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नाम: मीनू हांडा, कंपनी: गूगल (डायरेक्टर, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन), काम: PM मोदी के खिलाफ घृणा दिखाना

मीनू हांडा की सोशल मीडिया प्रोफाइल में पीएम मोदी और वर्तमान केंद्र सरकार के लिए आलोचना और घृणा ही दिखाई देती है।

भगवा कपड़ों में ‘यीशु दरबार’ लगाने वाला कुलपति, जो कोरोना को ‘हुक्म देकर’ भगाता है: ₹23 Cr के घोटाले में जा चुका है जेल...

"हम तेरे (कोरोना) अधिकार को समाप्त करते हैं। जहाँ से तू आया है, तुझे हम वहीं भेज देते हैं यीशु के नाम से। आज से और इसी घड़ी से इसी समय से ये शैतानी शक्ति देश को छोड़ दे।"

‘3 महीने का समय दीजिए, हमने महामारी में लोगों को सहारा दिया’: Twitter गिड़गिड़ाया – अपने कर्मचारियों के लिए चिंतित

"Twitter को इन नियमों को लागू करने के लिए 3 महीने का समय दिया जाए। हम भारत के लोगों के प्रति गहराई से समर्पित हैं और इस महामारी के समय में हमारी सेवाएँ लोगों के लिए सहारा बनी हैं।"

बुद्धिजीवी, प्रोपगेंडाजीवी, आन्दोलनजीवी… इकोसिस्टम ने खोले सारे ‘घोड़े’, फिर भी PM मोदी अडिग

कोई राहुल गाँधी इस बात के सहारे नहीं नहीं बैठ सकता कि कोई रवीश कुमार रोज फेसबुक पोस्ट लिखकर उसे सत्ता दिला सकता है। कोई रवीश कुमार इस सोच के सहारे नहीं बैठ सकता कि......

PM मोदी के खिलाफ विदेशी मीडिया गिरोह और उसका प्रोपेगेंडा: कभी ‘डिवाइडर इन चीफ’ तो कभी Covid के ‘एकमात्र जिम्मेदार’

मीडिया गिरोह और भारत के राष्ट्रवादी लोगों का युद्ध बहुत आगे तक चलने वाला है। इस युद्ध में इतना तो निश्चित है कि मीडिया, हिंदुओं और भारत के हितों पर जोरदार प्रहार करने वाला है और उसके सामने खड़े हैं प्रधानमंत्री मोदी और उनका समर्थन करने वाले करोड़ों हिन्दू।

7 साल बाद PM मोदी यहाँ हैं… नेहरू, इंदिरा, मनमोहन कहाँ थे

नेता और राजनेता के बीच का फर्क ही मोदी की बतौर प्रधानमंत्री सात साल की यात्रा है। यह उन्हें अपने पूर्ववर्तियों से कहीं आगे खड़ा करती है।

PM मोदी के 7 साल: वे फैसले जो साबित हुए मील का पत्थर, खुला सशक्त और आत्मनिर्भर भारत का रास्ता

26 मई 2014। यही वह तारीख है जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की पहली बार शपथ ली थी। एक नजर उनके उन फैसलों पर जिसने भारत की समृद्धि के द्वार खोले।

राजनीति से नहीं ट्विटर के रार का सरोकार, यह ‘विदेशी मसीहा’ को लेकर लिबरल बेचैनी का है इजहार

बात पुराने पापों पर पर्दा डालने की हो या नए प्रोपेगेंडा की, देशी लिबरलों को अब विदेशी मदद की दरकार है, क्योंकि उनके घरेलू नायक बेपर्दा हो चुके हैं।

‘मिटा दिए गए CCTV सबूत, गवाह को नहीं किया गया पेश’: जानिए क्यों बरी हुए तरुण तेजपाल, सरकार पहुँची बॉम्बे HC

कोर्ट ने ये भी नोट किया है कि एक गवाह बयान देने के लिए तैयार था, लेकिन फिर भी उसे पेश नहीं किया गया। साथ ही 'तहलका' के सर्वर में कुछ जरूरी इमेल्स थे, जिन्हें पेश नहीं किया गया।

‘एक ऐसी महामारी जो…’: चरक ने हजारों साल पहले चेताया था, पर वायरस की जगह आयुर्वेद से लड़ रहा IMA

जब IMA लड़ाई को एलोपैथ बनाम आयुर्वेद बनाने में जुटा है, यह जानना जरूरी हो जाता है कि संक्रामक रोगों के बारे में आयुर्वेद कहता क्या है?

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