने, उन्हें गालियाँ देने, उनका अपमान करने या फिर उन्हें बदनाम करने की जगह पर पाकिस्तानियों को अपने देश के बारे में सोचना चाहिए। वे अभी वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्यूट में कार्यरत हैं।