विषय: हिन्दूफोबिया

धर्मगुरू श्री प्रकाश

रूस में कट्टरपंथियों के निशाने पर हिन्दू आश्रम, PM मोदी से मदद की आस

धर्मगुरू श्री प्रकाश के अनुसार, उनके आश्रम और उनके घर को खोजकर उनके पास फ़र्ज़ी पत्रकारों को भेजा गया। उनके आश्रम में विरोधी लोग अनुयायी की शक्ल में आते, फ़र्ज़ी पत्रकार आश्रम और उनकी तस्वीरें लेते, वीडियो रिकॉर्डिंग करते और इस तरह आश्रम और धर्मगुरू के बारे में ग़लत प्रचार करते।
ये कैसा दमा?

प्रियंका चोपड़ा का अस्थमा सिगरेट से नहीं, केवल दिवाली से उभरता है?

पिछले साल दिवाली के पहले प्रियंका चोपड़ा का वीडियो आया था- जिसमें वह जानवरों, प्रदूषण, और अपने दमे का हवाला देकर लोगों से दिवाली नहीं मनाने की अपील की थी। लेकिन इस 'मार्मिक' अपील के एक महीने के भीतर उनकी शादी में पटाखों का इस्तेमाल जमकर हुआ।
हिन्दू आस्था के प्रतीक 'जय श्री राम' को यूँ ही नहीं किया जा रहा बदनाम

8 घटनाएँ जहाँ मुसलमानों का ‘हमसे जय श्री राम बुलवाया’ फ़र्ज़ी निकला, कारण क्या हैं?

लिबरल गैंग के पास हिन्दुओं के खिलाफ बोलने के लिए और कोई आधार नहीं बचा है। बम धमाके न सही, 'ज़बरदस्ती जय श्री राम बुलवाया जा रहा है' ही सही! बंदूक लेकर कथित हिन्दू आतंकवादी सड़कों पर भले नहीं उतर रहे, लेकिन लोगों को बीफ़ करी खाने भी तो नहीं मिल रही!
पायल रोहतगी

पायल रोहतगी को ब्लॉक करने पर FoE वाले ‘निष्पक्ष पत्रकार’ कर रहे हैं मुंबई पुलिस का समर्थन

पायल ने लिखा है कि शायद यही वजह है कि उनका परिवार उन्हें हिन्दुओं के बारे में बात करने से रोकता है। साथ ही, पायल रोहतगी ने मुंबई पुलिस पर पक्षपात पूर्ण रवैया अपनाने का भी आरोप लगाते हुए लिखा कि इसी कारण से वो हिन्दू होने के नाते इस देश में असुरक्षित महसूस करती हैं।
हिन्दूफ़ोबिया मीडिया

‘जय श्री राम’ कत्ल का नारा! हिन्दूफ़ोबिया से ग्रसित सिर्फ BBC नहीं, Western Media की लम्बी फेहरिस्त

1. हिंदू अपराध करे तो पूरा हिंदुस्तान 'लिंचिस्तान', Pak मुसलमानों का पाप ढकने के लिए उन्हें 'एशियन' बताना 2. खुले में शौच के लिए हिन्दू धर्म शास्त्र ज़िम्मेदार 3. हिंदुओं पर स्टोरी के लिए मानव-माँस खाते अघोरियों को दिखाना - हिन्दूफ़ोबिया से ग्रसित अंतरराष्ट्रीय मीडिया को समझने के लिए ये तो बस कुछ उदाहरण हैं। इनके कारनामों की लिस्ट बहुत लंबी है।
ध्वनि प्रदूषण के बहाने सबरीमाला की तीर्थयात्रा खत्म करने की साज़िश

असली दिक्कत ‘ध्वनि प्रदूषण’ नहीं, हिन्दू भक्त हैं: मंदिर ‘इकोसिस्टम’ ध्वस्त करने की साज़िश

