“जब दिल्ली में मेरी सरकार बनेगी तो 11 फरवरी के बाद एक महीने में मेरी लोकसभा में जितनी भी मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी हैं, उनमें से एक मस्जिद भी नहीं छोड़ूँगा। सारी मस्जिद हटा दूँगा।”
भाजपा के कार्यकर्ताओं ने त्रिची के सरकारी अस्पताल के बाहर हत्या के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन करते हुए आरोपितों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की। हालाँकि, पुलिस के आश्वासन पर आंदोलनकारियों ने विरोध-प्रदर्शन वापस ले लिया।
"ये विरोध CAA का विरोध नहीं है, ये नरेन्द्र मोदी जी का विरोध है। हमने बार-बार बताया कि नागरिकता संशोधन विधेयक किसी की नागरिकता नहीं छिनता। इस देश का हर मुस्लिम नागरिक इज्जत के साथ इस देश में रहता है और रहेगा।"
“पश्चिम बंगाल सरकार हमेशा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रुख का समर्थन करती है, न कि भारतीय प्रधानमंत्री का। यह ताजा उदाहरण है। हम KMC मेयर के इस्तीफे और एक निष्पक्ष एजेंसी द्वारा जाँच की माँग करते हैं। साथ ही मुख्यमंत्री को भी इस मुद्दे पर बयान देना चाहिए।”
छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने मीसा पेंशन को यह कहते हुए बंद कर दिया कि ये स्वतंत्रता सेनानी हैं, तो फिर पेंशन क्यों दिया जाए, जिसे लेकर बीजेपी ने राज्य सरकार के फैसले के ख़िलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
कर्नाटक की भाजपा सांसद ने ट्वीट कर दावा किया था कि केरल कश्मीर में तब्दील होता जा रहा है। उन्होंने एक तस्वीर शेयर करते हुए कहा कि CAA का समर्थन करने के कारण कुट्टीपुरम के हिंदुओं को पानी देने से इनकार कर दिया गया।
इतने बडे़ पैमाने पर उग्रवादियों का आत्मसमर्पण करना राज्य पुलिस के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। इससे लंबे समय से उग्रवाद की मार झेल रहे राज्स में शांति की उम्मीद जगी है। हथियार डालने वाले उग्रवादियों को पुलिस में जगह दी जाएगी।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई तरह की सियासी हलचल शुरू हो गई है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने बाला साहब की जयंती पर पार्टी के पहले अधिवेशन में पार्टी का भगवा झंडा लॉन्च कर दिया है। इतना ही नहीं राज ठाकरे ने अपने बेटे अमित ठाकरे को सक्रीय राजनीति में उतार दिया है। इस दौरन समर्थक जय शिवाजी, जय भवानी के नारे लगाते हुए जोश में दिखाई दिए।
प्रोफेसर सोमेन ने कहा था, “आप वास्तव में सावरकर नहीं हैं, आपके अंदर उनके कोई गुण मोजूद नहीं हैं। सच तो यह है कि आप एक सच्चे गाँधी ही नहीं हैं…।” इसके विरोध में NSUI के प्रदर्शन के बाद यूनिवर्सिटी ने उन्हें अवकाश पर जाने का आदेश दिया था।
अबरार अहमद वही सपा नेता हैं, जिन्होंने अपनी ही पार्टी की जिला पंचायत अध्यक्षा को सेक्स रैकेट चलाने वाली बताया था। उनका कहना था कि उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्षा को सपा में शामिल कराकर बड़ी भूल की।