पाकिस्तान सोशल मीडिया पर 2016 और 2018 में दुर्घटनाग्रस्त हुए विमानों की तस्वीरें दिखा कर दावे कर रहा है कि पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के 2 विमान मार गिराए और 2 भारतीय सैनिकों को बंदी बनाया जा चुका है।
क्या पाकिस्तान अब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने अपने आतंकियों की परेड करवाएगा ताकि वह भारत के दावों को नकार सके? क्या वह 350 आतंकियों को UN के सामने ले जाकर कहेगा- 'लो देखो, हमारे सारे आतंकी अभी भी ज़िंदा हैं। भारत झूठ बोल रहा।'
पुंछ और नौशेरा सेक्टर में भारतीय सीमा में पाकिस्तानी विमान घुसे और उन्होंने भागते समय हड़बड़ाहट में बम गिराए, जिसमें किसी भी भारतीय के हताहत होने की सूचना नहीं है।
भारतीय विमान पाकिस्तान के रडार सिस्टम से बच निकलने में सफल रहे क्योंकि भारतीय वायुसेना ने इस सुनियोजित और प्रोफेशनल ऑपरेशन के दौरान चुनिंदा रूट्स का इस्तेमाल करने के साथ-साथ अत्याधुनिक जैमिंग तकनीक का प्रयोग किया था।
हमारे देश के आम नागरिकों पर 2004 से 2014 के बीच कई बार हमले हुए मगर तब राजनैतिक इच्छाशक्ति ऐसी थी ही नहीं कि नागरिकों को बचाने का सशस्त्र बलों को कोई आदेश दिया जाता। अब हालात बदल गए हैं।
एक तरफ पीएम इमरान खान की आपात बैठक के बाद वहाँ की फौज और विदेश मंत्री की तरफ से बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं, तो दूसरी तरफ LOC पर पाकिस्तानी फौज ने अकारण गोलीबारी शुरू कर दी है।
डॉक्टर मनमोहन सिंह ने तत्कालीन वायुसेना प्रमुख को सीमा पार आतंकियों पर 'एयर स्ट्राइक' करने से रोक दिया था क्योंकि उन्हें युद्ध का डर था। नेहरू भी सेना पर भरोसा नहीं करते थे। अब भारत जवाब देता है क्योंकि अब सरकार के पास मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति है।
मंगलवार की सुबह देशवासियों को सबसे पहली यही खबर मिली कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के घर में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के अड्डे पर ‘एयर स्ट्राइक’ से 1000 किलो बमबारी कर तहस-नहस कर दिया, जिसमें 300 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए।
जहाँ पाक सेना ने 'कुछ भी नहीं हुआ, भारतीय वायु सेना के जहाज जल्दी भाग गए' बोलकर अपनी इमेज बचाई, वहीं पाकिस्तानी नागरिकों ने अपनी सरकार और आर्मी की जमकर क्लास लगाई।