जनरल हुड्डा ने कहा, "जहाँ तक मेरी रिपोर्ट का सवाल है, AFSPA का उसमें कोई उल्लेख नहीं है और न ही वहाँ (कश्मीर) घाटी में आवश्यक सैनिकों की संख्या का कोई जिक्र है।"
अधिसूचना के अनुसार, हालाँकि, तिराप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों, नामसाई जिले के नामसाई तथा महादेवपुर थानों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों, लोअर दिबांग घाटी जिले के रोइंग तथा लोहित जिले के सुनपुरा में अफस्पा 6 और महीनों के लिए 30 सितंबर तक लागू रहेगा।
मेजर गोगोई के खिलाफ यह मामला जब प्रकाश में आया था तो टुकड़े-टुकड़े गिरोह के समर्थकों ने यह हवा बनानी शुरू कर दी थी कि मेजर गोगोई को कोई सजा नहीं मिलेगी क्योंकि उन्हें ‘राईट-विन्गर्स’ का समर्थन है। यह ख़बर उनके चेहरे पर सड़े अंडे की तरह है।
खुर्रम परवेज़ को किसी को अपने बेटे के ‘डर’ के लिए दोष देना ही है तो कश्मीरी दहशतगर्दों को दें। भारतीय सेना के ‘काफ़िर' वीर दशकों से अपनी जान की कुर्बानी दे कर भी शरणार्थी को अभय प्रदान करते आए हैं।
मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार फरवरी 17 से मार्च 2, 2019 के बीच भारतीय सेना की स्पेशल फ़ोर्स के जवानों ने म्यांमार में फिर से आतंकी ठिकानों पर हमला कर उन्हें ध्वस्त कर दिया। इस बार अराकान आर्मी को निशाना बनाया गया।
जावेद अख्तर ने सेना में गुजरातियों के बहाने संघ के स्वयंसेवकों पर निशाना साधा है। नरेंद्र मोदी को यह सलाह देने से पहले कि आरएसएस के स्वयंसेवकों को सेना में लिया जाए अख्तर को अपनी योग्यता जाँच लेनी चाहिए थी
कुछ साल पहले तक दूरदर्शन समाचार गिलगित बल्तिस्तान क्षेत्र के मौसम की जानकारी भी देता था लेकिन अब वह जानकारी भी नहीं मिलती। जबकि यह स्थापित सत्य है कि नियंत्रण रेखा के उस पार के लोग बड़ी उम्मीदों से भारत की ओर देख रहे हैं।
बताया जा रहा था कि जम्मू कश्मीर लाइट इन्फैंट्री यूनिट के जवान मोहम्मद यासीन को उनके घर से अगवा कर लिया गया जो कि काज़ीपोरा चाडोरा के रहने वाले हैं और 26 फरवरी से 31 मार्च तक की छुट्टियाँ बिताने के लिए घर आए हुए थे।
सिंह ने यह भी कहा, "अगली बार जब भारत कोई कार्रवाई करे तो जो विपक्षी नेता प्रश्न उठाते हैं, उन्हें हवाई जहाज के नीचे बाँध के ले जाएँ। जब बम गिराया जाएगा तो उन्हें वहीं से टारगेट दिख जाएगा। इसके बाद उनको वहीं पर उतार दें। वे लोग टारगेट की जगहों को गिन लें और वापस आ जाएं।"