Tuesday, December 1, 2020
Home विचार राजनैतिक मुद्दे विभाजन और पाकिस्तान में अल्पसंख्यक: कॉन्ग्रेस के लिए नेहरू और इतिहास से सीखने का...

विभाजन और पाकिस्तान में अल्पसंख्यक: कॉन्ग्रेस के लिए नेहरू और इतिहास से सीखने का वक्त

देश के पहले लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस का चुनावी घोषणा-पत्र खुद जवाहरलाल नेहरू ने तैयार किया था। इसे कॉन्ग्रेस कार्यसमिति ने बैंगलोर में 13 जुलाई, 1951 को पारित किया। इस घोषणा-पत्र में कॉन्ग्रेस ने बताया कि साल 1951-52 में विस्थापितों के पुनर्वास और राहत के लिए 140 करोड़ रुपए खर्च किए जाएँगे।

मोहम्मद अली जिन्ना ने 1929 में 14 मॉंगों का एक ज्ञापन तैयार किया था। इसका मकसद एक अलग इस्लामिक देश का गठन करना था। इसका प्रारूप हद से ज्यादा कट्टर और इस्लाम को छोड़कर अन्य धर्मों की भावनाओं को आहत करने वाला था। इसके कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार थे;

  • मुस्लिमों को गौ हत्या की छूट होगी
  • जहॉं मुस्लिम बहुसंख्यक होंगे परिसीमन नहीं होगा
  • वंदेमातरम समाप्त करना होगा
  • तिरंगे में बदलाव किया जाना चाहिए
  • मुस्लिम लीग के झंडे को तिरंगे के बराबर दर्जा मिले

ऑल इंडिया मुस्लिम लीग अपनी इन सांप्रदायिक मॉंगों पर अड़ गई और भारत का विभाजन धर्म के आधार पर कर दिया गया। हालाँकि, ब्रिटिश संसद ने भारत की जमीनों का बॅंटवारा तो कर दिया लेकिन आधिकारिक तौर पर नहीं बताया गया कि किस धर्म के व्यक्ति को कहॉं रहना है? इंडिया इंडिपेंडेंस एक्ट, 1947 की पहली धारा के अनुसार 15 अगस्त 1947 को दो डोमिनियन का गठन किया गया। एक राष्ट्र भारत था, तो दूसरा नया देश पाकिस्तान बनाया गया।

‘मिशन विद माउंटबेटन’ पुस्तक के लेखक एलन कैंपबेल-जोहानसन विभाजन पर लिखते है, “21 सितम्बर, 1947 की सुबह गवर्नर-जनरल के डकोटा हवाई जहाज से माउंटबेटन, इस्में, वेरनों, एलन कैंपबेल-जोहानसन (लेखक), नेहरू, पटेल, नियोगी, राजकुमारी अमृत कौर, जनरल लॉकहार्ट, एचएम पटेल, और वी शंकर ने पूर्वी एवं पश्चिमी पंजाब के दौरा किया।” उन्होंने रावी नदी के आसपास के इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करते हुए बताया कि यह लिखित इतिहास का सबसे बड़ा विस्थापन है।

एक अन्य पुस्तक ‘द लास्ट डेज ऑफ़ द ब्रिटिश राज’ में लियोनार्ड मोसेली लिखते है, “अगस्त 1947 से अगले नौ महीनों में 1 करोड़ 40 लाख लोगों की विस्थापन हुआ। इस दौरान करीब 6,00,000 लोगों की हत्या कर दी गई। बच्चों को पैरों से उठाकर उनके सिर दिवार से फोड़ दिए गए, बच्चियों का बलात्कार किया गया, बलात्कार कर लड़कियों के स्तन काट दिए गए और गर्भवती महिलाओं के आतंरिक अंगों को बाहर निकाल दिया गया।” इन घटनाओं को देखते हुए सरदार पटेल ने प्रधानमंत्री नेहरू को 2 सितम्बर 1947 को पत्र लिखा, “सुबह से शाम तक मेरा पूरा समय पश्चिम पाकिस्तान से आने वाले हिन्दू और सिखों के दुख और अत्याचारों की कहानियों में बीत जाता है।”

