राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए इस रिपोर्ट का नाम दिया गया है- “उत्तर प्रदेश में आए पाकिस्तान, अफगानिस्तान एवं बांग्लादेश के शरणार्थियों की आपबीती कहानी” - इस रिपोर्ट में शरणार्थियों की निजी कहानियाँ और अनुभव भी समाहित हैं।
दिल्ली में होने वाली विपक्ष की बैठक में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के बाद अब मायावती की बहुजन समाज पार्टी, अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और शिवसेना ने भी शामिल होने से इनकार कर दिया है।
“आज CAA लागू हो गया । मोदी को बोलो पहले अपने कागज, अपनी डिग्री इन “entire political science” दिखाए, और अपने बाप का और ख़ानदान का birth सर्टिफ़िकेट दिखाए सारे हिंदुस्तान को। फिर हमसे माँगे। #f**k CAA”
इस समय सोशल मीडिया पर कई सौ या शायद हजारों की तादाद में ऐसे सबूत वायरल हो रहे हैं जो राणा अयूब की फर्जी दावों को झूठा साबित करते हैं। बताते हैं कि सड़कों पर उतरी कट्टरपंथियों की भीड़ न शांतिपूर्ण है और न ही उसका मकसद पाक है।
यूपी में सीएए के विरोध में हुई हिंसा में पीएफआई की संलिप्तता सामने आई है। इस कट्टरपंथी संगठन के संबंध आतंकियों से बताए जा रहे हैं। इस पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजा गया है। बावजूद बंगाल में उसे प्रदर्शन की इजाजत किसने दी?
"सैल्यूट है मेरठ के सिटी एसपी अखिलेश नारायण सिंह को, पाकिस्तान ज़िंदाबाद और भारत मुर्दाबाद के नारे लगा रहे उपद्रवियों को करारा जवाब देने के लिए। अब कुछ तथाकथित प्रबुद्धों को अफ़सोस है कि भारत मुर्दाबाद और पाकिस्तान ज़िंदाबाद बोलने वाले गद्दारों को पाकिस्तान जाने को क्यों कहा।"
मायावती ने कहा है कि उन्होंने सबसे पहले सीएए को विभाजनकारी और असंवैधानिक बताकर इसका विरोध किया था। बावजूद इसके विधायक परिहार ने CAA का समर्थन किया। पहले भी उन्हें कई बार पार्टी लाइन पर चलने की चेतावनी दी गई थी।
एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया कि वीडियो 20 दिसंबर का है। उन्होंने कहा कि इसको अब वायरल किया जाना बताता है कि कुछ लोग साजिश रच रहे हैं ताकि हालात सामान्य न हो सके।
वायरल हुए इस वीडियो के पीछे के प्रोपेगेंडा को समझना है तो इसे किन हस्तियों द्वारा कैसे शेयर किया गया, ये देखें। इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने लिखा, "ओह यस- उनके कपड़ों को देखकर आप बता सकते हैं कि वो कौन हैं।"
यह डिटेंशन सेंटर उन लोगों के लिए आवास के रूप में होगा जिन्होंने अवैध रूप से देश में प्रवेश किया और इनमें वे विदेशी भी शामिल हैं जिनके वीज़ा और पासपोर्ट की समय-सीमा समाप्त हो गई थी। विदेशी मूल के अंडर-ट्रायल क़ैदियों और जो लोग यहाँ जेल की अवधि पूरी कर चुके हैं और निर्वासन की प्रतीक्षा कर रहे हैं.....