इस साल का आँकड़ा पिछले साल दिसंबर 2019 में एकत्र किए गए टैक्स से 12 फीसदी ज्यादा है। चालू वित्त वर्ष में यह लगातार तीसरा महीना है, जब जीएसटी कलेक्शन 1 लाख करोड़ रुपए के पार रहा है।
एक बार के लिए ऐसा लग सकता है कि कर की दर शून्य होने पर कीमतें कम होंगी, लेकिन यह सच नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जीएसटी वास्तव में एक ऐसा VAT है, जहाँ उत्पादन के प्रत्येक चरण में जोड़े गए मूल्य पर कर लगाया जाता है।
करीब 2 सालों से अवैध रूप से टैक्स वसूल कर रही थीं ये कंपनियाँ। इन कंपनियों ने 1500 करोड़ रुपए की बिक्री करने के नाम पर 150 करोड़ रुपए का इनपुट टैक्स वसूल किया है। इनमें से दो कंपनियाँ श्रीनगर की थीं, जो केवल कागजों पर थीं और उन्होंने...
"सरकार को जब जैसा मन करता है उस हिसाब से हमारे साथ व्यवहार करती है। इससे अच्छा है सरकार हमें ट्रांसजेडर घोषित कर दे। हम न इधर के रह गए हैं और न उधर के रह गए हैं। यही हमारी स्थिति बन गई है।"
वाणिज्य एवं कर विभाग के एसआईबी के अधिकारियों ने पहले कचौड़ी वाले को ढूँढा और फिर 2 दिन तक आस-पास बैठकर उसकी बिक्री का जायजा लिया। 21 जून को विभाग की टीम मुकेश की दुकान पर जाँच करने पहुँची। जाँच में व्यापारी ने खुद सालाना लाखों रुपए के टर्नओवर की बात स्वीकारी।