ये बात भी गौर करने वाली है कि कॉन्ग्रेस का लाया ये एक्ट सिर्फ कर्नाटक के साथ साथ हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना जैसे कॉन्ग्रेस शासित राज्यों तक भी पहुँच सकता है।
रोहिणी का कहना है कि शुरुआत में उन्होंने सोचा कि इस मामले को अधिक तूल न दिया जाए क्योंकि उनके मन में दलित एकता की बात थी, लेकिन फिर बोलने के अलावा कोई और चारा न रहा।