Thursday, May 23, 2024

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भाजपा विरोधी हिंसा

6 BJP समर्थकों की हत्या: यह आँकड़ा सिर्फ लोकसभा नतीजों के बाद, फिर भी भाजपा ही फासिस्ट!

भाजपा की जीत के बाद सबसे ज्यादा जिसे डर के, संभल के रहने की जरूरत है वह न मुस्लिम है न दलित, और न ही महिला- वह भाजपा का ही समर्थक वर्ग है।

पश्चिम बंगाल में एक और BJP कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या, छानबीन शुरू

इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल है। सुरक्षाबलों को भारी संख्या में वहाँ तैनात कर दिया गया है। घटना के बाद से पुलिस छानबीन में जुट गई है।

ये जनादेश श्रद्धांजलि है बंगाल के दर्जनों भाजपा कार्यकर्ताओं के बलिदान पर

कुछ दुखद घटनाओं का स्मरण करें तो कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर में भाजपा कार्यकर्ता अपूर्बा चक्रवर्ती को तृणमूल के गुंडों ने बेरहमी से पीटा था।

रायबरेली में भाजपा कार्यकर्ता की लाठी डंडों से पीट-पीटकर हत्या

शिव सिंह पर यह हमला कॉन्ग्रेस MLA अदिति सिंह के काफिले पर हरचन्दपुर एरिया, लखनऊ-रायबरेली हाइवे पर हुए हमले के कुछ देर बाद हुआ। हालाँकि, पुलिस विभाग का कहना है कि शिव सिंह पर हुए इस हमले का कॉन्ग्रेस MLA पर हुए हमले से कोई सम्बन्ध नहीं है।

TMC सांसद प्रसून बनर्जी और सुरक्षा बलों के बीच हाथापाई, मतदान केंद्र से किए गए बाहर

पश्चिम बंगाल अपनी हिंसक गतिविधियों को लेकर शुरुआती दौर से ही चर्चा में रहा है। बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को लेकर तो वहाँ आए दिन विवादों की ख़बरें सामने आती रहती हैं। कभी चुनाव अधिकारी के ग़ायब होने की ख़बर आती है, तो कभी बीजेपी कार्यकर्ताओं पर बम बरसाने की ख़बर का ख़ुलासा होता है।

भाजपा के खिलाफ़ हिंसा बदस्तूर जारी, भाजपा नेता के दफ्तर पर हमला, मीडिया खामोश

यह पिछले 8 दिनों में भाजपा पर हिंसक हमले की सातवीं घटना है, पर मीडिया पूरी तरह ‘मौन-संहिता’ का पालन कर रहा है।

7 दिन, 6 हमले, 5 हत्याएँ: संघी ही ‘फासिस्ट’, और संघी ही असुरक्षित

मुख्यधारा की मीडिया ने हमेशा की तरह मौन व्रत ले रखा है। किसी-किसी मामले में बोलना पड़ भी रहा है तो एक-एक शब्द इतनी कंजूसी से निकल रहा है कि मानों शोक जताने पर भी आचार संहिता लगी हुई है। न अब कहीं असहिष्णुता फ़ैल रही है, न ही प्राइम-टाइम डिबेट चल रहा है।

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