Monday, April 6, 2020
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हिंदुओं से आजादी, हिंदुत्व की कब्र, अल्लाहू अकबर याद नहीं… राजदीप को भगवा झंडा देख लगा डर, फैलाई घृणा

राजदीप अपने चैनल में भले ही मठाधीश होंगे, सोशल मीडिया पर तो बिल्कुल नहीं। सो हुआ वही, जो होना था। इनके ट्वीट के नीचे उन तस्वीरों-वीडियो की बाढ़ आ गई, जहाँ CAA के विरोध की आड़ में दंगाई कहीं मंदिर तोड़ रहे तो कहीं पुलिस वालों को मार रहे, कहीं बस जला रहे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे लोग अब दंगाईयों का रूप ले चुके हैं। सोशल मीडिया पर वायरल होती अनेकों तस्वीरें और करोड़ों रुपयों की नष्ट हुई सार्वजनिक सम्पत्ति, इस बात का प्रमाण है। लेकिन, इतने पर भी मीडिया गिरोह के कुछ लोगों का मानना है कि सीएए के ख़िलाफ़ सड़कों पर दंगा मचा रहे लोग सही हैं और अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। जबकि उन्हें रोकने के लिए सामने खड़ी पुलिस अत्याचारी है और सरकार के इशारों पर जनता पर जुल्म ढा रही है। इसी क्रम में अपनी प्रोपेगेंडा पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले राजदीप सरदेसाई ने भी आज एक ट्वीट किया है।

दरअसल, राजदीप सरदेसाई का कहना है कि वे अभी तक जितने भी सीएए के ख़िलाफ़ हो रही रैलियों में गए हैं, उन्होंने वहाँ केवल तिरंगा और महात्मा गाँधी की तस्वीरों को ही देखा है। जबकि सीएए की समर्थन वाली रैलियों में उन्होंने तिरंगे के साथ-साथ भगवा रंग का झंडा फहरते भी देखा।

अपने ट्वीट के माध्यम से राजदीप चाहते हैं कि उनके फॉलोवर्स इस तथ्य पर गौर फरमाएँ कि कौन लोग CAA के विरोध में हैं और कौन उसके साथ? साथ ही वे चाहते हैं कि दोनों रैलियों को करने वाले लोगों के मूल उद्देश्यों को भी उनके फॉलोवर्स पहचानें।

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यहाँ गौर करने वाली बात है कि पिछले दो हफ्तों में सबसे अधिक दंगे भड़कने की खबरें शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद ही आई हैं और राजदीप का इस तरह का ट्वीट भी शुक्रवार की सुबह-सुबह ही आया है। ऐसे में दंगों के भड़कने के पीछे जुमे की नमाज के बाद का समय और ट्वीट करने के लिए शुक्रवार का दिन… क्यों चुना जाता है? क्या महज संयोग है? लेकिन राजदीप संयोग में तो यकीन नहीं ही करते होंगे!

राजदीप अपने मालिक की चैनल में भले ही मीडिया मठाधीश होंगे, सोशल मीडिया पर तो सबकी ‘औकात’ टाइमलाइन या वॉल तक ही सीमित होती है। सो हुआ वही, जो होना था। इनके ट्वीट के नीचे उन तस्वीरों की बाढ़ आ गई, जहाँ CAA के विरोध की आड़ में दंगाई कहीं मंदिर तोड़ रहे तो कहीं पुलिस वालों को मार रहे, कहीं बस जला रहे।

राजदीप के ट्विटर वॉल पर तरह-तरह की तस्वीर और वीडियो आए। लेकिन सीएए के विरोध प्रदर्शनों में न महात्मा गाँधी दिखे और न ही तिरंगा। बल्कि दिखा तो सिर्फ़ ‘फक हिंदुत्व’ के पोस्टर और ‘हिंदुत्व से आजादी’ के नारे, पुलिस को मारते दंगाई, आग में लिपटी देश की संपत्ति। इसके अतिरिक्त ऊँ के चिह्न का अपमान और नारा-ए-तकबीर की गूँज।

राजदीप को आईना दिखाने के लिए कानून का समर्थन कर रही रैलियों की भी तस्वीरें लोगों ने शेयर की। जिनमें भगवा रंग से कई गुणा ज्यादा तिरंगा फहरते दिखा। लोग राजदीप को कहने लगे कि जिन लोगों ने तिरंगे के साथ भगवा उठा रखा है, उन्होंने ऐसा इसलिए किया है क्योंकि इस देश में भगवा रंग ने ही तिरंगे का सम्मान किया है और भगवा तिरंगे का ही एक रंग है, तो क्या वो इसे उससे अलग कर सकते हैं? इसके अलावा लोग राजदीप से ये भी पूछने लगे कि हफ्ते में और भी दिन होते हैं किंतु उन्हें सिर्फ जुमे का दिन ही याद रहता है?

वहीं, कुछ लोगों ने राजदीप के प्रोपेगेंडे को ध्वस्त करते हुए उन्हें मौलाना भी बताया है और कहा है कि वे हमेशा आतंकियों का ही समर्थन करेंगे। लोगों का कहना है कि राजदीप ही ऐसे दंगाईयों के लिए जनसंपर्क का काम कर रहे हैं। क्योंकि वे दंगाई, पत्थरबाज, गोली चलाने वालों पर एक शब्द भी नहीं बोल रहे।

बता दें कि सोशल मीडिया यूजर्स राजदीप से इतना ज्यादा नाराज हो चुके हैं कि उन्हें कह रहे हैं कि राजदीप का ट्वीट देखकर उनका पूरा दिन खराब हो गया। लोगों का पूछना है कि ‘हिंदुत्व की कब्र खुदेगी’ का क्या मतलब होता है और आखिर वे महात्मा गाँधी का नाम दंगाइयों के साथ क्यों जोड़ रहे। सीएए के खिलाफ़ प्रदर्शन पर उतरे लोग जो आज कर रहे, वो महात्मा गाँधी का दिखाया रास्ता नहीं हैं। उनके नाम पर सिर्फ़ बस, कार, बाइक जलाई जा रही है। लेकिन जहाँ भगवा झंडा है, वहाँ शांति मार्च निकल रहा है।

गौरतलब है कि बीते दिनों जुमे की नमाज के बाद हुए दंगों के कारण यूपी और दिल्ली जैसे राज्यों को काफी नुकसान हुआ है। प्रदर्शनकारियों की आड़ में दंगाइयों ने पुलिस पर पेट्रोल बम तक फेंकने का काम किया और उन पर गोलियाँ भी चलाई गईं। इस कारण कई पुलिस वाले घायल हुए और कई की जान जाते-जाते बची। लेकिन इतना सब होने के बाद भी अगर राजदीप जैसा कोई पत्रकार अपना प्रोपगेंडा साधने के लिए लोगों को बरगलाए और निष्पक्ष होने के बजाए एकतरफा बातें करें, तो फिर जाहिर है कि उन्हें ऐसी लताड़ लगनी जरूरी है। ताकि उन्हें समझ आ सके कि जिस जनता को वे अपने झूठ पर विचार करने के लिए कह रहे हैं, वो जनता मूर्ख नहीं है।

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