गडकरी का यह बयान शिवसेना विधायक दल में बगावत की खबरों के बीच आया है। हालॉंकि शिवसेना का कहना है कि एनसीपी और कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर सरकार चलाने के लिए उसने कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है।
कॉन्ग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड को प्रोपेगेंडा किए बगैर चैन नहीं पड़ रहा। उसने खबर यह फैलाई कि सुबह की अज़ान और डेसीबल स्तर के बारे में आया फैसला लागू नहीं किया गया, अतः महिलाओं के सबरीमाला में प्रवेश से संबंधित फैसला भी लागू नहीं होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक स्पीकर रमेश कुमार के उस आदेश को जायज़ ठहराया है, जिसमें इन 17 विधायकों को निलंबित करने का आदेश दिया गया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी विधायकों के आगामी उप-चुनाव लड़ने के लिए योग्य करार देकर उन्हें राहत प्रदान की है।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि अगर किसी भी दल के पास सरकार बनाने के लिए ज़रूरी संख्या है तो उसे सीधे राज्यपाल से संपर्क करना चाहिए, राज्यपाल ने किसी भी दल को सरकार बनाने से मना नहीं किया है।
आम चुनावों के बाद अमेठी में भाजपा नेता सुरेंद्र सिंह की हत्या कर दी गई थी। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के करीबी रहे सुरेंद्र सिंह को रात के करीब तीन बजे गोली मारी गई थी। इस मामले में पुलिस ने वसीम को गिरफ्तार किया था।
कृषि राज्य मंत्री के साथ सांसद हनुमान बेनीवाल भी थे। कहा जा रहा है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के निशाने पर बेनीवाल ही थे। उन्होंने हाल ही में राज्य के राजस्व मंत्री हरीश चौधरी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।
आडवाणी के मरने की दुआ कर रहा और खुशियाँ मनाने की बात करने वाला यह आदमी तय करता है कि फेसबुक पर कौन सी ख़बरें जाएँगी और कौन सी नहीं। अंदाजा लगाइए नकारात्मकता भरने के लिए ये कैसी ख़बरें आप तक पहुँचाता होगा।
शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने याद दिलाया कि कैसे शिवसेना ने भाजपा के 'बुरे दिनों' में भी उसका साथ दिया था। उद्धव ने स्पष्ट किया कि भाजपा उनके पास रोज नए ऑफर लेकर आ रही है और अभी भी गठजोड़ की उम्मीद है।
"विदा होती सरकार के बुझे हुए जुगनू रोज नए मजाक करके महाराष्ट्र को कठिनाई में डाल रहे हैं। राष्ट्रपति संविधान की सर्वोच्च संस्था हैं। वे व्यक्ति नहीं बल्कि देश हैं। देश किसी की जेब में नहीं है।"
राज्यपाल ने एनसीपी को भी सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया क्योंकि वो राज्य में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। कॉन्ग्रेस द्वारा शिवसेना को समर्थन के सम्बन्ध में रुख स्पष्ट न किए जाने के कारण शिवसेना के नेतृत्व में सरकार का गठन नहीं हो सका।