हालाँकि, 20 जुलाई 1947 को यह नियम बना दिया गया था कि दोनों देशों द्वारा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की जाएगी। भारत के गवर्नर-जनरल माउंटबेटन ने इसकी सार्वजानिक घोषणा भी कर दी थी। बावजूद इसके, पाकिस्तान ने इसे नजरंदाज किया और वहां हिन्दुओं और सिखों का नरसंहार जारी रहा। पंजाब के गवर्नर जनरल फ्रांसिस मुडी ने जिन्ना को 5 सितंबर 1947 को पत्र लिखा, “मुझे नहीं पता कि सिख सीमा कैसे पार करेंगे। महत्वपूर्ण यह है कि हमें जल्द से जल्द उनसे छुटकारा पाना होगा।”

पाकिस्तान के सिंध प्रान्त से भी हिन्दुओं पर हमले की ख़बरें लगातार मिल रही थी। प्रधानमंत्री नेहरू ने 8 जनवरी 1948 को बीजी खेर को एक टेलीग्राम भेजा, “स्थितियों को देखते हुए (सिंध में गैर-मुस्लिमों की हत्या और लूट-पाट हो रही थी), सिंध से हिन्दू और सिख लोगों को निकालना होगा।” अगले दिन प्रधानमंत्री ने खेर को एक पत्र भी लिखा, “सिंध में हालात ख़राब है और मुझे डर है कि हमें भारी संख्या में निष्क्रमण देखना होगा। हम उन्हें सिंध में नहीं छोड़ सकते।” पाकिस्तान में हिन्दुओं के नरसंहार को लेकर प्रधानमंत्री परेशान थे और उन्होंने सरदार पटेल को भी वहॉं की स्थितियॉं बताने के लिए 12 जनवरी 1948 को एक पत्र लिखा। सरदार ने पहले ही उनकी सुरक्षा और पुनर्वास के प्रयास शुरू कर दिए थे। उनका स्पष्ट मत था कि पाकिस्तान में हिन्दुओं और सिखों का रुकना संभव नहीं है।

पाकिस्तान से आने वाले हिन्दुओं और सिखों का भारत में पुनर्वास एक जटिल कार्य था। प्रधानमंत्री नेहरू ने 15 नवंबर 1950 को संसद में यह स्वीकार किया था कि किसी अन्य देश को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा, जैसी विस्थापन की समस्या भारत के सामने थी। देश के पहले लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस का चुनावी घोषणा-पत्र खुद जवाहरलाल नेहरू ने तैयार किया था। इसे कॉन्ग्रेस कार्यसमिति ने बैंगलोर में 13 जुलाई, 1951 को पारित किया। इसमें नेहरू लिखते है, “पिछले चार सालों की सबसे बड़ी समस्या पाकिस्तान से आने वाले विस्थापितों का पुनर्वास है। जिसपर तात्कालिक और लगातार ध्यान देने की जरूरत है।” इस घोषणा-पत्र में कॉन्ग्रेस ने बताया कि साल 1951-52 में विस्थापितों के पुनर्वास और राहत के लिए 140 करोड़ रुपए खर्च किए जाएँगे। इसमें उनके लिए दुकानें और औद्योगिक क्षेत्र के अलावा 86,000 नए घर बनवाना भी शामिल था।

पाकिस्तानी गैर-मुस्लिमों को देशभर में बसाना भारत सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल था। फिर भी, वहाँ बहुत बड़ी संख्या में गैर-मुस्लिम रह गए थे, जिनका बाद में भी विस्थापन जारी रहा। पहली लोकसभा में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य सीपी गिडवानी ने 6 दिसंबर, 1952 को बताया, “हमारा सिन्धी का एक अखबार है जो बम्बई से निकलता है। उसने लिखा है कि परसों एक जहाज कराची से आया, उसमें 23 हिन्दू आए। उसमें से एक ने बयान दिया है कि एक हिन्दू किसी गाँव में जा रहा था, उसका क़त्ल करके उसकी लाश को एक बोरी के अन्दर डाल दिया गया। इसलिए विवश होकर हमें यहाँ आना पड़ा।”

