टीपूडा ने कई सारे कार्टून्स को सही (राजनीतिक रूप से) किया है, खासकर सतीश आचार्य द्वारा बनाए गए कार्टून्स। उन्होंने इन कार्टून्स को सही करते हुए बताया है कि कैसे ये ओरिजिनल कार्टून्स पक्षपाती हैं और सिर्फ एक ही पक्ष को दिखाते हैं।
मियाँ मोहम्मद अकरम उस्मान ने इस पोस्टर में मुहम्मद अली जिन्ना और पकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तस्वीर लगाई है। इसके साथ ही, पोस्टर में भारत के झंडे तिरंगा को भी दिखाया गया है, जिस पर 'क्रॉस' का निशान लगाया गया है।
"जिस वाकये के बारे में आप बात कर रही हो, वो साल 2011 का है। 9 साल पहले का - जब केंद्र और असम दोनों में कॉन्ग्रेस सरकार थी। मगर उस समय आप चुप रहीं। अब अपना पॉलिटिकल प्रोपेगेंडा साधने के लिए बच्चे की मौत से जुड़े मामले को 9 साल बाद इस्तेमाल कर..."
इस तस्वीर को देख इस्लामिक कट्टरपंथी शमी पर टूट पड़े। कहा कि इसके कारण भारत के मुस्लिम धीरे-धीरे हिंदू बन रहे हैं। कट्टरपंथियों ने उनको अपने नाम में से मोहम्मद हटाने की सलाह भी दी।
आम दुनिया से अलग एक मेन्टोस दुनिया भी है, जिसे कहते हैं दी लल्लनटॉप! यह दुनिया बजट के दौरान इस बात को लेकर परेशान थी कि आखिर प्रियंका चोपड़ा की ड्रेस खिसकती क्यों नहीं? वैसे, बजट-वजट बाद में देखा जाएगा, पहले NDTV चाहता है कि आप सपना चौधरी का डांस देखें।
अरविंद केजरीवाल के इस ट्वीट के बाद यूजर्स अलग-अलग मौक़ो पर उनके दिए बयानों का उल्लेख करते हुए कहने लगे कि अब चुनाव नजदीक होने के कारण ढोंग न करें। क्योंकि केजरीवाल ही वो शख्स है जो कल तक नरेंद्र मोदी को देशद्रोही, आतंकवादी कह रहे थे।
हंसल अपनी कुंठा निकालते हुए विवेक के लिए लिखते हैं, "बदकिस्तमकी से ट्विटर तुम जैसे घृणा फैलाने वालों की जगह बन गया है। मैं सच में उम्मीद करता हूँ कि तुम इस्लाम में परिवर्तित हो जाओ, ताकि तुम्हें समझ आए कि इस मजहब के लोग किसकी लड़ाई लड़ रहे है।"
कुणाल कामरा ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक स्क्रीनशॉट ट्वीट करते हुए लिखा है- "मुझे अर्णब का नंबर मिला, मैं अभी भी उन्हें डिबेट करने के लिए पूछ रहा हूँ लेकिन वो जवाब नहीं दे रहे हैं।" इसी ट्वीट में रिपब्लिक न्यूज़ चैनल को टैग करते हुए कामरा ने लिखा है क्या उनके एडिटर कायर हैं या राष्ट्रवादी?
खुद को कनेरिया की गेंदबाजी का प्रशंसक बताने वाली यह महिला है आमना गुल। उसने ट्वीट कर ने कनेरिया से कहा, "आप प्लीज इस्लाम कबूल कर लीजिए। इस्लाम सोना है। इस्लाम के बगैर कुछ भी नहीं है। आप की जिंदगी मौत की तरह है। आप इस्लाम कबूल कर लीजिए।"
"ये सब अल्लाह कर रहे हैं। कुदरती रूप से सारा सामान सुबह एक जगह पर रखा मिलता है और हम सिर्फ़ उसे उठाकर बाँटने का काम करते हैं। हम अल्लाह के बंदे हैं। हमें इंसान ने पैदा नहीं किया।"