अलीगढ़ में बच्ची के साथ ये दरिंदे कितनी बर्बरता से पेश आए इसका विधिवत वर्णन शुरूआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी है। फिर किस मुँह से अनुराग उस जघन्यता पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं?
स्व-घोषित फ़ैक्ट-चेकर वेबसाइट AltNews के सह-संस्थापक, जिसने हाल ही में अलीगढ़ में तीन साल की टीना (बदला हुआ नाम) की हत्या और संभावित बलात्कार के एक प्रमुख आरोपित असलम के अपराधों पर पर्दा डाला था, उसने ऑपइंडिया की रिपोर्ट को ख़ारिज और बदनाम करने का काम किया।
"सूरत अग्निकांड में मृत छात्रा पंचानी के पिता द्वारा न सिर्फ 4 लाख रुपए की मुआवजा राशि लेने से इनकार बल्कि अपनी तरफ से 4 लाख रुपए अग्निशमन विभाग को देने की पेशकश।" - यह वो झूठ है जिसे एशियन एज और डेक्कन क्रॉनिकल जैसे मीडिया हाउस ने बढ़ाया।
सोशल मीडिया पर भी अरस्तू और सुकरात के बाद जन्मे कुछ 'महान विचारकों' ने जमकर इस घटना पर सत्संग और 'अच्छा महसूस होने वाला' साहित्य लिखा, लेकिन मुबंई पुलिस ने इस खबर की सच्चाई उजागर कर दी।
आज सुबह ही अमित शाह को गृह मंत्री बनाए जाने की सूचना मिलते ही सोशल मीडिया यूज़र्स ने अरविन्द केजरीवाल के 21 दिन पुराने उस ट्वीट को ढूँढ निकाला और अमित शाह की जगह एक बार फिर सारी अटेंशन अरविन्द केजरीवाल ले गए।
रुबिका को इस्लाम की सीख देने वालों से भी ऊपर कुछ ऐसे नाम हैं जिनके ट्विटर हैंडल से पता चलता है कि राहुल गाँधी उनके प्रधानमंत्री हैं। महिला सशक्तिकरण को एक जुमला बनाने वाली इस पार्टी के समर्थक रुबिका लियाकत को गैंगरेप की धमकी देते हुए देखे जा सकते हैं।
एक आतंकवादी संगठन के सरगना को अलगाववादी नेता कहना न केवल भ्रम फैलाने जैसा है, बल्कि आतंकवादियों द्वारा मानवता पर किए गए क्रूर अत्याचारों पर पर्दा डालने के भी समान है, जो किसी अपराध से कम नहीं।
सोशल मीडिया पर आम लोगों द्वारा बरनौल के चित्र भेजे जा रहे हैं। इन चित्रों में बरनौल को ट्रक में भर कर भेजा जा रहा है, तो किसी चित्र में विमान से बरनौल बरसाए जा रहे हैं। आए इस गैलरी में उनमें से चुनिन्दा चित्रों को देखते हैं।
योजना ही नहीं, देश भी पहले से ही था, तो क्या काम ही न किया जाए? क्या योजना बना देने से ही काम हो जाता है? या फिर पुरानी योजना पर नए तरीके से काम करना और समाज को लाभ पहुँचाना कोई अपराध है? योजना का नाम ही नहीं, उसके क्रियान्वयन को भी मोदी सरकार ने पूरी तरह से बदला।