भारत सरकार ने लोकसभा में 1959 में एक ब्यौरा दिया। इसके अनुसार राजस्थान, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, मणिपुर, मध्य प्रदेश, बिहार, असम और अंडमान निकोबार में पाकिस्तानी गैर-मुस्लिमों को बसाया गया था। तीसरी पंचवर्षीय योजना में इस पुनर्वास कार्यक्रम का पूरा विवरण दिया गया था। इसमें बताया गया है कि पाकिस्तान से 89 लाख धार्मिक प्रताड़ित गैर-मुस्लिम भारत आए, जिसमें से 47 लाख पश्चिम पाकिस्तान और शेष पूर्वी पाकिस्तान से थे। साल 1947-48 और 1960-61 के बीच कुल 239 करोड़ रुपए इन विस्थापितों के पुनर्वास के लिए तय किए गए थे। इसमें से 133 करोड़ पश्चिम पाकिस्तान और 106 करोड़ पूर्वी पाकिस्तान के लिए आवंटित किए गए थे। पहली पंचवर्षीय योजना से पहले 70.87 करोड़, पहली पंचवर्षीय योजना में 97.55 करोड़ और दूसरी पंचवर्षीय योजना में 70.32 करोड़ रुपए की राशि खर्च की गई। यही नहीं, इस दौरान सरकार ने 33,000 परिवारों को अस्थायी तंबुओं से निकालकर जमीनें वितरित की थी। लगभग 1,10,000 लोगों को व्यावसायिक और तकनीकी शिक्षा भी दी गई थी।

आज कॉन्ग्रेस नागरिकता (संशोधन) कानून का विरोध कर रही है। इसका कोई आधार नहीं है। वास्तव में उनके नेताओं को अपने इतिहास को जानने और समझने की जरूरत है। उस दौर में प्रधानमंत्री नेहरू के केंद्रीय मंत्रिमंडल में राहत और पुनर्वास के लिए एक अलग से मंत्रालय भी बनाया गया था। इसका कभी किसी ने विरोध नहीं किया और विश्व के सबसे बड़े विस्थापन को नियमित किया गया था। वर्तमान भारत सरकार ने इसी प्रक्रिया का सरलीकरण किया है।

नागरिकता (संशोधन) कानून की आवश्यकता क्यों?

मरीचझापी में जिन 7000 शरणार्थियों का संहार हुआ वे भी दलित थे, जय भीम-जय मीम का नया छलावा है ‘रावण’

‘अगर पाकिस्तान के मुस्लिम भारत आकर रहेंगे, तो विभाजन का क्या मतलब, पूरे को हिन्दुस्तान घोषित कर दो’

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Searched termsभारत विभाजन, पाकिस्तान गैर मुस्लिम, मुस्लिम लीग जिन्ना, पाकिस्तान में हिंदू और सिखों का कत्ल, पाकिस्तानी शरणार्थी, शरणाथी नेहरू, नेहरू पटेल के पत्र, कांग्रेस नागरिकता कानून, नागरिकता संशोधन कानून, नागरिकता संशोधन कानून शिवसेना, CAA शिवसेना, CAB शिवसेना, नागरिकता संशोधन कानून क्या है, नागरिकता संशोधन कानून 2019, नागरिकता हिंसा, जामिया प्रोटेस्ट, जामिया हिंसा, भारत विरोधी नारे, citizenship amendment bill, CAA, कौन बन सकता है भारतीय नागरिक, कैसे जाती है नागरिकता, कैसे खत्म होती है भारतीय नागरिकता, विपक्ष का हंगामा, नागरिकता बिल, नागरिकता बिल मीडिया, नागरिकता बिल सेक्युलर, अमित शाह न्यूज़, नागरिकता बिल अमित शाह
Devesh Khandelwal
Devesh Khandelwal is an alumnus of Indian Institute of Mass Communication. He has worked with various think-tanks such as Dr. Syama Prasad Mookerjee Research Foundation, Research & Development Foundation for Integral Humanism and Jammu-Kashmir Study Centre.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

हैदराबाद निगम चुनाव में हिंदू वोट कट रहे, वोटर कार्ड हैं, लेकिन मतदाता सूची से नाम गायब: मीडिया रिपोर्ट

वीडियो में एक और शख्स ने दावा किया कि हिंदू वोट कट रहे हैं। पिछले साल 60,000 हिंदू वोट कटे थे। रिपोर्टर प्रदीप भंडारी ने एक लिस्ट दिखाते हुए दावा किया कि इन पर जितने भी नाम हैं, सभी हिंदू हैं।

किसान आंदोलन में ‘रावण’ और ‘बिलकिस बानो’, पर क्यों? अजीत भारती का वीडियो । Ajeet Bharti on Farmers Protest

फिलहाल जो नयापन है, उसमें 4-5 कैरेक्टर की एंट्री है। जिसमें से एक भीम आर्मी का चंद्रशेखर ‘रावण’ है, दूसरी बिलकिस बानो है, जो तथाकथित शाहीन बाग की ‘दादी’ के रूप में चर्चा में आई थी।

वर्तमान नागालैंड की सुंदरता के पीछे छिपा है रक्त-रंजित इतिहास: नागालैंड डे पर जानिए वह गुमनाम गाथा

