Saturday, April 17, 2021

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Hindi Controversy

हिन्दी केवल उत्तर भारत की नहीं: हिन्दी दिवस को हिन्दी बोलने वालों तक नहीं करें सीमित, न ही किया जाना चाहिए

हिन्दी का दायरा और महत्व केवल एक दिन तक सीमित नहीं किया जा सकता है और न ही किया जाना चाहिए। और हाँ, हिन्दी केवल उत्तर भारत की भाषा नहीं है।

भारत की भाषा संबंधी बहस में हिंदी की भूमिका: मातृभाषा के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी से लेकर अमित शाह तक का योगदान

देश की भाषाई विविधता के लिए पार्टी की प्रतिबद्धता ने पहली मुंडा भाषा, यानी संथाली को अनुसूचित भाषाओं की सूची में जोड़ा। भाजपा ने इन...

बाबा नागार्जुन पर बाल यौन शोषण और हिंदी वालों की स्थिति… न उगलते बने, न निगलते

गुनगुन थानवी नामक किसी स्त्री ने जाने-माने जनवादी कवि बाबा नागार्जुन पर बाल यौन शोषण का अभियोग मढ़ दिया है। इस पूरे मामले में हिन्दी की राजनीति करने और उसे बेच-बेच खाने वालों की “कही त मैय मारल जै…” वाली दशा हो गई है।

‘भाषाओं के परिवार में डायपर वाले बच्चे की तरह है हिंदी, इसे जबरदस्ती हमारे गले मत उतारो’

"भाषाओं के इस परिवार में सबसे छोटी भाषा हिंदी है। यह डायपर में एक छोटा बच्चा है। हमें इसका ध्यान रखना होगा। हिंदी- तमिल, संस्कृत और तेलुगु की तुलना में, यह अभी भी सबसे छोटी भाषा है। इसे जबरदस्ती हमारे गले मत उतारो।"

हिन्दीभाषियों का घमंड और कुतर्क बनाम हिन्दी से घृणा करने वाले कूढ़मगज

हिन्दीभाषियों के घमंड के दूसरे एक्सट्रीम पर वो लोग हैं जो हिन्दीभाषियों को घृणा से देखते हैं। एक बंगाली व्यक्ति ने लिखा कि हिन्दी वाले गुटखा खाने वाले हैं, गाली देने वाले हैं, भ्रूणहत्या करने वाले हैं, ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले हैं, ढोकला चुराने वाले हैं, भुजिया खाने वाले रक्तचूसक कीड़े हैं।

हिन्दी दिवस: एक भाषा ज़्यादा सीख लेने से संस्कृति कैसे बर्बाद होती है?

आप सोचिए कि हिन्दी जानने से आपकी संस्कृति कैसे प्रभावित हो रही है? अगर यह कहा जाए कि तुम तेलुगु छोड़ दो, और हिन्दी पढ़ो; तमिल में लिखे सारे निर्देश हटा दिए जाएँगे; कन्नड़ में अब नाटक या फिल्म नहीं बनेंगे; मलयालम की किताबों को जला दो... तब उसे हम कहेंगे कि 'हिन्दी थोपी जा रही है।'

‘जानता है मेरा बाप कौन है’ – यह बीमारी सिर्फ कॉन्ग्रेस में नहीं, हिंदी साहित्य के ठेकेदारों में भी

ये स्वयं को प्रधानमंत्री की अवमानना के लिए स्वतंत्र मानते हैं परन्तु अपने विरोध में उठे एक स्वर पर भी दिल्ली-सुलभ 'जानता है मेरा बाप कौन है' का फ़िकरा फ़ेंक के मारते हैं। प्रसिद्ध पिता के प्रताप से वंचित लेखक व्यंग्य ही लिखेगा और आशा करेगा कि बिना दीक्षा और समीक्षा के...

हिंदी पहले ही राष्ट्रभाषा बन चुकी है, बहुत स्कोप है: जस्टिस काटजू

हिंदी-ज्ञान अपने प्रदेश के बाहर निकल कर रोजगार की आकाँक्षा रखने वाले वर्ग की आवश्यकता है। हिंदी को 'एक प्रकार की' राष्ट्रीय भाषा का दर्जा मिल ही चुका है।

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