गयूर अहमद की शादी अनीशा ने 7 वर्ष पहले हुई थी। उनके दो बच्चे भी हैं। इसी दौरान अनीशा को पड़ोस में रहने वाले क़सीम से प्यार हो गया। क़सीम सऊदी में कारपेंटर का काम करता था। पहले तो दोनों चोरी-छिपे मिलते थे, बाद में खुलेआम मिलना-जुलना चालू हो गया।
नाले में मिली लाश। शर्ट देख कर टेलर ने मृतक की पहचान कृष्णा के तौर पर की। असल में कृष्णा अपने शर्ट के कॉलर के नीचे के 3-4 बटन हमेशा अलग रंग के लगवाता था। जब पुलिस हत्या के तह तक पहुँची तो उसे प्यार, धोखा और लालच से भरी एक कहानी मिली।
"मैं अपने अम्मी व अब्बू से अल्लाह के नाम पर रहम माँगती रही लेकिन उन लोगों ने पीटना जारी रखा। बार-बार गिड़गिड़ाने के बावजूद परिजनों ने अपनी बेरहमी जारी रखी। मैं अपने प्रेमी से प्यार करती हूँ और उससे ही निकाह करूँगी, भले ही जान ही क्यों न चली जाए।"
वॉरविक इकोनॉमिक समिट में बैकस ने एक शोधपत्र पढ़ा था, जिसमें बैकस ने 1961 में डॉ फ्रैंक ड्रेक द्वारा दिए गए एक फॉर्मूले का इस्तेमाल यह जानने के लिए किया था कि उनके आसपास रहने वाली कितनी लड़कियाँ गर्लफ्रेंड बन सकती हैं।