1826 से 1865 तक के 40 वर्षों में अंग्रेज़ी सेनाओं ने नागाओं पर कई तरीकों से हमले किए, लेकिन हर बार उन्हें उन मुट्ठी भर योद्धाओं के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा।

अंतरधार्मिक विवाह को प्रोत्साहन देने वाला अधिकारी हटाया गया, CM रावत ने कहा- कठोरता से करेंगे कार्रवाई

उत्तराखंड सरकार ने टिहरी गढ़वाल में समाज कल्याण विभाग द्वारा अंतरधार्मिक विवाह को प्रोत्साहन का आदेश जारी करने वाले समाज कल्याण अधिकारी को पद से हटाने का आदेश जारी किया है।

BARC के रॉ डेटा के बिना ही ‘कुछ खास’ को बचाने के लिए जाँच करती रही मुंबई पुलिस: ED ने किए गंभीर खुलासे

जब दो BARC अधिकारियों को तलब किया गया, एक उनके सतर्कता विभाग से और दूसरा IT विभाग से, दोनों ने यह बताया कि मुंबई पुलिस ने BARC से कोई भी रॉ (raw) डेटा नहीं लिया था।

भीम-मीम पहुँच गए किसान आंदोलन में… चंद्रशेखर ‘रावण’ और शाहीन बाग की बिलकिस दादी का भी समर्थन

केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए कृषि सुधार कानूनों को लेकर जारी किसानों के 'विरोध प्रदर्शन' में धीरे-धीरे वह सभी लोग साथ आ रहे, जो...

प्रचलित ख़बरें

मेरे घर में चल रहा देश विरोधी काम, बेटी ने लिए ₹3 करोड़: अब्बा ने खोली शेहला रशीद की पोलपट्टी, कहा- मुझे भी दे...

शेहला रशीद के खिलाफ उनके पिता अब्दुल रशीद शोरा ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बेटी के बैंक खातों की जाँच की माँग की है।

‘दिल्ली और जालंधर किसके साथ गई थी?’ – सवाल सुनते ही लाइव शो से भागी शेहला रशीद, कहा – ‘मेरा अब्बा लालची है’

'ABP न्यूज़' पर शेहला रशीद अपने पिता अब्दुल शोरा के आरोपों पर सफाई देने आईं, लेकिन कठिन सवालों का जवाब देने के बजाए फोन रख कर भाग खड़ी हुईं।

13 साल की बच्ची, 65 साल का इमाम: मस्जिद में मजहबी शिक्षा की क्लास, किताब के बहाने टॉयलेट में रेप

13 साल की बच्ची मजहबी क्लास में हिस्सा लेने मस्जिद गई थी, जब इमाम ने उसके साथ टॉयलेट में रेप किया।

‘हिंदू लड़की को गर्भवती करने से 10 बार मदीना जाने का सवाब मिलता है’: कुणाल बन ताहिर ने की शादी, फिर लात मार गर्भ...

“मुझे तुमसे शादी नहीं करनी थी। मेरा मजहब लव जिहाद में विश्वास रखता है, शादी में नहीं। एक हिंदू को गर्भवती करने से हमें दस बार मदीना शरीफ जाने का सवाब मिलता है।”

दिवंगत वाजिद खान की पत्नी ने अंतर-धार्मिक विवाह की अपनी पीड़ा पर लिखा पोस्ट, कहा- धर्मांतरण विरोधी कानून का राष्ट्रीयकरण होना चाहिए

कमलरुख ने खुलासा किया कि कैसे इस्लाम में परिवर्तित होने के उनके प्रतिरोध ने उनके और उनके दिवंगत पति के बीच की खाई को बढ़ा दिया।

‘बीवी सेक्स से मना नहीं कर सकती’: इस्लाम में वैवाहिक रेप और यौन गुलामी जायज, मौलवी शब्बीर का Video वायरल

सोशल मीडिया में कनाडा के इमाम शब्बीर अली का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें इस्लाम का हवाला देते हुए वह वैवाहिक रेप को सही ठहराते हुए देखा जा सकता है।

हैदराबाद निगम चुनाव में हिंदू वोट कट रहे, वोटर कार्ड हैं, लेकिन मतदाता सूची से नाम गायब: मीडिया रिपोर्ट

वीडियो में एक और शख्स ने दावा किया कि हिंदू वोट कट रहे हैं। पिछले साल 60,000 हिंदू वोट कटे थे। रिपोर्टर प्रदीप भंडारी ने एक लिस्ट दिखाते हुए दावा किया कि इन पर जितने भी नाम हैं, सभी हिंदू हैं।
00:27:53

