"आज ताहिर हुसैन सिर्फ इस बात की सजा काट रहा है कि वो एक मुस्लिम है। शायद आज हिंदुस्तान में सबसे बड़ा गुनाह मुस्लिम होना है। ये भी हो सकता है कि आने वाले वक्त में ये साबित कर दिया जाए कि दिल्ली की हिंसा ताहिर हुसैन ने कराई है।"
कट्टरपंथियों के घर के ऊपर युद्ध लड़ने के मकसद से पेट्रोल बम, एसिड, पत्थर और आग लगाने का सामान इकट्ठा दिख रहा है, और फिर भी आपको बताया जा रहा है कि ये 'हिन्दुओं द्वारा मुस्लिमों के सफाए की साजिश है', 'ये मुस्लिमों का पोगरोम है', 'ये मुस्लिमों का नरसंहार है'।
दिलबर नेगी की उम्र महज 20 साल थी। दंगाइयों ने हाथ-पैर काट उन्हें जिंदा जला दिया था। मुस्लिम भीड़ की दरिंदगी को छिपाने के लिए प्रोपेगेंडा पोर्टल वायर ने लिखा है कि नेगी की मौत 'जलने के कारण हुए घाव से हुई'। न इस मामले में गिरफ्तार शाहनवाज का जिक्र है न नेगी के साथ हुई क्रूरता का।
ताहिर हुसैन की हिंदू विरोधी दंगों में संलिप्तता को लेकर कई सबूत सामने आए हैं। अपना नाम सामने आने के बाद से वह फरार था। गुरुवार को उसे दिल्ली पुलिस ने धर दबोचा था। उस पर आईबी के अंकित शर्मा की हत्या का आरोप है।
"अगर मैं दिल्ली दंगों में जाऊँगी तो मेरी पहचान हिन्दू बताई जाएगी... क्योंकि मैं हिन्दू हूँ, तो शायद दिल्ली पुलिस मेरे ऊपर शायद उस हक़ से लाठी नहीं मारेगी, जिस बर्बरता और हक़ से उसने एक मुस्लिम पर लाठी चलाई है।"
कंटेनर और बोरियों में भरकर क्या भेजा जाता था, यह अभी स्पष्ट नहीं है। चश्मदीदों ने शाहीन बाग के अलावा यूपी के संभल भी लोग और सामान भेजे जाने की बात कही है। ताहिर का घर दंगों का हेडक्वार्टर बनकर उभरा है।
दिल्ली और यूपी पुलिस की संयुक्त बैठक के बाद राजधानी से सटे इलाकों से भी दंगाइयों के आने की बात सामने आई है। कॉन्स्टेबल रतनलाल के हत्यारों की पहचान भी हो चुकी है। पुलिस पर हमला सोची-समझी साजिश के तहत किया गया था।
राह चलते किसी को पकड़ लो। उससे कुछ बुलवा दो। फिर उसे TV पर दिखाओ... और किसी को बदनाम कर दो। जब हंगामा हो तो सोशल मीडिया पर चुपके से एक ट्वीट डाल दो। - यह NDTV का फॉर्मूला है। दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में कपिल मिश्रा को बदनाम करने के लिए भी यही तरीका अपनाया NDTV ने, लेकिन दाँव उल्टा पड़ गया - बहुत गाली पड़ रही है।
करीब 40 पुलिसकर्मियों ने गुरुवार सुबह 9 बजे से ही कोर्ट में घेराबंदी कर रखी थी। कोई छोले-कुलचे वाले के पास ग्राहक बनकर खड़ा था तो कोई पार्किंग अटेंडेंट बनकर। कोई चायवाला बना था तो कोई मुंशी। कई पुलिसवाले वकील बने भी घूम रहे थे।
NDTV का रिपोर्टर, कैमरा और माइक - सामने खड़ा संजय गुप्ता नाम का एक आदमी। इस आदमी के अनुसार कपिल मिश्रा के 'भड़काऊ' भाषण के बाद हिंसा भड़की। लेकिन असली खबर इसके बाद है। NDTV इस आदमी को कपिल मिश्रा का मकान मालिक बताता है, जबकि सच्चाई यह है कि संजय नाम को कोई भी शख्स कपिल मिश्रा का कभी भी मकान मालिक नहीं रहा।