पत्रकारिता छोड़कर ऑल्टन्यूज को कोचिंग संस्थान चलाने के धंधे में भी आने के बारे में सोचना चाहिए, क्योंकि सात दिनों के परिश्रम से जब इस तरह के परिणाम मिल सकते हैं तो ये लोग न्यूज एजेंसी की तर्ज पर 'समुदाय विशेष पीड़ित कोचिंग संस्थान' शुरू कर सकते हैं।
जब हर कोई कोरोना से मुक्ति के उपाय तलाश रहा है, लिब्रांडुओं का गिरोह फेक न्यूज फैलाने की अपनी जिम्मेदारियों से बाज नहीं आ रहा। उनकी धूर्तता का धागा खोलता अजीत भारती का वीडियो।
श्रमिक ट्रेनों में गृहराज्य जाने के रास्ते में 31 नवजात शिशुओं ने जन्म लिया। सबसे पहले 10 मई को सूरत से प्रयागराज जाते वक्त केतकी सिंह ने बच्चे को जन्म दिया।
प्रोपेगेंडा पोर्टल 'कारवाँ' के एक पत्रकार ने ट्विटर पर भारतीय रेलवे के कारण हुई मौत को लेकर फर्जी सूचना जारी की है। कारवाँ के लेखक ने ट्विटर पर दावा किया है कि ट्रेन में 10 यात्रियों की भूख से मौत हो गई।
रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पेज पर ‘दैनिक भास्कर’ अखबार की एक ऐसी ही भावुक किन्तु फ़ेक तस्वीर शेयर की है जिसे कि भारतीय रेलवे एकदम बेबुनियाद बताते हुए पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि ये पूरी की पूरी रिपोर्ट अर्धसत्य और गलत सूचनाओं से भरी हुई है।