किसान आंदोलन में ‘रावण’ और ‘बिलकिस बानो’, पर क्यों? अजीत भारती का वीडियो । Ajeet Bharti on Farmers Protest

फिलहाल जो नयापन है, उसमें 4-5 कैरेक्टर की एंट्री है। जिसमें से एक भीम आर्मी का चंद्रशेखर ‘रावण’ है, दूसरी बिलकिस बानो है, जो तथाकथित शाहीन बाग की ‘दादी’ के रूप में चर्चा में आई थी।

कामरा के बाद वैसी ही ‘टुच्ची’ हरकत के लिए रचिता तनेजा के खिलाफ अवमानना मामले में कार्यवाही की अटॉर्नी जनरल ने दी सहमति

sanitarypanels ने एक कार्टून बनाया। जिसमें लिखा था, “तू जानता नहीं मेरा बाप कौन है।” इसमें बीच में अर्णब गोस्वामी को, एक तरफ सुप्रीम कोर्ट और दूसरी तरफ बीजेपी को दिखाया गया है।

वर्तमान नागालैंड की सुंदरता के पीछे छिपा है रक्त-रंजित इतिहास: नागालैंड डे पर जानिए वह गुमनाम गाथा

1826 से 1865 तक के 40 वर्षों में अंग्रेज़ी सेनाओं ने नागाओं पर कई तरीकों से हमले किए, लेकिन हर बार उन्हें उन मुट्ठी भर योद्धाओं के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा।

LAC पर काँपी चीनी सेना, भारतीय जवानों के आगे हालत खराब, पीएलए रोज कर रहा बदलाव: रिपोर्ट

मई माह में हुए दोनों देशों के बीच तनातनी के बाद चीन ने कड़ाके के ठंड में भी एलएसी सीमा पर भारी मात्रा में सैनिकों की तैनाती कर रखा है। लेकिन इस कड़ाके की ठंड के आगे चीनी सेना ने घुटने टेक दिए हैं।

अंतरधार्मिक विवाह को प्रोत्साहन देने वाला अधिकारी हटाया गया, CM रावत ने कहा- कठोरता से करेंगे कार्रवाई

उत्तराखंड सरकार ने टिहरी गढ़वाल में समाज कल्याण विभाग द्वारा अंतरधार्मिक विवाह को प्रोत्साहन का आदेश जारी करने वाले समाज कल्याण अधिकारी को पद से हटाने का आदेश जारी किया है।

दिल्ली में आंदोलन के बीच महाराष्ट्र के किसानों ने नए कृषि कानूनों की मदद से ₹10 करोड़ कमाए: जानें कैसे

महाराष्ट्र में किसान उत्पादक कंपनियों (FPCs) की अम्ब्रेला संस्था MahaFPC के अनुसार, चार जिलों में FPCs ने तीन महीने पहले पारित हुए कानूनों के बाद मंडियों के बाहर व्यापार से लगभग 10 करोड़ रुपए कमाए हैं।

बाइडन-हैरिस ने ओबामा के साथ काम करने वाले माजू को बनाया टीम का खास हिस्सा, कई अन्य भारतीयों को भी अहम जिम्मेदारी

वर्गीज ने इन चुनावों में बाइडन-हैरिस के कैंपेन में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी संभाली थी और वह पूर्व उप राष्ट्रपति के वरिष्ठ सलाहकार भी रह चुके हैं।

‘किसान आंदोलन’ के बीच एक्टिव हुआ Pak, पंजाब के रास्ते आतंकी हमले के लिए चीन ने ISI को दिए ड्रोन्स’: ख़ुफ़िया रिपोर्ट

अब चीन ने पाकिस्तान को अपने ड्रोन्स मुहैया कराने शुरू कर दिए हैं, ताकि उनका इस्तेमाल कर के पंजाब के रास्ते भारत में दहशत फैलाने की सामग्री भेजी जा सके।

BARC के रॉ डेटा के बिना ही ‘कुछ खास’ को बचाने के लिए जाँच करती रही मुंबई पुलिस: ED ने किए गंभीर खुलासे

जब दो BARC अधिकारियों को तलब किया गया, एक उनके सतर्कता विभाग से और दूसरा IT विभाग से, दोनों ने यह बताया कि मुंबई पुलिस ने BARC से कोई भी रॉ (raw) डेटा नहीं लिया था।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,503FollowersFollow
359,000SubscribersSubscribe