विधायक फराज फातमी ने न केवल पार्टी के स्टैंड का विरोध किया है, बल्कि नीतीश कुमार को राज्य का सबसे बड़ा चेहरा भी बताया है। उन्होंने कहा, "बिहार में नीतीश कुमार से बड़ा कोई चेहरा नहीं है। 2020 में भी वही सरकार बनाएँगे।"
आम आदमी पार्टी के छात्र विंग के नेता कासिम उस्मानी ने स्थानीय लोगों को भड़काया। जामिया के छात्र ने ऑपइंडिया को दिए इंटरव्यू में किए कई बड़े खुलासे। उपद्रवी मुस्लिम छात्रों ने कुलपति के दफ्तर के ऊपर ही फिलिस्तीन का झंडा लगा दिया और इजरायल का झंडा जला डाला।
खलीफा ने खुलासा किया है कि राम मंदिर पर फैसला आते ही पीएफआई सक्रिय हो गया था। पीएफआई के लोग घर-घर जाकर मुस्लिमों को उकसा रहे थे। इसी कड़ी में 20 दिसम्बर को जुमे की नमाज के बाद पुलिस पर हमले की साज़िश रची गई थी।
कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर जब भी कोई बयान देते हैं या फिर कोई अजीबोगरीब हरकतें करते हैं, उसका फ़ायदा भाजपा को ही मिलता है। शायद यही कारण है कि पार्टी उन्हें एकांतवास में रखती है। लेकिन वो अचानक से बीच-बीच में निकल आते हैं और अपनी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा देते हैं।
"आपने अमित शाह को सलाह दी कि वो अपने नाम से 'शाह' उपनाम हटा लें। आपने कहा कि ये फ़ारसी शब्द है। आपने ये भी कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गठन मुस्लिमों पर हमला करने के लिए किया गया। आपने वीर सावरकर को देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराया।"
शाहरुख़ ख़ान से भी वामपंथी लगातार अपील करते रहे हैं कि वो सरकार के ख़िलाफ़ बोलें लेकिन तीनों ख़ान ने इस सम्बन्ध में अब तक कोई बयान नहीं दिया है। अब स्थिति ये है कि शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों ने शाहरुख़ ख़ान को निशाना बनाया है। उन्होंने नाराज़गी जताई है।
नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन को लेकर प्रोग्राम किया गया और उसमें स्कूल के छात्रों को ले जाया गया तो NDTV के पत्रकार सोहित राकेश मिश्रा ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्कूल में छात्रों को नागरिकता कानून के बारे में बताना राजनीति है, क्योंकि इसे अभी तक बड़े लोग नहीं समझ सके हैं।
शाहीन बाग़ में हो रहे विरोध प्रदर्शन के नाम पर लोग अंडे व बिरयानी खा रहे हैं। वहाँ पिकनिक मनाए जाने व लोहड़ी का नाच-गान करने की ख़बरें भी आईं। कई रास्तों के बंद होने से लोगों को दफ्तर आने-जाने में कई घंटे ज्यादा लग रहे हैं। बच्चों को भी स्कूल जाने में परेशानी हो रही है।
पत्रकार देसाई ने दावा किया कि पूरे स्टेडियम में काले रंग को प्रतिबंधित कर दिया गया है। यहाँ तक कि काले रंग की टीशर्ट या टोपी पहने लोगों को भी अंदर घुसने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि काला रंग 'विरोध का प्रतीक' है, इसीलिए ऐसा किया जा रहा है।
जज कामिनी लाऊ ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ़ रावण के फेसबुक पोस्ट में कुछ भी ग़लत नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर जामा मस्जिद पाकिस्तान में है, फिर भी वहाँ जाकर प्रदर्शन किया जा सकता है क्योंकि वो भी भारत का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि विरोध करना संवैधानिक अधिकार है।