Saturday, September 18, 2021

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व्यंग्य: बिहार चुनाव में टिकट न मिलने पर कन्हैया का धमाकेदार इंटरव्यू ऑपइंडिया पर

इस भावविह्वल कर देने वाले साक्षात्कार में कन्हैबा ने बताया कि उसने वामपंथ का त्याग क्यों कर दिया है।

‘उदित राज सिर्फ़ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष नहीं, बल्कि विश्व के राष्ट्रपति बन सकते हैं, वे गैलेक्सी भी सँभाल सकते हैं’

खुद को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनाने की मुहिम को उदित राज बीजेपी आईटी सेल का उपक्रम बता रहे हैं। पर डिजिटल एक्टिविस्ट ने ऑपइंडिया को इस आँधी की वजह कुछ और ही बताई।

‘इस्लाम शांति का धर्म नहीं है’: लेखक रॉबर्ट स्पेंसर की जिहाद के वैश्विक खतरे के बारे में ऑपइंडिया से बातचीत

कुरान कहता है कि आप केवल तभी शांति प्राप्त कर सकते हैं जब आप खुद को अल्लाह को सौंप देते हैं। समाज में सच्ची शांति केवल गैर-इस्लामी लोगों को इस्लाम मानने वालों को सौंपने से आती है।

‘वो नशेड़ी है, कुछ भी बोलता रहता है’ – राहुल गाँधी का वो इंटरव्यू, जिसे कॉन्ग्रेस और तरुण तेजपाल ने दबा दिया

खुलासा तो यह भी होना चाहिए कि किन कॉन्ग्रेस नेताओं ने राहुल गाँधी को नशेड़ी बताते हुए कहा था कि ये कुछ भी बोलते रहते हैं।

आरफा उकसाती रही कि कुछ हिन्दू-मुस्लिम हो जाए, मनोज वाजपेयी ने कहा, दिक्कत है तो चुनाव लड़ो

आरफा मनोज वाजपेयी का इंटरव्यू लेने गईं। इंटरव्यू में सिनेमा के अलावा सब कुछ है। और खत्म होते-होते तो यह मानो एक कॉमेडी फिल्म बन गई।

मेरी प्रोफाइल फोटो से न्यूड पिक बनाकर गंदे मीम्स बनाते हैं: काजल ने खोली भीम आर्मी के रावण की पोल ​

भीम आर्मी के रावण के घटिया, अश्लील और गाली भरे ट्वीट्स को ले कर काजल हिंदुस्तानी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ऑपइंडिया से बात की।

‘सेकुलर’ प्रोपेगेंडा को ‘राष्ट्रवादी’ कार्टूनों से ध्वस्त करता नवयुवक; हिन्दुओं के नरसंहार ने बनाया आर्टिस्ट

इस कलाकार के इरादे इस दिशा में तब और मजबूत हुए, जब 19 जनवरी को उन्होंने कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अत्याचार पर 30 साल बीत जाने पर भी लोगों को चुप देखा।

NCERT किताबों में तथ्य कम, झूठ ज्यादा: अजीत भारती की नीरज अत्री से बातचीत | Ajeet Bharti discussing Leftist Propaganda in NCERT Books

NCERT पुस्तकों में मुगलों और इस्लामिक शासकों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है, जबकि हिन्दू राज्यों को ऐसे प्रस्तुत किया गया है, जैसे...

इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में प्रवासी लौटें अपने गृहराज्य: प्रदीप भंडारी से मजदूरों के हालात और आगे की जिंदगी पर बातचीत

किसी भी प्रवासी में मोदी के विरोध जैसी कोई भावना नहीं थी। यहाँ तक कि कई लोगों की राय थी कि अगर मोदी पीएम नहीं होते तो देश की स्थिति और खराब हो सकती थी।

Interview: ‘पंचायत चुनावों ने की गाँवों की हत्या, नए लेखकों ने रखा लव जिहाद जैसे विषय को साहित्य से अछूता’

चाहे कोई भी वर्ग हो वो उनकी किताब की चाहकर भी नकारात्मक आलोचना नहीं कर सकता, क्योंकि उन्होंने अपनी किताब में सिर्फ़ सच्चाई लिखी है। वे कहते हैं कि किताब में मौजूद कहानियों को पाठक अपने से जोड़कर महसूस कर पाएगा और उसे ये भी लगेगा कि अगर वो इन मुद्दों पर लिखता तो वैसा ही लिखता जैसे श्रीमुख ने उन्हें पेश किया।

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