धर्मांतरण विरोधी अधिनियम के तहत कार्रवाई न करने के लिए सरकार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से जुमे की नमाज़ के बाद एक बड़ा मजहबी जुलूस की साजिश। NCPCR ने दमोह पुलिस को आगाह किया।
एक छात्रा ने ये भी बताया कि हर शुक्रवार (जुमा) को स्कूल में नमाज पढ़ना अनिवार्य था। हिंदी-अंग्रेजी से ज्यादा उर्दू-अरबी सिखाया जाता था। प्रार्थना में दुआ पढ़ने को कहा जाता था।
प्रिंसिपल कायस्थ परिवार की है, लेकिन अब वो 'खान' लगाती है। इसी तरह 2 अन्य शिक्षिकाएँ भी 'यादव' और 'जैन' की जगह 'खान' बन गईं। स्कूल में धर्मांतरण का खेल।