ट्रंप ने खुलासा किया है कि सुलेमानी पर निर्दोष लोगों की मौत की सनक सवार थी। दिल्ली में हुई आतंकी घटनाओं के पीछे भी सुलेमानी का हाथ रहा है। उसने लंदन में भी आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया था।
"पूछताछ के दौरान बगदादी की बहन IS के कामकाज और उसकी खुफिया जानकारियों का खुलासा करेगी क्योंकि शक है कि रशमिया खुद भी एक आतंकी है और उसे बगदादी के साथ-साथ उसके पूरे नेटवर्क की जानकारी है। आतंकवाद के खिलाफ यह एक बड़ी सफलता है।"
बगदादी के बाद आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट की कमान अब्दुल्लाह कार्दश संभालने वाला था। लेकिन अमेरिकी फ़ौज की कार्रवाई में किए गए हमले के दौरान बगदादी के साथ वह भी मारा गया है।
IS की कैद में रहने के दौरान मुलर ने अपने परिजनों ने एक पत्र भी लिखा था, जिसमें उन्होंने लिखा था, "मैं नहीं चाहती कि मुझे छुड़ाने के लिए आप लोग कोई समझौता करें।" म्यूलर ने लिखा था, "मैं जानती हूँ कि आप चाहेंगे की मैं स्ट्रॉन्ग बनू। मैं एकदम वही कर रही हूँ।"
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद आतंकी सरगना बगदादी के मारे जाने की पुष्टि की है। इसके बावजूद पाकिस्तानी सीनेटर को इस पर यकीन नहीं हो रहा है। इसके कारण सोशल मीडिया में उनकी काफी किरकिरी हो रही है।
आइएस सरगना से सहानुभूति दिखाने वाला वाशिंगटन पोस्ट अकेला नहीं है। ब्लूमबर्ग ने भी बगदादी का महिमामंडन किया है। उसके मुताबिक, "बगदादी छोटे से गॉंव से आया ऐसा शख्स था जिसने कई बाधाओं को पार कर मुकाम हासिल किया।"
"वह एक दहशतगर्द था, जिसने हमेशा लोगों को डराने की कोशिश की। लेकिन अपनी ज़िंदगी के आख़िरी लम्हों में ख़ुद बेहद डरा और घबराया हुआ था। अमरीकी सेना ने उसका पीछा किया और मौत के मुॅंह तक पहुँचाया। वह सुरंग में गिरकर कुत्ते की मौत मरा।"
इराक के सरकारी मीडिया ने एक वीडियो
जारी किया है, इसे अमेरिकी कार्रवाई का बताया जा रहा है। एक रक्षा अधिकारी के हवाले से यह भी कहा गया है कि बगदादी ने हमले के दौरान खुद को उड़ा लिया।
ट्रम्प ने ख़ुद और अपनी पत्नी मेलेनिया की तरफ़ से लोगों को दिवाली की बधाई देते हुए कहा कि प्रकाश के इस त्यौहार को पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाएँ। ट्रम्प ने कहा कि प्रकाश की अँधकार के ऊपर जीत ही इस त्यौहार के मूल में है। उन्होंने हिन्दुओं, सिखों, जैनों और बौद्धों को शुभकामनाएँ दीं।
मोदी राष्ट्र के पिता नहीं हो सकते क्योंकि आप उनकी तुलना महात्मा गाँधी से नहीं कर सकते। यहाँ तक कि जवाहर लाल नेहरू और सरदार पटेल जैसे दिग्गजों को इस तरह का ख़िताब नहीं दिया गया।"