'ज़िंदा कौमें पाँच साल इंतज़ार नहीं करतीं" अगर हिन्दू आत्मसात कर लें, अपना उद्धार खुद, और आज से ही, अपने जीते-जी करने की कमर कस लें तो बड़ी कृपा होगी।
अमेरिकी बेसबॉल लीग में शामिल होने की प्रैक्टिस करते कुछ नवयुवक

जब स्वघोषित लिबरलों के फ़र्ज़ी नैरेटिव ने हत्याएँ करवाई, मंदिर तुड़वाए, दंगे भड़काए

अगर शिकार मुस्लिम या दलित है, तो अपराधी के नाम में पहचान ढूँढी जाती है। मुसलमान ने मुसलमान को मारा, तो ये मुन्नी बेगम की ग़ज़लें गाने लगते हैं। दलित ने दलित को मारा, तो ये भारतीय नारी किस-किस से, कितनी बार, और कब-कब सेक्स करे, इस चर्चा में लीन हो जाते हैं।
नुसरत जहां

सांसद नुसरत जहाँ के सिंदूर, मेंहदी, वंदे मातरम पर इस्लामिक चिरकुट नाराज, दी गंदी गालियाँ

नुसरत जहाँ के खिलाफ सोशल मीडिया पर लगातार आपत्तिजनक व्यंग्य और टिप्पणियाँ की जा रही हैं। उन्हें हिन्दू से शादी करने के लिए भद्दी गालियों के साथ ही जन्नत में जगह ना मिलने तक की दुआएँ की जा रही हैं।
अपमानजनक पोस्टर

SFI ने केरल के कॉलेज में भगवान अयप्पा के अपमानजनक पोस्टर लगाए

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता केरल में मुफ़्त में नहीं आती और सत्ता पक्ष हिंदुओं के ख़िलाफ़ अपना पक्ष रखने के लिए जाना जाता है। हाल ही में, कम्युनिस्ट सरकार ने बलात्कार के आरोपी बिशप फ्रैंको का मजाक बनाने के लिए एक कार्टूनिस्ट को पुरस्कार देने के अपने फ़ैसले को पलट दिया था क्योंकि इससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची थी।
अपना घर पहले व्यवस्थित करो, ट्रम्प

अमेरिका वालो! भारत के अल्पसंख्यकों पर ज्ञान मत दो, पहले अपना ‘फोबिया’ ठीक करो

दूसरे देशों की सम्प्रभुता में हस्तक्षेप की नीति और कुछ नहीं, साम्राज्यवाद ही है। अमेरिका हिंदुस्तान के मुसलमानों की चिंता छोड़ कर अपनी खुजली का इलाज करे।
हिन्दू धर्म और प्रतीकों का अपमान फैशन है क्योंकि कोई कुछ कहता नहीं

Netflix पर आई है ‘लैला’, निशाने पर हैं हिन्दू जिन्हें दिखाया गया है तालिबान की तरह

वो पीढ़ी जिसने जब से होश संभाला है, या राजनैतिक रूप से जागरुक हुए हैं, उन्होंने भारत का इतिहास भी ढंग से नहीं पढ़ा, उनके लिए ऐसे सीरिज़ ही अंतिम सत्य हो जाते हैं। उनके लिए यह विश्वास करना आसान हो जाता है कि अगर इस्लामी आतंक है तो हिन्दू टेरर क्यों नहीं हो सकता।
'लैला'

लैला: 2047 के काल्पनिक भारत के नाम पर डर, नफ़रत, अराजकता और हिंदुत्व विरोधी तानाबाना

इनके हर झूठ को बेनकाब कीजिए, इन्हें पढ़िए, तर्कों से घेरिए, इनसे सवाल पर सवाल कीजिए, इनके हर नैरेटिव की लंका लगा दीजिए। इनसे पूछिए कि क्यों ऐसे स्टोरी-टेलर और पूँजीपति हलाला, तलाक या आतंकवाद या समुदाय विशेष पर खुलकर कुछ नहीं कह पा रहे, कुछ बना नहीं पा रहे?

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